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Noida News: पुलिस का दावा डूबने से हुई थी यशस्वी की मौत, रिपोर्ट के लिए तीन दिन भटकी छात्र की मां
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फोटो-- -
-पुलिस की थ्यौरी से संतुष्ट नहीं है मां, अब यशस्वी को न्याय दिलाने के लिए लड़ेंगी लड़ाई
- दनकौर क्षेत्र से 12 अक्तूबर को हुआ था लापता, 15 को नाले में मिला था शव
- हत्या की रिपोर्ट दर्ज करने के बाद क्राइम ब्रांच ने जांच की पूरी, पीड़िता बिहार लौटी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा/दनकौर। एक विश्वविद्यालय के बीएसएसी के छात्र यशस्वी राज की मौत नौ माह पहले नाले में गिरकर डूबने से हुई थी। यह बात अपराध शाखा की जांच के बाद रिपोर्ट में आई है। जबकि बेटे यशस्वी राज की मौत से पर्दा उठाने और न्याय के लिए संघर्ष कर रही मां अरुणा सिन्हा को जांच रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए तीन दिन भटकना पड़ा। पीड़िता सेक्टर-108 स्थित पुलिस कमिश्नर, नॉलेज पार्क डीसीपी और सूरजपुर पुलिस दफ़्तर पहुंचकर अधिकारियों से मिलीं, लेकिन उन्हें रिपोर्ट नहीं मिल पाई।
पीड़िता बिहार (पटना) से बेटे की मौत के मामले में प्रगति जानने के लिए आई थी और तीन दिन भटकने के बाद मंगलवार को वापस लौट गईं। हालांकि वह पुलिस की थ्यौरी से संतुष्ट नहीं हैं और बेटे को न्याय दिलाने के लिए आगे लड़ाई लड़ेंगी।
दनकौर कोतवाली क्षेत्र स्थित एक निजी विश्वविद्यालय का छात्र बिहार निवासी यशस्वी राज पिछले वर्ष 12 अक्तूबर को अचानक लापता हो गया था। 13 अक्तूबर को परिजन ने बिहार से आकर कोतवाली में अनहोनी की आशंका जताई थी। इसके बाद 15 अक्तूबर को विश्वविद्यालय से करीब 500 मीटर की दूरी पर एक नाले में छात्र का शव पड़ा मिला था। छात्र के मामा आशुतोष ने विश्वविद्यालय में ही पढ़ाई कर रहे छह छात्रों को नामजद करते हुए पुलिस से शिकायत की थी। पुलिस ने आरोपी छात्रों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी। हालांकि पुलिस ने शुरू से ही यशस्वी की हत्या को हादसा बता रही है। परिजन का आरोप था कि पुलिस ने आरोपी छात्रों को हिरासत में भी लिया था, लेकिन पूछताछ करने के बाद छोड़ दिया था। इस मामले में एक भी आरोपी की गिरफ्तारी पुलिस ने नहीं की है। परिजन ने गिरफ्तारी नहीं होने पर जल्द ही धरना प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। इसके बाद अप्रैल में पुलिस कमिश्नर ने मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी थी। पीड़ित मां को एक आस जगी थी कि अपराध शाखा की जांच से उनको न्याय मिलेगा। मगर अब जांच पूरी होने की सूचना पर अनुराधा पटना से गौतमबुद्धनगर आईं। सबसे पहले वह पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचीं। उसके बाद नॉलेज पार्क स्थित डीसीपी दफ्तर पर एडीसीपी अशोक कुमार से और सूरजपुर पुलिस ऑफिस में एसीपी क्राइम श्यामजीत से मुलाकात की। मगर किसी ने रिपोर्ट देना तो दूर उसमें क्या है, यह भी जानकारी नहीं दी। अनुराधा का कहना है कि जांच अधिकारियों ने उनके फोन तक रिसीव नहीं किए हैं।
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क्राइम ब्रांच के दो निरीक्षकों ने इस केस की जांच की। जांच में छात्र की मौत डूबने से होने की पुष्टि हुई है। जिन छात्रों को नामजद किया गया था। सीसीटीवी में उनकी लोकेशन कहीं और मिली है। रिपोर्ट पुलिस कमिश्नर ऑफिस भेज दी गई है। इसकी प्रति भी वहीं से मिल सकती है। इसके चलते छात्र की मां को प्रति नहीं दी गई।
श्यामजीत, एसीपी-2 क्राइम
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मेरे बेटे की हत्या हुई है और आरोपियों को पुलिस ने शुरू से बचाने का काम किया है। शुरुआत में जो थ्योरी बताई थी, क्राइम ब्रांच ने भी उसी के आधार पर रिपोर्ट तैयार की है। उनसे बयान तक नहीं लिए गए हैं और जो बिंदु बताए गए थे उन पर पुलिस ने जांच करने की जहमत नहीं उठाई। अब वह न्याय के लिए लड़ाई लडेंगी और पुलिस की जांच को चुनौती देंगी।
