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Noida News: औद्योगिक और आईटी प्लॉट का एफएआर बढ़ाने की तैयारी
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आवास एवं शहरी नियोजन के बाद औद्योगिक विकास विभाग में मंथन शुरू, नोएडा के उद्यमी लंबे समय से कर रहे मांग
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। शहर के औद्योगिक और आईटी उपयोग के प्लॉट पर निर्माण के लिए फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। प्लॉट के आवंटी को एफएआर खरीदना होगा। पिछले दिनों आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने सभी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में एफएआर बढ़ाया है। इसके बाद नोएडा प्राधिकरण और शासन स्तर पर औद्योगिक विकास विभाग ने भी मंथन शुरू कर दिया है। इससे औद्योगिक व आईटी प्लॉट पर इमारतें और ऊंची बन सकेंगी। औद्योगिक प्लॉट पर स्थापित इकाई का विस्तार होगा। आईटी प्लॉट पर भी इसी तरह और जगह निकलेगी।
दरअसल, नोएडा में एफएआर के मानक कई वर्ष पहले तय किए गए थे। उद्यमियों का कहना है कि एफएआर बढ़ने से आईटी व औद्योगिक इकाई को वह बगैर दूसरी जमीन खरीदे विस्तार दे पाएंगे। साथ ही, सहायक छोटी इकाई की भी स्थापना करना संभव होगा। इससे शहर का औद्योगिक विकास और तेजी से होगा। प्राधिकरण को भी पैसा मिलेगा। एक एफएआर की कीमत क्षेत्रफल पर सर्कल रेट की 20 से 25 प्रतिशत तक होती है।
मौजूदा समय में नोएडा में एफएआर
नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र में मौजूदा समय में औद्योगिक प्लॉट पर एफएआर 1 से 1.5 है। मानक यह हैं कि 1 हजार वर्गमीटर तक के प्लॉट पर एफएआर 1.5, एक हजार से 12 हजार वर्गमीटर पर 1.3 व 12 हजार वर्गमीटर से ज्यादा क्षेत्रफल वाले प्लॉट का एफएआर 1 है। वहीं फ्लैटेड फैक्ट्री के लिए एफएआर 1.4 तय है। आईटी प्लॉट पर एफएआर 2.5 है। मेट्रो रूट के आसपास प्लॉट होने पर .5 एफएआर अतिरिक्त मिलता है। वहीं, आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों में एफएआर के नए मानक तय किए हैं।
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क्या है एफएआर
जब भी किसी जमीन का आवंटन होता है तो उसका एफएआर प्राधिकरण आवंटी को देता है। उदाहरण के तौर पर अगर आवंटी को 100 वर्गमीटर का प्लॉट प्राधिकरण ने दिया और प्लॉट का एफएआर दो है तो आवंटी को उस प्लॉट पर 200 वर्ग मीटर कवर्ड एरिया का निर्माण करवाने की मंजूरी मिलती है। अगर वह दो मंजिल बनवाएगा तो 100-100 वर्ग मीटर के दो फ्लोर बनवा सकेगा। अगर आगे और सेटबैक छोड़कर 4 मंजिल बनवाना चाहता है तो 50-50 वर्ग मीटर की 4 मंजिल बनवा सकता है। इसके बाद अतिरिक्त एफएआर प्राधिकरण बेचता है। इसे क्रय योग्य एफएआर कहा जाता है। क्रय योग्य एफएआर के भी मानक तय हैं।
अवस्थापना सुविधाओं पर भी असर
एफएआर बढ़ाने के बाद निर्माण और हो सकेगा। मतलब यह कि औद्योगिक प्लॉट पर औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी। कामगारों की संख्या, पानी, बिजली की मांग बढ़ेगी। साथ ही, पार्किंग की जरूरत भी होगी लेकिन नोएडा के पुराने औद्योगिक सेक्टर जैसे फेज-1 की सड़कें उतनी चौड़ी नहीं हैं। यहां कंपनियों के बाहर ही पार्किंग सड़क पर होने से जाम की स्थिति बनी रहती है। इसी तरह बिजली और पानी की आपूर्ति की भी चुनौती होगी। नोएडा के औद्योगिक सेक्टरों की सड़कों की बात करें तो यहां न्यूनतम 12 मीटर चौड़ी सड़कें हैं। इसके बाद 18, 30, 45, 60 मीटर चौड़ी हैं। एफएआर बढ़ाने के मानक सड़कों की चौड़ाई के आधार पर ही आने की उम्मीद है।
