{"_id":"613257348ebc3e7a103bcd62","slug":"praveen-kumar-of-jewar-wins-silver-at-tokyo-paralympics-grnoida-news-noi602610794","type":"story","status":"publish","title_hn":"न सुविधाएं, न मैदान फिर भी जेवर के प्रवीण ने छू लिया पैरालंपिक का आसमान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
न सुविधाएं, न मैदान फिर भी जेवर के प्रवीण ने छू लिया पैरालंपिक का आसमान
विज्ञापन
प्रवीण ने इसी स्कूल से की थी प्राथमिक शिक्षा की पढ़ाई।
- फोटो : Grnoida
ग्रेटर नोएडा। जेवर से लगभग 6 किमी दूर यमुना के खादर स्थित गोविंदगढ़ गांव में न तो खेल की सुविधा और न ही मैदान। सुविधाओं के अभाव के बावजूद प्रवीण ने पैरालंपिक में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। पिता अमरपाल सिंह ने बताया कि दिल्ली में कोच से प्रशिक्षण हासिल करने से पहले प्रवीण यमुना नदी के किनारे रेत में गड्ढा कर ऊंची कूद का अभ्यास करते थे।
वहीं चचेरे भाई अंकित ने बताया कि बचपन से वह सभी मिलकर क्रिकेट, वॉलीबॉल खेलते थे। उनकी वॉलीबॉल टीम आसपास के गांवों में भी खेलने जाती थी। प्रवीण गांव की टीम में थे वह ऊंची छलांग लगाकर तेज शॉट लगाता था। मां निर्दोष देवी बताती हैं कि जन्म के एक माह बाद से उनके बेटे के एक पैर में दिक्कत दिखने लगी थी। हालांकि बड़े होने के बाद प्रवीण घर में कूदता-फांदता रहता था। सातवीं कक्षा के बाद उछलकर घर की छत को भी छू लेता था। मां निर्दोष ने बताया कि बचपन में ज्यादा कूद फांद करने पर वह खूब डांटती थीं।
रिश्तेदार कुंवरपाल और लोकेंद्र ने बताया कि गांव में खेलों से जुड़ी कोई सुविधा नहीं थी। कक्षा 9 के बाद प्रवीण स्कूल की ओर से ऊंची कूद और लंबी कूद स्पर्धा में हिस्सा लेने लगा था। तब वह यमुना किनारे रेत पर गड्ढे बनाकर अभ्यास करता था। स्कूल की ओर से सीबीएसई जिला स्तर, प्रदेश स्तर और छत्तीसगढ़ में सीबीएसई नेशनल प्रतियोगिता में हिस्सा लेते वक्त भी ऊंची कूद में स्वर्ण पदक हासिल किया था।
विज्ञापन
कोच डॉ. सत्यपाल ने निखारी प्रतिभा
गाजियाबाद के एक खेल आयोजन में प्रवीण की मुलाकात कोच डॉ. सत्यपाल से हुई थी। उनके कहने पर पैरों के बल ही प्रवीण ने करीब 1.8 मीटर छलांग लगाई थी। इसे देखकर डॉ. सत्यपाल ने उसे प्रशिक्षण देने का फैसला कर लिया था। कोच ने उसे दिल्ली बुलाया और अपने कोटला स्थित फ्लैट की चाभी दे दी। प्रवीण चार वर्षों से लगातार दिल्ली में रहकर ही प्रशिक्षण ले रहे थे। केवल छुट्टियों में ही घर आते थे।
कोरोना संक्रमित होेने के बाद भी कम नहीं हुआ हौसला
टोक्यो पैरालंपिक की तैयारी में जुटे गोविंदगढ़ गांव निवासी प्रवीण कुमार भी कोराना संक्रमण से अछूते नहीं रहे। मार्च में दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामलों को देख कोच सतपाल सिंह ने प्रवीण को गांव भेज दिया। यहां आते ही वह कोरोना संक्रमित हो गए। 21 दिनों तक क्वारंटीन रहने के बाद प्रवीण ने अभ्यास जारी रखा। परिजन मानते हैं कि प्रवीण ने हौसले से ही कोरोना को मात दी और देश को लिए रजत पदक जीतने में कामयाब रहे।
प्रवीण की मां निर्दोष देवी बताती हैं कि होली से पहले 28 मार्च को प्रवीण दिल्ली से घर आए थे। होली के बाद ही वह कोरोना संक्रमित हो गए। प्रवीण ने घर की दूसरी मंजिल पर बने कमरे में खुद को क्वारंटीन कर लिया। कोरोना के दौरान भी प्रवीण ने शारीरिक व्यायाम और हल्का अभ्यास जारी रखा। संक्रमित होने के बाद प्रवीण के कोच ने अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी थी। जबकि उस समय के हालात को देखते हुए परिजनों ने प्रवीण को अस्पताल में भर्ती कराने से इनकार कर दिया था।