अरुणा सिन्हा, पीड़ित मां।
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-पुलिस की थ्यौरी से संतुष्ट नहीं है मां, अब यशस्वी को न्याय दिलाने के लिए लड़ेंगी लड़ाई
- दनकौर क्षेत्र से 12 अक्तूबर को हुआ था लापता, 15 को नाले में मिला था शव
- हत्या की रिपोर्ट दर्ज करने के बाद क्राइम ब्रांच ने जांच की पूरी, पीड़िता बिहार लौटी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा/दनकौर। एक विश्वविद्यालय के बीएसएसी के छात्र यशस्वी राज की मौत नौ माह पहले नाले में गिरकर डूबने से हुई थी। यह बात अपराध शाखा की जांच के बाद रिपोर्ट में आई है। जबकि बेटे यशस्वी राज की मौत से पर्दा उठाने और न्याय के लिए संघर्ष कर रही मां अरुणा सिन्हा को जांच रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए तीन दिन भटकना पड़ा। पीड़िता सेक्टर-108 स्थित पुलिस कमिश्नर, नॉलेज पार्क डीसीपी और सूरजपुर पुलिस दफ़्तर पहुंचकर अधिकारियों से मिलीं, लेकिन उन्हें रिपोर्ट नहीं मिल पाई।
पीड़िता बिहार (पटना) से बेटे की मौत के मामले में प्रगति जानने के लिए आई थी और तीन दिन भटकने के बाद मंगलवार को वापस लौट गईं। हालांकि वह पुलिस की थ्यौरी से संतुष्ट नहीं हैं और बेटे को न्याय दिलाने के लिए आगे लड़ाई लड़ेंगी।
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दनकौर कोतवाली क्षेत्र स्थित एक निजी विश्वविद्यालय का छात्र बिहार निवासी यशस्वी राज पिछले वर्ष 12 अक्तूबर को अचानक लापता हो गया था। 13 अक्तूबर को परिजन ने बिहार से आकर कोतवाली में अनहोनी की आशंका जताई थी। इसके बाद 15 अक्तूबर को विश्वविद्यालय से करीब 500 मीटर की दूरी पर एक नाले में छात्र का शव पड़ा मिला था। छात्र के मामा आशुतोष ने विश्वविद्यालय में ही पढ़ाई कर रहे छह छात्रों को नामजद करते हुए पुलिस से शिकायत की थी। पुलिस ने आरोपी छात्रों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी। हालांकि पुलिस ने शुरू से ही यशस्वी की हत्या को हादसा बता रही है। परिजन का आरोप था कि पुलिस ने आरोपी छात्रों को हिरासत में भी लिया था, लेकिन पूछताछ करने के बाद छोड़ दिया था। इस मामले में एक भी आरोपी की गिरफ्तारी पुलिस ने नहीं की है। परिजन ने गिरफ्तारी नहीं होने पर जल्द ही धरना प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। इसके बाद अप्रैल में पुलिस कमिश्नर ने मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी थी। पीड़ित मां को एक आस जगी थी कि अपराध शाखा की जांच से उनको न्याय मिलेगा। मगर अब जांच पूरी होने की सूचना पर अनुराधा पटना से गौतमबुद्धनगर आईं। सबसे पहले वह पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचीं। उसके बाद नॉलेज पार्क स्थित डीसीपी दफ्तर पर एडीसीपी अशोक कुमार से और सूरजपुर पुलिस ऑफिस में एसीपी क्राइम श्यामजीत से मुलाकात की। मगर किसी ने रिपोर्ट देना तो दूर उसमें क्या है, यह भी जानकारी नहीं दी। अनुराधा का कहना है कि जांच अधिकारियों ने उनके फोन तक रिसीव नहीं किए हैं।
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क्राइम ब्रांच के दो निरीक्षकों ने इस केस की जांच की। जांच में छात्र की मौत डूबने से होने की पुष्टि हुई है। जिन छात्रों को नामजद किया गया था। सीसीटीवी में उनकी लोकेशन कहीं और मिली है। रिपोर्ट पुलिस कमिश्नर ऑफिस भेज दी गई है। इसकी प्रति भी वहीं से मिल सकती है। इसके चलते छात्र की मां को प्रति नहीं दी गई।
श्यामजीत, एसीपी-2 क्राइम
मेरे बेटे की हत्या हुई है और आरोपियों को पुलिस ने शुरू से बचाने का काम किया है। शुरुआत में जो थ्योरी बताई थी, क्राइम ब्रांच ने भी उसी के आधार पर रिपोर्ट तैयार की है। उनसे बयान तक नहीं लिए गए हैं और जो बिंदु बताए गए थे उन पर पुलिस ने जांच करने की जहमत नहीं उठाई। अब वह न्याय के लिए लड़ाई लडेंगी और पुलिस की जांच को चुनौती देंगी।
अरुणा सिन्हा, पीड़ित मां।