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निर्विरोध प्रधान बनने के लिए लगवा दिए थे पोस्टर
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निर्विरोध प्रधान बनने के लिए लगवा दिए थे पोस्टर
अंकित गुर्जर हत्या मामला, गांववालों को दी थी धमकी, चुनाव लड़ने वाला बचेगा नहीं
- दक्षिण दिल्ली में वर्चस्व कायम करने की फिराक में था, अपराध शाखा ने हाल ही में लगाया था मकोका
अमर उजाला ब्यूरो/संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली/ बागपत। उत्तर प्रदेश के बागपत में चांदी नगर थाना क्षेत्र के गांव खैला निवासी अंकित गुज्जर (29) अपने गांव का निर्विरोध प्रधानी बनना चाहता था। 19 जुलाई 2019 को उसने अपने राजनीतिक विरोधी और प्रधान पद के दावेदार पूर्व प्रधान विनोद की हत्या कर दी थी। इसके बाद उसने गांव में धमकी भरे पोस्टर लगवाए थे, जिनमें कहा था कि जो कोई उसके खिलाफ चुनाव में खड़ा होगा, उसका हाल भी विनोद जैसा होगा। चांदी नगर थाने में इस मामले की रिपोर्ट 28 सितंबर 2019 को दर्ज हुई थी। वह दक्षिण दिल्ली में वर्चस्व कायम करने की फिराक में था।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हरियाणा के झज्जर में चार अगस्त 2020 को मुठभेड़ के बाद आठ हत्याओं सहित 10 वारदात में वांछित अंकित को एक वर्ष पहले अनिल उर्फ मांडवाली के साथ गिरफ्तार किया था। एसीपी ललित मोहन नेगी की टीम ने अंकित को घेरा तो उसने गोली चला दी। पुलिस ने इसकी एसयूवी के टायरों में गोली मारी। इनके पास से दो ऑटोमेटिक पिस्टल और एक एसयूवी बरामद की गई थी। गिरफ्तारी के बाद से ही वह जेल में था, दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने उसे हाल ही में तिहाड़ जेल से ट्रांजिट रिमांड पर लेकर मकोका में गिरफ्तार किया था।
स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अंकित गुर्जर चालाक अपराधी था। वर्ष 2019 में ग्राम प्रधान बनने के लिए उसने विरोधी प्रत्याशी विनोद की हत्या कर दी थी। इसके बाद पूरे गांव में धमकी भरे पोस्टर लगवाए थे कि कोई उसके खिलाफ चुनाव में खड़ा हुआ तो हत्या करा दी जाएगी। पोस्टर में लिखा था-‘मैं अंकित उर्फ बाबा। मेरा सभी गांववासियों से निवेदन है कि मुझे अपने गांव में निर्विरोध प्रधानी चाहिए। अगर निवेदन से भी समझ नहीं आया तो फिर रिजल्ट आपके सामने है। अगर मुझे किसी और के चुनाव में खड़े होने की सूचना मिली तो फिर अंजाम विनोद की तरह होगा। टिकट भरने के लिए गेट तो नहीं पर बड़े गांव की नहर भी पार नहीं करने दूंगा।’ बागपत पुलिस ने दावा किया था कि चुनाव में रास्ते से हटाने के लिए अंकित ने पूर्व प्रधान विनोद की हत्या कर दी थी। इसके बाद विनोद की पत्नी मंजू और अंकित की मां गीता चुनाव मैदान में थीं। इसमें गीता चुनाव जीत गई।
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दक्षिण दिल्ली के कई गैंगेस्टरों से मिलाया था हाथ
नई दिल्ली। अंकित गुर्जर ने हाल ही में दक्षिण दिल्ली के गैंगेस्टर रोहित चौधरी से हाथ मिला लिया था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, डर के कारण इलाके के कई छोटे गैंगेस्टर भी इनके साथ आ गए। अगस्त-2020 में गिरफ्तारी से पहले ये सभी राजस्थान के नीमराणा से गिरोह चला रहे थे। अंकित की रोहित से मुलाकात जेल में हुई थी। जेल से छूटने के बाद दोनों ने चौधरी-गुर्जर नाम से गैंग बनाया था। दोनों दक्षिण दिल्ली में बहुत तेजी से पैठ बढ़ा रहे थे। इनका मकसद धीरे-धीरे पूरी दिल्ली में वर्चस्व बनाने का था।
रोहित के साथ लगाया गया था मकोका
साकेत इलाके में विरोधी गिरोह के सरगना प्रिंस बिहारी की हत्या के मामले की तफ्तीश दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा कर रही थी। इस मामले में अंकित पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। पुलिस ने रोहित चौधरी, अंकित और गिरोह के अन्य बदमाशों पर मकोका लगाया था। अपराध शाखा की टीम ने उसे जेल से ट्रांजिट रिमांड पर लिया और मकोका में गिरफ्तार किया था।
