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नोएडा इंजीनियर मौत: नहीं टूटती बुढ़ापे की लाठी अगर 16 दिन पहले हुए हादसे से लिया होता सबक, वीडियो आया सामने

Mon, 19 Jan 2026 09:18 PM IST
विकास कुमार माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा
माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा Published by: विकास कुमार Updated Mon, 19 Jan 2026 09:18 PM IST
सार

टाटा यूरेका पार्क निवासी सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी कैप्टन जेके सिंह बताया कि अगर ट्रक हादसे की घटना के बाद सबक लिया होता तो शायद सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जान बच सकती थी। 

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place where engineers car fell into ditch same spot a truck crashed into boundary wall on December 31
ग्रेटर नोएड़ा सेक्टर 150 में इंजीनियर की मौत मामला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ग्रेटर नोएडा सेक्टर-150 के पास जिस जगह पर सॉफ्टवेयर इंजीनियर हादसे का शिकार हुआ है। वहां पर 31 दिसंबर की रात को भी एक ट्रक हादसे का शिकार हुआ था। उस दौरान ट्रक बाउंड्री वॉल को तोड़ते हुए नाले के आधे हिस्से पर जाकर लटक गया था। हादसे में ट्रक चालक की जान बाल-बाल बची थी। क्रेन की मदद से अगले दिन ट्रक को किसी तरह बाहर निकाला गया था। घटना के बाद नाले की बाउंड्री वॉल भी क्षतिग्रस्त हो गई थी। इस हादसे के बाद भी प्राधिकरण ने कोई सबक नहीं लिया। अगर सबक लिया गया होता तो एक बुजुर्ग पिता को अपने बुढ़ापे की लाठी नहीं खोनी पड़ती।

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हादसे के बाद जागा प्राधिकरण
टाटा यूरेका पार्क निवासी सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी कैप्टन जेके सिंह बताया कि अगर ट्रक हादसे की घटना के बाद सबक लिया होता तो शायद सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जान बच सकती थी। हादसे के बाद शनिवार को प्राधिकरण की ओर से बेसमेंट से पहले मिट्टी और मलबे का ढेर डाला गया है। जिससे यहां पर हादसे को रोका जा सके। 

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न रोशनी, न रिफ्लेक्टर और साइन बोर्ड
इस दौरान निवासियों ने प्राधिकरण और पुलिस के खिलाफ रोष जताते हुए नारेबाजी की। किसी तरह उन्हें शांत कराकर घर भेजा गया। जिस जगह पर हादसा हुआ है। वहां पर मोड़ पर बेसमेंट से पहले रिफ्लेक्टर और साइन बोर्ड नहीं लगा है। सिर्फ एक नीले रंग का सेक्टर-150 का बोर्ड लगा है। इसके अलावा मोड़ से पहले एक स्पीड ब्रेकर बना है। मगर ब्रेकर की सफेद पट्टी मिट चुकी है। स्ट्रीट लाइट की रोशनी भी कम ही रहती है। मोड़ से करीब 50 फीट की दूरी पर बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर, साइन बोर्ड, प्रकाश की कमी, स्पीड ब्रेकर की सफेद पट्टी मिट जाने के कारण कोहरे और रात के समय लोग हादसे का शिकार होते हैं। 

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बच सकती थी इंजीनियर की जान
जिस बेसमेंट में हादसा हुआ है। उस बेसमेंट की खोदाई के बाद काम रुकने पर बाउंडी वॉल की टीन शेड से बैरिकेडिंग नहीं की गई है। यहां आस-पास की सोसाइटियों से निकलने वाले पानी इस खाली प्लॉट में छोड़ा जाता है। खॉली प्लॉट वाले बेसमेंट में झाड़ियां भी उग आई है। साथ ही क्षतिग्रस्त सीवर लाइन होने के कारण इसका पानी ओवर फ्लो होकर प्लॉट में भरता है। निवासियों का कहना है कि अगर टीन शेड के साथ बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर, उचित प्रकाश और स्पीड ब्रेकर की पट्टी होती तो सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जान बच सकती थी।

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