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Noida News: टेरर फंडिंग मामले में पुलिस और एलआईयू ने खंगाले दस्तावेज
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फोटो
-घटना के बाद से काम पर नहीं आ रहे कंपनी के कर्मचारी
-पुलिस ने कर्मचारियों, व्यापारियों और आने-जाने और ठहरने वाले लोगों की डिटेल खंगाली
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। औद्योगिक सेक्टर साइट-5 कंपनी में टेरर फंडिंग के मामले में कासना पुलिस के अलावा लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (एलआईयू) ने कंपनी पहुंचकर जरूरी दस्तावेज खंगाले है। पुलिस और एलआईयू की ओर से कंपनी में कार्यरत कर्मचारियों, व्यापारियों और आने-जाने और ठहरने वाले लोगों की जानकारी ली। हालांकि पुलिस की ओर से अबतक कंपनी परिसर में सील नहीं लगाई गई है। माना जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही कंपनी परिसर में सील लगाई जाएगी।
दरअसल टेरर फंडिंग से जुड़ा मामला सामने आने के बाद कर्मचारी भी काम पर नहीं आ रहे हैं। सोमवार को कंपनी में एक महिला कर्मचारी ही मौजूद रही। उसने पूछने पर बताया कि उसका काम कंपनी में साफ-सफाई का है। कंपनी में क्या कार्रवाई हो रही है उसे नहीं मालूम। जानकारी के मुताबिक, प्रिंटिंग प्रेस कंपनी में रोजाना 10 कर्मचारी काम के लिए आते। फरहान के साथ कर्मचारी भी आसपास के लोगों से ज्यादा संपर्क नहीं रखते थे।
वहीं सूत्र बताते हैं कि प्रिंटिंग प्रेस के गेट के बाहर तैनात गार्ड एक-दो माह में बदल दिया जाता था। स्थानीय पुलिस अपने स्तर से जांच में जुटी है। हालांकि अभी तक एटीएस के किसी अधिकारी या कर्मचारी ने स्थानीय पुलिस से संपर्क नहीं किया है। पुलिस यह जांच कर रही है कि अंग्रेजी व उर्दू के अलावा अन्य भाषाओं में तो किताबों का प्रकाशन नहीं हो रहा था।
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पुलिस ने कंपनी में छपने वाली सामग्री, आवश्यक दस्तावेज, कंपनी कर्मचारियों का वेतन, बैंक बैलेंस शीट आदि की जानकारी की है। कंपनी परिसर में लगे सीसीटीवी के जरिये भी यह देखा गया है कि पिछले एक माह में कंपनी में किस-किस व्यक्ति, वाहन, कर्मचारियों और बाहरी लोगों ने प्रवेश किया है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी ने मस्जिद या मदरसे के लिए तो जमीन नहीं खरीदी थी। पुलिस की ओर से क्षेत्र में एहतियातन सतर्कता बरती जा रही है। पुलिस की ओर से जल्द ही साइट-5 में स्थित कंपनियों से उनके काम का ब्योरा लिया जाएगा।
आरोपी प्रिंटिंग प्रेस व आरओ रिपेयर के नाम पर भड़काऊ सामग्री प्रकाशित कर रहा था। किसी को इसका शक नहीं इसके लिए प्रवेश द्वार के पास गेट पर एक बोर्ड लगा है। यह बोर्ड पूरी तरह से झाड़ियों से ढका है। इसमें लिखा है कि यहां आरओ सर्विस किए जाते हैं।
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क्या है मामलाः
यूपी एटीएस ने धार्मिक समुदायों के बीच वैमनस्यता फैलाने के लिए विदेश से 11 करोड़ रुपये की फंडिंग जुटाने और बांग्लादेशी घुसपैठियों को पनाह देने के आरोप में दिल्ली निवासी फरहान नबी सिद्दीकी को कासना से गिरफ्तार किया था। आरोपी की कंपनी में भड़काऊ सामग्री वाली किताबों का प्रकाशन होता था। आरोपी फरहान फंडिंग जुटाने वाली कंपनी इस्तानबुल इंटरनेशनल कंपनी का सह निदेशक है। आरोप है कि इस रकम से यूपी के अमरोहा और पंजाब में मस्जिद और मदरसे बनाने के लिए जमीनों को खरीदा गया था। फरहान अपने साथी नासी तोर्बा के साथ मिलकर कई कंपनियों का संचालन करता है। उसकी कंपनी में तुर्की और जर्मनी से तमाम लोग आते थे जिसकी सूचना पुलिस को नहीं दी जाती थी।