खिड़की से बेटे को देखती थी मां
प्रवीण जब क्वारंटीन थे तब मां को दूर से ही खाना रख लौट जाने को कहते थे। कमरे की खिड़की से बेटे को खाना खाते देख वह रोने लग जाती थीं। उनकी मां ने बताया कि प्रवीण का लक्ष्य गोल्ड मेडल जीतने का था।
सुबह से बधाई देने वालों का लगा तांता
जेवर (संवाद)। टोक्यो पैरालंपिक में रजत पदक जीतने की खबर सुनकर सुबह से गोविंदगढ़ स्थित प्रवीण के घर बधाई देने के लिए पहुंचने वालों का तांता लग गया। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी प्रवीण के माता-पिता से फोन पर बात कर शुभकामनाएं दीं। जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह भी गोविंदगढ़ गांव स्थित घर पर प्रवीण के पिता अमरपाल सिंह, मां निर्दोष देवी से मिलने पहुंचे। उन्होंने प्रवीण के माता-पिता की मुख्यमंत्री से फोन पर बातचीत कराई। मुख्यमंत्री ने माता-पिता को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जल्द ही राज्य सरकार पैरालंपिक में शानदार प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित करेगी। उन्होंने माता पिता को कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया।
प्रवीण के नाम से जेवर में बनेगा स्टेडियम
प्रवीण की जीत पर विधायक धीरेंद्र सिंह ने जेवर में प्रवीण के नाम से स्टेडियम का निर्माण कराने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि स्टेडियम निर्माण में यमुना प्राधिकरण से भी सहयोग लिया जाएगा। विधायक के मुताबिक प्रवीण की जीत से युवाओं में खेल के प्रति उत्साह पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि यीडा के सीईओ ने भी स्टेडियम निर्माण को लेकर सहमति दे दी है। सोमवार को इसका प्रस्ताव भेजा जाएगा।
पेरिस पैरालंपिक में स्वर्ण जीतने का लक्ष्य
जेवर। पैरालंपिक में स्पर्धा में शामिल होने से पहले प्रवीण ने माता-पिता के अलावा कोच सतपाल सिंह से फोन पर बात कर उनका आशीर्वाद लिया था। प्रवीण ने अपनी जीत का श्रेय भी माता-पिता और कोच को दिया है। द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कोच सतपाल सिंह ने कहा कि उनके शिष्य ने रजत जीत कर देश का सम्मान बढ़ाया। उन्होंने बताया टोक्यो में फल और जूस से ही काम चला कर पदक जीतने में कामयाब रहे हैं। प्रवीण कुमार ने टोक्यो से अमर उजाला से खास बातचीत में बताया कि उनका लक्ष्य पेरिस पैरालंपिक में स्वर्ण जीतने का है। जिसके लिए वह अभ्यास लगातार जारी रखेंगे। वह 7 सितंबर को टोक्यो से लौटेंगे व 10 सितंबर को जेवर पहुंचेंगे।
स्कूल से ही शुरू हो गया था जीत का सिलसिला
जेवर। जेवर के प्रज्ञान पब्लिक स्कूल में भी प्रवीण कुमार के सिल्वर मेडल जीतने पर खुशी का माहौल रहा। प्रवीण का प्रदर्शन देखने के लिए स्कूल में बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गई थी। जीतने के बाद स्कूल की प्रधानाचार्य व प्रबंधक ने प्रवीण के माता पिता को उनके घर जाकर शुभकामनाएं दी। प्रधानाचार्य दीप्ति शर्मा ने बताया कि प्रवीण उनके यहां सातवीं कक्षा में आया था। नौवीं कक्षा में प्रवीण ने स्कूल और जिला स्तर पर जीत हासिल की थी। जिसके बाद वर्ष 2017 में आयोजित 22वें सीबीएसई क्लस्टर और उसके बाद नेशनल एथलेटिक्स मीट में स्वर्ण पदक हासिल किया। जिसमें प्रवीण ने 1.84 मीटर की छलांग लगाई। वर्ष 2019 में दुबई में आयोजित सीनियर वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में जीत के साथ ही प्रवीण कुमार का चयन टोक्यो में होने वाले पैरालंपिक 2020 के लिए चयन हुआ।