जमानत मिलते ही फिर अपराधों में जुटा
बागपत। अंकित को वर्ष 2015 में यूपी पुलिस ने दस से ज्यादा मामलों में गिरफ्तार किया था। वर्ष 2019 में उसे जमानत मिल गई। बाहर आते ही अंकित फिर से अपराध में जुट गया। उसने छह से ज्यादा वारदात कीं। चार फरवरी, 2019 को उसने दिल्ली के लक्ष्मी नगर में एक व्यक्ति से रंगदारी मांगी। मना करने पर इसने उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग की, लेकिन वह बच गया। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने इस पर 25 हजार का इनाम घोषित किया था। 6 मई को इसने साकेत में विरोधी गिरोह के सरगना प्रिंस बिहारी की गोली मारकर हत्या कर दी। 19 अप्रैल को उसने गौतमबुद्ध नगर में थाना फेज-तीन क्षेत्र से कॉल सेंटर मालिक का अपहरण किया और फिरौती मांगी। इस मामले में यूपी पुलिस ने उस पर 50 हजार का इनाम घोषित किया था। उसने वसंत कुंज इलाके में शराब तस्कर से रंगदारी मांगी थी और मना करने पर गोली चलाई।
2012 में रखा था जरायम की दुनिया में कदम
बागपत। चांदीनगर थाना प्रभारी सत्येंद्र सिंह का कहना है कि कुख्यात अंकित की दिल्ली तिहाड़ जेल में मौत होने की जानकारी मिली है। उसके परिजन दिल्ली चले गए हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक उसने वर्ष 2012 में जरायम की दुनिया में कदम रखा था। सबसे पहले गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में उसके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसके खिलाफ बागपत, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, दिल्ली के विभिन्न थानों में 16 मुकदमें दर्ज हैं। इनमें हत्या के छह केस शामिल हैं। खैला गांव के पूर्व प्रधान राजे के पुत्र विनोद की 18 जुलाई 2019 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
सेल में मोबाइल मिलने के बाद
जेल कर्मियों से हुई थी मारपीट
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जेल अधिकारियों का दावा है कि अंकित की मौत कैदियों की आपसी मारपीट में हुई, जबकि जेल के सूत्र बता रहे हैं कि सेल में तलाशी अभियान के दौरान मोबाइल मिलने के बाद हुए विवाद में अंकित ने एक जेल कर्मी की पिटाई कर दी थी। इसके बाद हुई मारपीट में उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप भी यही है।
तिहाड़ जेल के सूत्रों का कहना है कि मंगलवार को अंकित की सेल में तलाशी अभियान चलाया गया था। जेल कर्मियों ने सेल व कैदियों की तलाशी ली थी। इसका अंकित व उसके साथियों ने विरोध किया था। बताया जा रहा है कि अंकित की सेल के बाहर से मोबाइल मिला था। तलाशी के दौरान सेल से चार्जर मिल गया। इस बात पर अंकित व जेलकर्मी के बीच विवाद बढ़ गया। अंकित ने जेल कर्मी की पिटाई कर दी थी। आरोप है कि बाद में जेल कर्मियों ने सेल बदलने के नाम पर अंकित के साथ मारपीट की थी। इस संबंध में जेल प्रशासन का कहना है कि सेल में बंद कैदियों के बीच किसी बात पर मारपीट हुई होगी। इसमें अंकित व दूसरे कैदियों को चोट लगी होगी। तिहाड़ प्रशासन जांच कर रहा है।
परिजनों ने जेल के बाहर
एकत्र होकर की नारेबाजी
अंकित गुर्जर के परिजन बुधवार सुबह ही तिहाड़ जेल पहुंच गए थे। परिजनों ने जेल के सामने एकत्रित होकर नारेबाजी भी की। परिजनों का आरोप जेल कर्मियों पर अंकित की पिटाई करने का है। उनका कहना है कि अंकित ने मोबाइल मिलने पर जेल अधिकारी के आचरण पर आपत्ति जताई थी। उसने इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से करने की बात कही थी। इससे गुस्साए जेल कर्मियों ने इस कदर पिटाई की कि उसकी मौत हो गई। उधर, जेल अधिकारियों के मुताबिक, अंकित की सुरक्षा को देखते हुए उसेे सेल में रखा गया था। उसके साथ घायल मिले दोनों सगे भाई दक्षिणपुरी के रहने वाले हैं। वे हत्या के मामले में जेल में बंद हैं।
