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Noida News: अस्पताल में प्रसूताओं को मिल रहा पैकेट बंद दूध, गर्म करवाने के लिए करनी होती है जद्दोजहद

Tue, 01 Sep 2026 09:35 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 01 Sep 2026 09:35 PM IST
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Pregnant women admitted in the hospital are getting packaged milk, they have to struggle to get it heated.
नोएडा जिला अस्पताल में प्रसुताओं को दिया जा रहा पैकेट बंद दूध। फोटो अमर उजाला
फोटो है
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-प्रसव के बाद पैकेट बंद दूध गर्म किए बिना पीने से जच्चा बच्चा को हो सकता है संक्रमण का खतरा
-पैकेट बंद दूध गर्म करने की कोई उचित व्यवस्था नहीं, लगाने पड़ते हैं बाहर के चक्कर
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल में भर्ती प्रसूताओं को डाइट चार्ट के अनुसार पैकेट बंद दूध तो उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन इसे गर्म करने की कोई समुचित व्यवस्था वार्डों में नहीं है। ऐसे में तीमारदारों को ठंडा दूध गर्म करवाने के लिए बहुत जद्दोजहद करनी पड़ती है और अस्पताल की कैंटीन से लेकर बाहर के ठेले तक के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

बता दें कि स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में प्रसव के बाद भर्ती होने वाली महिलाओं को सुबह के समय नाश्ते में पैकेट बंद दूध दिया जाता है। पैकेट बंद दूध ठंडा होता है और इसे बिना गर्म किए पीना जच्चा और बच्चा के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में प्रसूताओं के तीमारदारों को पैकेट बंद दूध गर्म करवाने के लिए चक्कर लगाने पड़ते हैं। स्थिति यह है कि कुछ प्रसूताओं के पति पैकेट बंद दूध गर्म किए बिना पैकेट से ही पी जाते हैं जबकि यह प्रसूता के लिए दिया जाता है। इसके अलावा कुछ लोग घर लिए जाते हैं।
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वार्डों में हीटिंग सुविधाओं का अभाव- अधिकांश जनरल और मैटरनिटी वार्डों में इलेक्ट्रिक कैटल या माइक्रोवेव जैसी कोई सुविधा मौजूद नहीं है।
संक्रमण का खतरा- भर्ती मरीजों और छोटे बच्चों को ठंडा पैकेट वाला दूध देने से पेट दर्द और संक्रमण का जोखिम बना रहता है।

कैंटीन से लेकर ठेले के चक्कर- तीमारदारों को दूध गर्म कराने के लिए बाहर मौजूद दुकानों, ठेले या कैंटीन पर निर्भर रहना पड़ता है, जहां कई बार मनमाने पैसे वसूले जाते हैं।
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गर्म करके ही पीना चाहिए पैकेट बंद दूध

जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. प्रदीप कुमार शैलत ने बताया कि पैकेट बंद दूध पर पाश्चुरीकृत लिखा होता है लेकिन पैकेट बंद दूध गर्म करने के बाद ठंडा करके ही पीना चाहिए। इससे सभी कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। कई बार दूध पुराना भी होता है इससे जच्चा और बच्चा के हाजमे पर असर पर सकता है। उल्टी-दस्त की समस्या हो सकती है।

बिस्तरों पर पड़े थे दूध के पैकेट
अमर उजाला की टीम जब मौके पर पहुंची तो दिखाई दिया कि अधिकतर प्रसूताओं को पैकेट बंद दूध मिलने के बाद पैकेट बेड पर पड़ा हुआ था। ऐसे में तीमारदारों का कहना है कि जहां एक तरफ सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं हाईटेक शहर नोएडा के जिला अस्पताल में मरीजों को गर्म दूध जैसी बुनियादी सुविधा के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ रही है।

पैकेट बंद दूध पाश्चुरीकृत होता है ऐसे में बिना गर्म किए ही पिया जा सकता है इसीलिए प्रसूताओं को पैकेट बंद दूध दिया जाता है।----डॉ. अशोक कुमार झा, सीएमएस, जिला अस्पताल
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