खुद डीयू से कर रहे पढ़ाई, भाई कर रहा सिविल सेवा की तैयारी
प्रवीण कुमार साधारण किसान परिवार से हैं। वह दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए फाइनल की पढ़ाई कर रहे हैं। बड़ा भाई दिल्ली के मुखर्जी नगर में रहकर सिविल सेवा की परीक्षा की तैयारी कर रहा है। बहन प्रिया ने 12वीं की परीक्षा पास की है।
विज्ञापन
वहीं चचेरे भाई अंकित ने बताया कि बचपन से वह सभी मिलकर क्रिकेट, वॉलीबॉल खेलते थे। उनकी वॉलीबॉल टीम आसपास के गांवों में भी खेलने जाती थी। प्रवीण गांव की टीम में थे वह ऊंची छलांग लगाकर तेज शॉट लगाता था। मां निर्दोष देवी बताती हैं कि जन्म के एक माह बाद से उनके बेटे के एक पैर में दिक्कत दिखने लगी थी। हालांकि बड़े होने के बाद प्रवीण घर में कूदता-फांदता रहता था। सातवीं कक्षा के बाद उछलकर घर की छत को भी छू लेता था। मां निर्दोष ने बताया कि बचपन में ज्यादा कूद फांद करने पर वह खूब डांटती थीं।
विज्ञापन
रिश्तेदार कुंवरपाल और लोकेंद्र ने बताया कि गांव में खेलों से जुड़ी कोई सुविधा नहीं थी। कक्षा 9 के बाद प्रवीण स्कूल की ओर से ऊंची कूद और लंबी कूद स्पर्धा में हिस्सा लेने लगा था। तब वह यमुना किनारे रेत पर गड्ढे बनाकर अभ्यास करता था। स्कूल की ओर से सीबीएसई जिला स्तर, प्रदेश स्तर और छत्तीसगढ़ में सीबीएसई नेशनल प्रतियोगिता में हिस्सा लेते वक्त भी ऊंची कूद में स्वर्ण पदक हासिल किया था।
विज्ञापन
कोच डॉ. सत्यपाल ने निखारी प्रतिभा
गाजियाबाद के एक खेल आयोजन में प्रवीण की मुलाकात कोच डॉ. सत्यपाल से हुई थी। उनके कहने पर पैरों के बल ही प्रवीण ने करीब 1.8 मीटर छलांग लगाई थी। इसे देखकर डॉ. सत्यपाल ने उसे प्रशिक्षण देने का फैसला कर लिया था। कोच ने उसे दिल्ली बुलाया और अपने कोटला स्थित फ्लैट की चाभी दे दी। प्रवीण चार वर्षों से लगातार दिल्ली में रहकर ही प्रशिक्षण ले रहे थे। केवल छुट्टियों में ही घर आते थे।
कोरोना संक्रमित होेने के बाद भी कम नहीं हुआ हौसला
टोक्यो पैरालंपिक की तैयारी में जुटे गोविंदगढ़ गांव निवासी प्रवीण कुमार भी कोराना संक्रमण से अछूते नहीं रहे। मार्च में दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामलों को देख कोच सतपाल सिंह ने प्रवीण को गांव भेज दिया। यहां आते ही वह कोरोना संक्रमित हो गए। 21 दिनों तक क्वारंटीन रहने के बाद प्रवीण ने अभ्यास जारी रखा। परिजन मानते हैं कि प्रवीण ने हौसले से ही कोरोना को मात दी और देश को लिए रजत पदक जीतने में कामयाब रहे।
प्रवीण की मां निर्दोष देवी बताती हैं कि होली से पहले 28 मार्च को प्रवीण दिल्ली से घर आए थे। होली के बाद ही वह कोरोना संक्रमित हो गए। प्रवीण ने घर की दूसरी मंजिल पर बने कमरे में खुद को क्वारंटीन कर लिया। कोरोना के दौरान भी प्रवीण ने शारीरिक व्यायाम और हल्का अभ्यास जारी रखा। संक्रमित होने के बाद प्रवीण के कोच ने अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी थी। जबकि उस समय के हालात को देखते हुए परिजनों ने प्रवीण को अस्पताल में भर्ती कराने से इनकार कर दिया था।
खिड़की से बेटे को देखती थी मां
प्रवीण जब क्वारंटीन थे तब मां को दूर से ही खाना रख लौट जाने को कहते थे। कमरे की खिड़की से बेटे को खाना खाते देख वह रोने लग जाती थीं। उनकी मां ने बताया कि प्रवीण का लक्ष्य गोल्ड मेडल जीतने का था।
सुबह से बधाई देने वालों का लगा तांता