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अंकित गुर्जर हत्या मामला, गांववालों को दी थी धमकी, चुनाव लड़ने वाला बचेगा नहीं
- दक्षिण दिल्ली में वर्चस्व कायम करने की फिराक में था, अपराध शाखा ने हाल ही में लगाया था मकोका
अमर उजाला ब्यूरो/संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली/ बागपत। उत्तर प्रदेश के बागपत में चांदी नगर थाना क्षेत्र के गांव खैला निवासी अंकित गुज्जर (29) अपने गांव का निर्विरोध प्रधानी बनना चाहता था। 19 जुलाई 2019 को उसने अपने राजनीतिक विरोधी और प्रधान पद के दावेदार पूर्व प्रधान विनोद की हत्या कर दी थी। इसके बाद उसने गांव में धमकी भरे पोस्टर लगवाए थे, जिनमें कहा था कि जो कोई उसके खिलाफ चुनाव में खड़ा होगा, उसका हाल भी विनोद जैसा होगा। चांदी नगर थाने में इस मामले की रिपोर्ट 28 सितंबर 2019 को दर्ज हुई थी। वह दक्षिण दिल्ली में वर्चस्व कायम करने की फिराक में था।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हरियाणा के झज्जर में चार अगस्त 2020 को मुठभेड़ के बाद आठ हत्याओं सहित 10 वारदात में वांछित अंकित को एक वर्ष पहले अनिल उर्फ मांडवाली के साथ गिरफ्तार किया था। एसीपी ललित मोहन नेगी की टीम ने अंकित को घेरा तो उसने गोली चला दी। पुलिस ने इसकी एसयूवी के टायरों में गोली मारी। इनके पास से दो ऑटोमेटिक पिस्टल और एक एसयूवी बरामद की गई थी। गिरफ्तारी के बाद से ही वह जेल में था, दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने उसे हाल ही में तिहाड़ जेल से ट्रांजिट रिमांड पर लेकर मकोका में गिरफ्तार किया था।
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स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अंकित गुर्जर चालाक अपराधी था। वर्ष 2019 में ग्राम प्रधान बनने के लिए उसने विरोधी प्रत्याशी विनोद की हत्या कर दी थी। इसके बाद पूरे गांव में धमकी भरे पोस्टर लगवाए थे कि कोई उसके खिलाफ चुनाव में खड़ा हुआ तो हत्या करा दी जाएगी। पोस्टर में लिखा था-‘मैं अंकित उर्फ बाबा। मेरा सभी गांववासियों से निवेदन है कि मुझे अपने गांव में निर्विरोध प्रधानी चाहिए। अगर निवेदन से भी समझ नहीं आया तो फिर रिजल्ट आपके सामने है। अगर मुझे किसी और के चुनाव में खड़े होने की सूचना मिली तो फिर अंजाम विनोद की तरह होगा। टिकट भरने के लिए गेट तो नहीं पर बड़े गांव की नहर भी पार नहीं करने दूंगा।’ बागपत पुलिस ने दावा किया था कि चुनाव में रास्ते से हटाने के लिए अंकित ने पूर्व प्रधान विनोद की हत्या कर दी थी। इसके बाद विनोद की पत्नी मंजू और अंकित की मां गीता चुनाव मैदान में थीं। इसमें गीता चुनाव जीत गई।
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दक्षिण दिल्ली के कई गैंगेस्टरों से मिलाया था हाथ
नई दिल्ली। अंकित गुर्जर ने हाल ही में दक्षिण दिल्ली के गैंगेस्टर रोहित चौधरी से हाथ मिला लिया था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, डर के कारण इलाके के कई छोटे गैंगेस्टर भी इनके साथ आ गए। अगस्त-2020 में गिरफ्तारी से पहले ये सभी राजस्थान के नीमराणा से गिरोह चला रहे थे। अंकित की रोहित से मुलाकात जेल में हुई थी। जेल से छूटने के बाद दोनों ने चौधरी-गुर्जर नाम से गैंग बनाया था। दोनों दक्षिण दिल्ली में बहुत तेजी से पैठ बढ़ा रहे थे। इनका मकसद धीरे-धीरे पूरी दिल्ली में वर्चस्व बनाने का था।
रोहित के साथ लगाया गया था मकोका
साकेत इलाके में विरोधी गिरोह के सरगना प्रिंस बिहारी की हत्या के मामले की तफ्तीश दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा कर रही थी। इस मामले में अंकित पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। पुलिस ने रोहित चौधरी, अंकित और गिरोह के अन्य बदमाशों पर मकोका लगाया था। अपराध शाखा की टीम ने उसे जेल से ट्रांजिट रिमांड पर लिया और मकोका में गिरफ्तार किया था।
