{"_id":"5f13222a8ebc3e9fa9256497","slug":"passports-given-to-57-jamatis-mewat-news-noi524196511","type":"story","status":"publish","title_hn":"अदालत के आदेश पर 57 जमातियों को पासपोर्ट लौटाए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अदालत के आदेश पर 57 जमातियों को पासपोर्ट लौटाए
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पुन्हाना। अदालत के आदेश पर जिला प्रशासन ने नूंह पल्ला हॉस्टल में पिछले कुछ महीने से रह रहे सभी 57 विदेशी जमातियों को उनके पासपोर्ट लौटा दिए। पुलिस ने नूंह मदरसा संचालक मुफ्ती जाहिद हुसैन और नूंह विधायक आफताब अहमद की मौजूदगी में सभी जमातियों को पासपोर्ट दिए। इससे सभी विदेशी जमातियों के चेहरे खिल उठे। मेवात पुलिस ने सभी 57 जमातियों के खिलाफ महामारी नियम और विदेशी नियमों का उल्लंघन करने की धाराओं के तहत दो अप्रैल 20 को मामला दर्ज कर सभी के पासपोर्ट जप्त कर लिए थे।
पुलिस ने विदेशी जातियों को दोषी मानते हुए सभी धाराओं के तहत अदालत में चालान पेश किया था। नूंह अदालत ने 23 मई को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी 6 देशों के 57 विदेशी जमातियों और एक भारतीय अनुवादक पर धारा 188 के तहत सरकारी आदेशों की अवहेलना करने का दोषी ठहराते हुए सभी पर एक एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया तथा फॉरेनर्स एक्ट के तहत लगाई गई सभी धाराओं को बेबुनियाद मानते हुए इंडोनेशिया, श्रीलंका, साउथ अफ्रीका, बंगला देश, थाईलैंड, नेपाल के कुल 57 जामतियों व एक भारतीय अनुवादक को आरोपों से बरी कर दिया था।
सेशन कोर्ट ने 6 जुलाई को सरकार की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था। बांग्लादेश के रहने वाले हबीबुर्रहमान कहते हैं कि उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे दूसरी जिंदगी मिली हो। श्रीलंका के रमीज कहते हैं कि उनका पासपोर्ट दिलाने में और उन्हें उनके वतन पहुंचाने में जो लोग कोशिश कर रहे हैं उनका अजर अल्लाह ही दे सकता है। नूंह विधायक आफताब अहमद ने कहा कि अदालत का फैसला नहीं बदला जिसकी वजह से आज सबको पासपोर्ट वापस दिए गए हैं। उन्होंने बताया जल्द ही दूतावासों से बात कर जमातियों को देश वापिस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
पुलिस ने विदेशी जातियों को दोषी मानते हुए सभी धाराओं के तहत अदालत में चालान पेश किया था। नूंह अदालत ने 23 मई को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी 6 देशों के 57 विदेशी जमातियों और एक भारतीय अनुवादक पर धारा 188 के तहत सरकारी आदेशों की अवहेलना करने का दोषी ठहराते हुए सभी पर एक एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया तथा फॉरेनर्स एक्ट के तहत लगाई गई सभी धाराओं को बेबुनियाद मानते हुए इंडोनेशिया, श्रीलंका, साउथ अफ्रीका, बंगला देश, थाईलैंड, नेपाल के कुल 57 जामतियों व एक भारतीय अनुवादक को आरोपों से बरी कर दिया था।
विज्ञापन
सेशन कोर्ट ने 6 जुलाई को सरकार की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था। बांग्लादेश के रहने वाले हबीबुर्रहमान कहते हैं कि उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे दूसरी जिंदगी मिली हो। श्रीलंका के रमीज कहते हैं कि उनका पासपोर्ट दिलाने में और उन्हें उनके वतन पहुंचाने में जो लोग कोशिश कर रहे हैं उनका अजर अल्लाह ही दे सकता है। नूंह विधायक आफताब अहमद ने कहा कि अदालत का फैसला नहीं बदला जिसकी वजह से आज सबको पासपोर्ट वापस दिए गए हैं। उन्होंने बताया जल्द ही दूतावासों से बात कर जमातियों को देश वापिस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
विज्ञापन