जेवर (संवाद)। टोक्यो पैरालंपिक में रजत पदक जीतने की खबर सुनकर सुबह से गोविंदगढ़ स्थित प्रवीण के घर बधाई देने के लिए पहुंचने वालों का तांता लग गया। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी प्रवीण के माता-पिता से फोन पर बात कर शुभकामनाएं दीं। जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह भी गोविंदगढ़ गांव स्थित घर पर प्रवीण के पिता अमरपाल सिंह, मां निर्दोष देवी से मिलने पहुंचे। उन्होंने प्रवीण के माता-पिता की मुख्यमंत्री से फोन पर बातचीत कराई। मुख्यमंत्री ने माता-पिता को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जल्द ही राज्य सरकार पैरालंपिक में शानदार प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित करेगी। उन्होंने माता पिता को कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया।
प्रवीण के नाम से जेवर में बनेगा स्टेडियम
प्रवीण की जीत पर विधायक धीरेंद्र सिंह ने जेवर में प्रवीण के नाम से स्टेडियम का निर्माण कराने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि स्टेडियम निर्माण में यमुना प्राधिकरण से भी सहयोग लिया जाएगा। विधायक के मुताबिक प्रवीण की जीत से युवाओं में खेल के प्रति उत्साह पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि यीडा के सीईओ ने भी स्टेडियम निर्माण को लेकर सहमति दे दी है। सोमवार को इसका प्रस्ताव भेजा जाएगा।
पेरिस पैरालंपिक में स्वर्ण जीतने का लक्ष्य
जेवर। पैरालंपिक में स्पर्धा में शामिल होने से पहले प्रवीण ने माता-पिता के अलावा कोच सतपाल सिंह से फोन पर बात कर उनका आशीर्वाद लिया था। प्रवीण ने अपनी जीत का श्रेय भी माता-पिता और कोच को दिया है। द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कोच सतपाल सिंह ने कहा कि उनके शिष्य ने रजत जीत कर देश का सम्मान बढ़ाया। उन्होंने बताया टोक्यो में फल और जूस से ही काम चला कर पदक जीतने में कामयाब रहे हैं। प्रवीण कुमार ने टोक्यो से अमर उजाला से खास बातचीत में बताया कि उनका लक्ष्य पेरिस पैरालंपिक में स्वर्ण जीतने का है। जिसके लिए वह अभ्यास लगातार जारी रखेंगे। वह 7 सितंबर को टोक्यो से लौटेंगे व 10 सितंबर को जेवर पहुंचेंगे।
स्कूल से ही शुरू हो गया था जीत का सिलसिला
जेवर। जेवर के प्रज्ञान पब्लिक स्कूल में भी प्रवीण कुमार के सिल्वर मेडल जीतने पर खुशी का माहौल रहा। प्रवीण का प्रदर्शन देखने के लिए स्कूल में बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गई थी। जीतने के बाद स्कूल की प्रधानाचार्य व प्रबंधक ने प्रवीण के माता पिता को उनके घर जाकर शुभकामनाएं दी। प्रधानाचार्य दीप्ति शर्मा ने बताया कि प्रवीण उनके यहां सातवीं कक्षा में आया था। नौवीं कक्षा में प्रवीण ने स्कूल और जिला स्तर पर जीत हासिल की थी। जिसके बाद वर्ष 2017 में आयोजित 22वें सीबीएसई क्लस्टर और उसके बाद नेशनल एथलेटिक्स मीट में स्वर्ण पदक हासिल किया। जिसमें प्रवीण ने 1.84 मीटर की छलांग लगाई। वर्ष 2019 में दुबई में आयोजित सीनियर वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में जीत के साथ ही प्रवीण कुमार का चयन टोक्यो में होने वाले पैरालंपिक 2020 के लिए चयन हुआ।
खुद डीयू से कर रहे पढ़ाई, भाई कर रहा सिविल सेवा की तैयारी
प्रवीण कुमार साधारण किसान परिवार से हैं। वह दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए फाइनल की पढ़ाई कर रहे हैं। बड़ा भाई दिल्ली के मुखर्जी नगर में रहकर सिविल सेवा की परीक्षा की तैयारी कर रहा है। बहन प्रिया ने 12वीं की परीक्षा पास की है।

जेवर के गोविंदगढ़ गांव में प्रवीण कुमार का घर। - फोटो : Grnoida

प्रवीण कुमार के मेडल दिखाते पिता, मां और चाचा। - फोटो : Grnoida