जमानत मिलते ही फिर अपराधों में जुटा
बागपत। अंकित को वर्ष 2015 में यूपी पुलिस ने दस से ज्यादा मामलों में गिरफ्तार किया था। वर्ष 2019 में उसे जमानत मिल गई। बाहर आते ही अंकित फिर से अपराध में जुट गया। उसने छह से ज्यादा वारदात कीं। चार फरवरी, 2019 को उसने दिल्ली के लक्ष्मी नगर में एक व्यक्ति से रंगदारी मांगी। मना करने पर इसने उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग की, लेकिन वह बच गया। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने इस पर 25 हजार का इनाम घोषित किया था। 6 मई को इसने साकेत में विरोधी गिरोह के सरगना प्रिंस बिहारी की गोली मारकर हत्या कर दी। 19 अप्रैल को उसने गौतमबुद्ध नगर में थाना फेज-तीन क्षेत्र से कॉल सेंटर मालिक का अपहरण किया और फिरौती मांगी। इस मामले में यूपी पुलिस ने उस पर 50 हजार का इनाम घोषित किया था। उसने वसंत कुंज इलाके में शराब तस्कर से रंगदारी मांगी थी और मना करने पर गोली चलाई।
2012 में रखा था जरायम की दुनिया में कदम
बागपत। चांदीनगर थाना प्रभारी सत्येंद्र सिंह का कहना है कि कुख्यात अंकित की दिल्ली तिहाड़ जेल में मौत होने की जानकारी मिली है। उसके परिजन दिल्ली चले गए हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक उसने वर्ष 2012 में जरायम की दुनिया में कदम रखा था। सबसे पहले गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में उसके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसके खिलाफ बागपत, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, दिल्ली के विभिन्न थानों में 16 मुकदमें दर्ज हैं। इनमें हत्या के छह केस शामिल हैं। खैला गांव के पूर्व प्रधान राजे के पुत्र विनोद की 18 जुलाई 2019 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
सेल में मोबाइल मिलने के बाद
जेल कर्मियों से हुई थी मारपीट
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जेल अधिकारियों का दावा है कि अंकित की मौत कैदियों की आपसी मारपीट में हुई, जबकि जेल के सूत्र बता रहे हैं कि सेल में तलाशी अभियान के दौरान मोबाइल मिलने के बाद हुए विवाद में अंकित ने एक जेल कर्मी की पिटाई कर दी थी। इसके बाद हुई मारपीट में उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप भी यही है।
तिहाड़ जेल के सूत्रों का कहना है कि मंगलवार को अंकित की सेल में तलाशी अभियान चलाया गया था। जेल कर्मियों ने सेल व कैदियों की तलाशी ली थी। इसका अंकित व उसके साथियों ने विरोध किया था। बताया जा रहा है कि अंकित की सेल के बाहर से मोबाइल मिला था। तलाशी के दौरान सेल से चार्जर मिल गया। इस बात पर अंकित व जेलकर्मी के बीच विवाद बढ़ गया। अंकित ने जेल कर्मी की पिटाई कर दी थी। आरोप है कि बाद में जेल कर्मियों ने सेल बदलने के नाम पर अंकित के साथ मारपीट की थी। इस संबंध में जेल प्रशासन का कहना है कि सेल में बंद कैदियों के बीच किसी बात पर मारपीट हुई होगी। इसमें अंकित व दूसरे कैदियों को चोट लगी होगी। तिहाड़ प्रशासन जांच कर रहा है।
परिजनों ने जेल के बाहर
एकत्र होकर की नारेबाजी
अंकित गुर्जर के परिजन बुधवार सुबह ही तिहाड़ जेल पहुंच गए थे। परिजनों ने जेल के सामने एकत्रित होकर नारेबाजी भी की। परिजनों का आरोप जेल कर्मियों पर अंकित की पिटाई करने का है। उनका कहना है कि अंकित ने मोबाइल मिलने पर जेल अधिकारी के आचरण पर आपत्ति जताई थी। उसने इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से करने की बात कही थी। इससे गुस्साए जेल कर्मियों ने इस कदर पिटाई की कि उसकी मौत हो गई। उधर, जेल अधिकारियों के मुताबिक, अंकित की सुरक्षा को देखते हुए उसेे सेल में रखा गया था। उसके साथ घायल मिले दोनों सगे भाई दक्षिणपुरी के रहने वाले हैं। वे हत्या के मामले में जेल में बंद हैं।