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Noida News: जिम्स में मरीजों को नहीं मिल रहीं दवाइयां
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जिम्स में मरीजों को नहीं मिल रहीं दवाइयां
बाजार से दवाइयां लेने को मजबूर मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। सस्ते इलाज की उम्मीद में मरीज कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान में आते हैं, लेकिन उनको सरकारी दवाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। मरीजों को बाजार से दवाई खरीदने के लिए अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है। जिम्स में प्रतिदिन 1200 से 1400 मरीज इलाज के लिए आ रहे है। मरीजों का कहना है कि सस्ते इलाज की उम्मीद में आते हैं लेकिन यहां पर सरकारी दवाइयों का लाभ नहीं मिल रहा है। सस्ती दवाएं तो यहां दी जा रही हैं, लेकिन महंगी दवाइयां बाजार से खरीदने के लिए डॉक्टर पर्ची लिख दे रहे हैं।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के सरकारी योजना के तहत अस्पताल में दवाईयां आती हैं। कोविड से पहले एनएचएम से सरकारी दवाइयों की मांग करने पर अस्पताल में दवाई आ रही थी। कोविड के करीब दो साल बाद जिम्स को सरकारी दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं। कई बार पत्राचार भी किया गया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कुछ दवाइयां डरबो प्रोटीन, इम्युनोग्लोबुलिन, इमिपेनेम आदि इंजेक्शन व टेबलेट जिनकी बाजार की कीमत एक हजार से दस हजार है, 40 से 70 फीसदी कम मूल्य में मरीजों को उपलब्ध करा रहा है। एनएचएम की ओर से सीएचसी व पीएचसी छोटे अस्पतालों में सरकारी दवाइयां भेजी जा रही हैं।
अस्पताल की ओर से पत्राचार के माध्यम से एनएचएम से दवाइयों की मांग की जाती है। एनएचएम की ओर से कुछ दवाइयां ही जिम्स को मुहैया कराई जा रही हैं। - डॉ. आशीष खंडूडी, फार्मासिस्ट जिम्स
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जिम्स में मरीजों को सरकारी दवाइयों का लाभ मिल सके, इसके लिए अस्पताल प्रबंधन प्रयासरत है। सरकारी दवाइयों की मांग के लिए सीएमओ को पत्राचार के माध्यम से अवगत कराया गया है। - डॉ. ब्रिगेडियर आरके गुप्ता, निदेशक जिम्स
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बाजार से दवाइयां लेने को मजबूर मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। सस्ते इलाज की उम्मीद में मरीज कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान में आते हैं, लेकिन उनको सरकारी दवाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। मरीजों को बाजार से दवाई खरीदने के लिए अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है। जिम्स में प्रतिदिन 1200 से 1400 मरीज इलाज के लिए आ रहे है। मरीजों का कहना है कि सस्ते इलाज की उम्मीद में आते हैं लेकिन यहां पर सरकारी दवाइयों का लाभ नहीं मिल रहा है। सस्ती दवाएं तो यहां दी जा रही हैं, लेकिन महंगी दवाइयां बाजार से खरीदने के लिए डॉक्टर पर्ची लिख दे रहे हैं।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के सरकारी योजना के तहत अस्पताल में दवाईयां आती हैं। कोविड से पहले एनएचएम से सरकारी दवाइयों की मांग करने पर अस्पताल में दवाई आ रही थी। कोविड के करीब दो साल बाद जिम्स को सरकारी दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं। कई बार पत्राचार भी किया गया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कुछ दवाइयां डरबो प्रोटीन, इम्युनोग्लोबुलिन, इमिपेनेम आदि इंजेक्शन व टेबलेट जिनकी बाजार की कीमत एक हजार से दस हजार है, 40 से 70 फीसदी कम मूल्य में मरीजों को उपलब्ध करा रहा है। एनएचएम की ओर से सीएचसी व पीएचसी छोटे अस्पतालों में सरकारी दवाइयां भेजी जा रही हैं।
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अस्पताल की ओर से पत्राचार के माध्यम से एनएचएम से दवाइयों की मांग की जाती है। एनएचएम की ओर से कुछ दवाइयां ही जिम्स को मुहैया कराई जा रही हैं। - डॉ. आशीष खंडूडी, फार्मासिस्ट जिम्स
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जिम्स में मरीजों को सरकारी दवाइयों का लाभ मिल सके, इसके लिए अस्पताल प्रबंधन प्रयासरत है। सरकारी दवाइयों की मांग के लिए सीएमओ को पत्राचार के माध्यम से अवगत कराया गया है। - डॉ. ब्रिगेडियर आरके गुप्ता, निदेशक जिम्स