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स्लीपर बसों में यात्री सुरक्षा भगवान भरोसे: यमुना एक्सप्रेसवे हादसे के 23 दिन बाद भी नियमों की अनदेखी जारी
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-फोटो
छत पर सामान लादकर दौड़ रहीं बसें, कहीं आपातकालीन द्वार नहीं तो कहीं ब्रेक ग्लास हैमर गायब
चिल्ला बॉर्डर पर निरीक्षण में खुली पोल
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की जिंदा जलकर मौत होने के बाद भी स्लीपर बसों में यात्री सुरक्षा को लेकर लापरवाही जारी है। परिवहन विभाग की ओर से समय-समय पर चेकिंग अभियान चलाकर बसें सीज तो की जा रही हैं। लेकिन इसके बावजूद नियमों की अनदेखी कर बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं। चिल्ला बॉर्डर से गुजरने वाली बसों की छत पर सामान लदा मिला तो बिहार में पंजीकृत कुछ बसों में आपातकालीन द्वार ही नहीं था। कई बसों में आपात स्थिति में शीशा तोड़कर बाहर निकलने के लिए हैमर भी नहीं मिला। ऐसे में हादसा होने पर यात्रियों की जान बचाना चुनौती बन सकता है।
हादसे के ठीक 23 दिन बाद भी बसों में कोई बदलाव नहीं दिखा। अब भी मौत बनकर स्लीपर बसें दौड़ रही हैं। बस संचालकों पर न तो परिवहन विभाग की कार्रवाई का असर दिखा और न ही बस हादसे का। हादसे के बाद भी बसों में किसी तरह का बदलाव नहीं मिला। ट्रक की तर्ज पर स्लीपर बसों में सामान लादकर ले जाया जा रहा है। इसके कारण बस का संतुलन तक बिगड़ा। बिना परमिट, फिटनेस इत्यादि के चालान के साथ भी यह बसें सड़क पर दौड़ रही हैं।
बसों की जांच नियमित की जा रही है। यात्री सुरक्षा से खिलवाड़ मिलने में सीज भी किया जा रहा है। एक्सप्रेसवे पर रुककर यात्री बैठाने पर भी रोक लगा दी गई है।
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-डॉ. उदित नारायण पांडेय, एआरटीओ प्रवर्तन।
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छत पर सामान लादकर दौड़ रहीं बसें, कहीं आपातकालीन द्वार नहीं तो कहीं ब्रेक ग्लास हैमर गायब
चिल्ला बॉर्डर पर निरीक्षण में खुली पोल
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की जिंदा जलकर मौत होने के बाद भी स्लीपर बसों में यात्री सुरक्षा को लेकर लापरवाही जारी है। परिवहन विभाग की ओर से समय-समय पर चेकिंग अभियान चलाकर बसें सीज तो की जा रही हैं। लेकिन इसके बावजूद नियमों की अनदेखी कर बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं। चिल्ला बॉर्डर से गुजरने वाली बसों की छत पर सामान लदा मिला तो बिहार में पंजीकृत कुछ बसों में आपातकालीन द्वार ही नहीं था। कई बसों में आपात स्थिति में शीशा तोड़कर बाहर निकलने के लिए हैमर भी नहीं मिला। ऐसे में हादसा होने पर यात्रियों की जान बचाना चुनौती बन सकता है।
हादसे के ठीक 23 दिन बाद भी बसों में कोई बदलाव नहीं दिखा। अब भी मौत बनकर स्लीपर बसें दौड़ रही हैं। बस संचालकों पर न तो परिवहन विभाग की कार्रवाई का असर दिखा और न ही बस हादसे का। हादसे के बाद भी बसों में किसी तरह का बदलाव नहीं मिला। ट्रक की तर्ज पर स्लीपर बसों में सामान लादकर ले जाया जा रहा है। इसके कारण बस का संतुलन तक बिगड़ा। बिना परमिट, फिटनेस इत्यादि के चालान के साथ भी यह बसें सड़क पर दौड़ रही हैं।
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बसों की जांच नियमित की जा रही है। यात्री सुरक्षा से खिलवाड़ मिलने में सीज भी किया जा रहा है। एक्सप्रेसवे पर रुककर यात्री बैठाने पर भी रोक लगा दी गई है।
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-डॉ. उदित नारायण पांडेय, एआरटीओ प्रवर्तन।