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-घटना के बाद से काम पर नहीं आ रहे कंपनी के कर्मचारी
-पुलिस ने कर्मचारियों, व्यापारियों और आने-जाने और ठहरने वाले लोगों की डिटेल खंगाली
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। औद्योगिक सेक्टर साइट-5 कंपनी में टेरर फंडिंग के मामले में कासना पुलिस के अलावा लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (एलआईयू) ने कंपनी पहुंचकर जरूरी दस्तावेज खंगाले है। पुलिस और एलआईयू की ओर से कंपनी में कार्यरत कर्मचारियों, व्यापारियों और आने-जाने और ठहरने वाले लोगों की जानकारी ली। हालांकि पुलिस की ओर से अबतक कंपनी परिसर में सील नहीं लगाई गई है। माना जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही कंपनी परिसर में सील लगाई जाएगी।
दरअसल टेरर फंडिंग से जुड़ा मामला सामने आने के बाद कर्मचारी भी काम पर नहीं आ रहे हैं। सोमवार को कंपनी में एक महिला कर्मचारी ही मौजूद रही। उसने पूछने पर बताया कि उसका काम कंपनी में साफ-सफाई का है। कंपनी में क्या कार्रवाई हो रही है उसे नहीं मालूम। जानकारी के मुताबिक, प्रिंटिंग प्रेस कंपनी में रोजाना 10 कर्मचारी काम के लिए आते। फरहान के साथ कर्मचारी भी आसपास के लोगों से ज्यादा संपर्क नहीं रखते थे।
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वहीं सूत्र बताते हैं कि प्रिंटिंग प्रेस के गेट के बाहर तैनात गार्ड एक-दो माह में बदल दिया जाता था। स्थानीय पुलिस अपने स्तर से जांच में जुटी है। हालांकि अभी तक एटीएस के किसी अधिकारी या कर्मचारी ने स्थानीय पुलिस से संपर्क नहीं किया है। पुलिस यह जांच कर रही है कि अंग्रेजी व उर्दू के अलावा अन्य भाषाओं में तो किताबों का प्रकाशन नहीं हो रहा था।
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पुलिस ने कंपनी में छपने वाली सामग्री, आवश्यक दस्तावेज, कंपनी कर्मचारियों का वेतन, बैंक बैलेंस शीट आदि की जानकारी की है। कंपनी परिसर में लगे सीसीटीवी के जरिये भी यह देखा गया है कि पिछले एक माह में कंपनी में किस-किस व्यक्ति, वाहन, कर्मचारियों और बाहरी लोगों ने प्रवेश किया है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी ने मस्जिद या मदरसे के लिए तो जमीन नहीं खरीदी थी। पुलिस की ओर से क्षेत्र में एहतियातन सतर्कता बरती जा रही है। पुलिस की ओर से जल्द ही साइट-5 में स्थित कंपनियों से उनके काम का ब्योरा लिया जाएगा।
आरोपी प्रिंटिंग प्रेस व आरओ रिपेयर के नाम पर भड़काऊ सामग्री प्रकाशित कर रहा था। किसी को इसका शक नहीं इसके लिए प्रवेश द्वार के पास गेट पर एक बोर्ड लगा है। यह बोर्ड पूरी तरह से झाड़ियों से ढका है। इसमें लिखा है कि यहां आरओ सर्विस किए जाते हैं।
क्या है मामलाः
यूपी एटीएस ने धार्मिक समुदायों के बीच वैमनस्यता फैलाने के लिए विदेश से 11 करोड़ रुपये की फंडिंग जुटाने और बांग्लादेशी घुसपैठियों को पनाह देने के आरोप में दिल्ली निवासी फरहान नबी सिद्दीकी को कासना से गिरफ्तार किया था। आरोपी की कंपनी में भड़काऊ सामग्री वाली किताबों का प्रकाशन होता था। आरोपी फरहान फंडिंग जुटाने वाली कंपनी इस्तानबुल इंटरनेशनल कंपनी का सह निदेशक है। आरोप है कि इस रकम से यूपी के अमरोहा और पंजाब में मस्जिद और मदरसे बनाने के लिए जमीनों को खरीदा गया था। फरहान अपने साथी नासी तोर्बा के साथ मिलकर कई कंपनियों का संचालन करता है। उसकी कंपनी में तुर्की और जर्मनी से तमाम लोग आते थे जिसकी सूचना पुलिस को नहीं दी जाती थी।