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उद्यमियों की मांग पर औद्योगिक व आईटी प्लॉट का एफएआर बढ़ाने पर प्राधिकरण विचार कर रहा है। शासन स्तर पर भी इसे लेकर रिव्यू किया जा रहा है। - डॉ. लोकेश एम, सीईओ, नोएडा प्राधिकरण
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। शहर के औद्योगिक और आईटी उपयोग के प्लॉट पर निर्माण के लिए फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। प्लॉट के आवंटी को एफएआर खरीदना होगा। पिछले दिनों आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने सभी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में एफएआर बढ़ाया है। इसके बाद नोएडा प्राधिकरण और शासन स्तर पर औद्योगिक विकास विभाग ने भी मंथन शुरू कर दिया है। इससे औद्योगिक व आईटी प्लॉट पर इमारतें और ऊंची बन सकेंगी। औद्योगिक प्लॉट पर स्थापित इकाई का विस्तार होगा। आईटी प्लॉट पर भी इसी तरह और जगह निकलेगी।
दरअसल, नोएडा में एफएआर के मानक कई वर्ष पहले तय किए गए थे। उद्यमियों का कहना है कि एफएआर बढ़ने से आईटी व औद्योगिक इकाई को वह बगैर दूसरी जमीन खरीदे विस्तार दे पाएंगे। साथ ही, सहायक छोटी इकाई की भी स्थापना करना संभव होगा। इससे शहर का औद्योगिक विकास और तेजी से होगा। प्राधिकरण को भी पैसा मिलेगा। एक एफएआर की कीमत क्षेत्रफल पर सर्कल रेट की 20 से 25 प्रतिशत तक होती है।
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मौजूदा समय में नोएडा में एफएआर
नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र में मौजूदा समय में औद्योगिक प्लॉट पर एफएआर 1 से 1.5 है। मानक यह हैं कि 1 हजार वर्गमीटर तक के प्लॉट पर एफएआर 1.5, एक हजार से 12 हजार वर्गमीटर पर 1.3 व 12 हजार वर्गमीटर से ज्यादा क्षेत्रफल वाले प्लॉट का एफएआर 1 है। वहीं फ्लैटेड फैक्ट्री के लिए एफएआर 1.4 तय है। आईटी प्लॉट पर एफएआर 2.5 है। मेट्रो रूट के आसपास प्लॉट होने पर .5 एफएआर अतिरिक्त मिलता है। वहीं, आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों में एफएआर के नए मानक तय किए हैं।
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क्या है एफएआर
जब भी किसी जमीन का आवंटन होता है तो उसका एफएआर प्राधिकरण आवंटी को देता है। उदाहरण के तौर पर अगर आवंटी को 100 वर्गमीटर का प्लॉट प्राधिकरण ने दिया और प्लॉट का एफएआर दो है तो आवंटी को उस प्लॉट पर 200 वर्ग मीटर कवर्ड एरिया का निर्माण करवाने की मंजूरी मिलती है। अगर वह दो मंजिल बनवाएगा तो 100-100 वर्ग मीटर के दो फ्लोर बनवा सकेगा। अगर आगे और सेटबैक छोड़कर 4 मंजिल बनवाना चाहता है तो 50-50 वर्ग मीटर की 4 मंजिल बनवा सकता है। इसके बाद अतिरिक्त एफएआर प्राधिकरण बेचता है। इसे क्रय योग्य एफएआर कहा जाता है। क्रय योग्य एफएआर के भी मानक तय हैं।
अवस्थापना सुविधाओं पर भी असर
एफएआर बढ़ाने के बाद निर्माण और हो सकेगा। मतलब यह कि औद्योगिक प्लॉट पर औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी। कामगारों की संख्या, पानी, बिजली की मांग बढ़ेगी। साथ ही, पार्किंग की जरूरत भी होगी लेकिन नोएडा के पुराने औद्योगिक सेक्टर जैसे फेज-1 की सड़कें उतनी चौड़ी नहीं हैं। यहां कंपनियों के बाहर ही पार्किंग सड़क पर होने से जाम की स्थिति बनी रहती है। इसी तरह बिजली और पानी की आपूर्ति की भी चुनौती होगी। नोएडा के औद्योगिक सेक्टरों की सड़कों की बात करें तो यहां न्यूनतम 12 मीटर चौड़ी सड़कें हैं। इसके बाद 18, 30, 45, 60 मीटर चौड़ी हैं। एफएआर बढ़ाने के मानक सड़कों की चौड़ाई के आधार पर ही आने की उम्मीद है।
उद्यमियों की मांग पर औद्योगिक व आईटी प्लॉट का एफएआर बढ़ाने पर प्राधिकरण विचार कर रहा है। शासन स्तर पर भी इसे लेकर रिव्यू किया जा रहा है। - डॉ. लोकेश एम, सीईओ, नोएडा प्राधिकरण