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राजधानी में आज से और गहरा सकता है हवा पर प्रदूषण का संकट

Mon, 19 Oct 2020 12:45 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 19 Oct 2020 12:45 AM IST
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Pollution crisis on air can deepen in the capital from today
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के आसपास छाया स्मॉग। - फोटो : Ashram
राजधानी में आज से और गहरा सकता है हवा पर प्रदूषण का संकट
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- पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं बढ़ीं
- खराब हवा के साथ 254 दर्ज किया गया एक्यूआई
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजधानी वासियों को फिलहाल प्रदूषित हवा से राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं से सोमवार से हवा की सेहत और खराब हो सकती है। रविवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में शनिवार के मुकाबले 33 अंकों का सुधार आया, बावजूद इसके हवा खराब श्रेणी में दर्ज की गई। इसका प्रमुख कारण पराली जलने की अधिक घटनाएं बताई जा रही हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, रविवार शाम चार बजे तक एक्यूआई 254 रहा, जबकि शनिवार को यह 287 था।
पंजाब और हरियाणा में पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल पराली जलने की अधिक घटनाएं सामने आ रही हैं। इसकी प्रमुख वजह समय से पहले फसलों की कटाई होना और कोरोना के कारण मजदूरों की कमी को बताया जा रहा है। मौसम विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, रविवार को दिन में उत्तर-पश्चिम की ओर बहने वाली हवा अपने साथ पराली जलने से उत्पन्न होने वाले प्रदूषकों को ला रही हैं। रात में हवा की धीमी चाल और तापमान में गिरावट की वजह से प्रदूषण के कण इकट्ठा हो रहे हैं। यही वजह है कि इन दिनों राजधानी में हवा का स्तर खराब श्रेणी में चल रहा है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु मानक संस्था सफर के अनुसार, शनिवार तक हरियाणा, पंजाब और इसके आसपास के इलाकों में पराली जलने की 882 घटनाएं दर्ज की गईं। पराली जलने से जमा होने वाले पीएम 2.5 की मात्रा भी शनिवार को 19 फीसदी दर्ज की गई थी। मंत्रालय के वार्निंग सिस्टम के अनुसार, रविवार को राजधानी में प्रदूषण की मिक्सिंग गहराई और औसतन हवा की गति 12,500 घन मीटर प्रति सेकंड रही, जिससे प्रदूषक तत्वों को जमा होने में मदद मिली है।
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इस वर्ष पराली के कम जलाए जाने का अनुमान था, लेकिन अधिक मामले सामने आ रहे हैं। बिना बासमती वाली फसल किसानों के किसी के उपयोग में नहीं आती है। क्योंकि, इसकी पराली में अधिक मात्रा में सिलिका पाया जाता है। इस वजह से किसान जला देते हैं।
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- प्रशांत गार्गव, सदस्य, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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एक दिन में रिकॉर्ड 1230 खेतों में जली पराली
हरियाणा, पंजाब जैसे पड़ोसी राज्यों और सीमावर्ती इलाकों में एक दिन में पराली जलाने की घटनाएं रिकॉर्ड 1230 खेतों में दर्ज की गईं। इस वजह से दिल्ली में पीएम 2.5 का प्रदूषण स्तर 17 फीसदी तक बढ़ा। इसके अलावा हवा निकासी सूचकांक प्रति सेकंड 6,000 वर्ग किमी और हवा की औसत गति 10 किमी प्रति घंटे से कम रही। यह स्थिति प्रदूषक कणों के वातावरण में चारों ओर फैलने के प्रतिकूल मानी जाती है।
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