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Noida News: दिल्ली धमाके के बाद झुग्गियों में रहने वालों का होगा सत्यापन
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फॉलोअप
-एटीएस की छापेमारी के बाद स्थानीय पुलिस सक्रिय
-कंपनी और आसपास के क्षेत्रों में संदिग्धों की पहचान का अभियान शुरू करेगी पुलिस
माई सिटी रिपोर्टर। दिल्ली में हुए धमाके के बाद यूपी एटीएस द्वारा कासना स्थित एक कंपनी से टेरर फंडिंग मामले में फरहान नबी सिद्दीकी की गिरफ्तारी के बाद ग्रेटर नोएडा पुलिस भी अलर्ट है। स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पुलिस अब शहर में अवैध तरीके से बसाई गईं झुग्गी-झोपड़ियों, डेरे और अस्थायी आवासों में रहने वाले लोगों का व्यापक सत्यापन अभियान चलाएगी। इससे संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें चिन्हित किया जाएगा।
कासना स्थित जिस कंपनी से आरोपी गिरफ्तार हुआ था। वहां आरओ रिपेयरिंग और आयुर्वेद दवाओं की आड़ में भड़काऊ साहित्य का प्रकाशन होता था। इन किताबों को विदेश भेजकर धार्मिक समुदायों के बीच वैमनस्यता फैलाने की कोशिश की जा रही थी। एटीएस की जांच में सामने आया है कि आरोपी कंपनी में अपने रिश्तेदारों को भी काम पर रखता था और विदेशी नागरिकों के ठहरने के लिए दूसरे तल पर गेस्ट हाउस बना रखा था, जहां तुर्की, जर्मनी और बांग्लादेश के लोग ठहरते थे। एटीएस टीम कंपनी से प्राप्त दस्तावेज, संदिग्ध किताबों, सीसीटीवी फुटेज और कर्मचारियों से मिली जानकारी की जांच कर रही है।
पुलिस कंपनी परिसर में खड़ी कारों और बाहर आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियों पर भी निगरानी रखी जा रही है। एटीएस ने हालांकि अभी तक स्थानीय पुलिस के साथ कोई आधिकारिक सूचना साझा नहीं की है, लेकिन पुलिस अपने स्तर पर सतर्कता बरतते हुए हर उस स्थान पर सत्यापन अभियान शुरू करने जा रही है जहां बाहरी और बिना पहचान वाले लोग रहते हैं।
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पुलिस अधिकारियों के अनुसार, झुग्गी-झोपड़ियों में बिना दस्तावेज रहने वाले लोग अक्सर पहचान से दूर रहते हैं। ऐसे स्थान अपराधियों और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों के छिपने की सुरक्षित पनाहगाह बन सकते हैं। कोतवाली प्रभारी धर्मेद्र शुक्ल का कहना है कि सत्यापन अभियान शुरू किया जाएगा।
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-एटीएस की छापेमारी के बाद स्थानीय पुलिस सक्रिय
-कंपनी और आसपास के क्षेत्रों में संदिग्धों की पहचान का अभियान शुरू करेगी पुलिस
माई सिटी रिपोर्टर। दिल्ली में हुए धमाके के बाद यूपी एटीएस द्वारा कासना स्थित एक कंपनी से टेरर फंडिंग मामले में फरहान नबी सिद्दीकी की गिरफ्तारी के बाद ग्रेटर नोएडा पुलिस भी अलर्ट है। स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पुलिस अब शहर में अवैध तरीके से बसाई गईं झुग्गी-झोपड़ियों, डेरे और अस्थायी आवासों में रहने वाले लोगों का व्यापक सत्यापन अभियान चलाएगी। इससे संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें चिन्हित किया जाएगा।
कासना स्थित जिस कंपनी से आरोपी गिरफ्तार हुआ था। वहां आरओ रिपेयरिंग और आयुर्वेद दवाओं की आड़ में भड़काऊ साहित्य का प्रकाशन होता था। इन किताबों को विदेश भेजकर धार्मिक समुदायों के बीच वैमनस्यता फैलाने की कोशिश की जा रही थी। एटीएस की जांच में सामने आया है कि आरोपी कंपनी में अपने रिश्तेदारों को भी काम पर रखता था और विदेशी नागरिकों के ठहरने के लिए दूसरे तल पर गेस्ट हाउस बना रखा था, जहां तुर्की, जर्मनी और बांग्लादेश के लोग ठहरते थे। एटीएस टीम कंपनी से प्राप्त दस्तावेज, संदिग्ध किताबों, सीसीटीवी फुटेज और कर्मचारियों से मिली जानकारी की जांच कर रही है।
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पुलिस कंपनी परिसर में खड़ी कारों और बाहर आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियों पर भी निगरानी रखी जा रही है। एटीएस ने हालांकि अभी तक स्थानीय पुलिस के साथ कोई आधिकारिक सूचना साझा नहीं की है, लेकिन पुलिस अपने स्तर पर सतर्कता बरतते हुए हर उस स्थान पर सत्यापन अभियान शुरू करने जा रही है जहां बाहरी और बिना पहचान वाले लोग रहते हैं।
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पुलिस अधिकारियों के अनुसार, झुग्गी-झोपड़ियों में बिना दस्तावेज रहने वाले लोग अक्सर पहचान से दूर रहते हैं। ऐसे स्थान अपराधियों और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों के छिपने की सुरक्षित पनाहगाह बन सकते हैं। कोतवाली प्रभारी धर्मेद्र शुक्ल का कहना है कि सत्यापन अभियान शुरू किया जाएगा।