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घायल तेंदुआ मिलने पर अरावली पहाड़ी से सटे ग्रामीणों में दहशत
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Panic among villagers adjoining Aravalli hill after getting injured leopard
तावडू। खंड के गांव पढ़ेनी में शनिवार को कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे के निकट एक घायल नर तेंदुआ मिला था। वन्यजीव कर्मियों की टीम ने तेंदुआ को उपचार के लिए रोहतक चिड़ियाघर भेज दिया था। इसके बाद से गांव पढ़ेनी सहित आसपास के ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि तेंदुए का साथी मादा भी आसपास के गांवों से लगते अरावली क्षेत्र में छिपा हो सकता है। डर की वजह से ग्रामीणों ने अरावली पहाड़ के साथ लगते खेतों में रात के समय सिंचाई करनी बंद कर दी है।
वन विभाग दरोगा मुबीन का कहना है की पहाड़ों में पानी नहीं मिलने और जंगलों से भटकने के कारण तेंदुएं बस्तियों की ओर पहुंच जाते हैं। नर मादा केवल मिलन के दौरान ही साथ घूमते हैं। तेंदुओं की अपनी एक निश्चित सीमा होती है। इससे ग्रामीणों को डरने की जरूरत नहीं है।
गांव पढ़ेनी, धुलावट, मालाका, पचगांवा, चीला, छारौड़ा, सिलखो, सहसौला, चाहलका, भगांह और खरख जलालपुर के ग्रामीण निजाम, अरशद, राशिद, ओमप्रकाश, साजिद, आबिद, निसार, खुर्शीद नंबरदार, नेक मोहम्मद, सब्बीर, जहीर आदि का कहना है कि ये गांव अरावली पहाड़ के साथ सटे हुए हैं। गांव पढ़ेनी की आबादी के निकट एक तेंदुआ के मिलने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है। डर की वजह से किसानों ने रात के समय अरावली पहाड़ के साथ लगते खेतों में पानी देना छोड़ दिया है। शाम होते ही बच्चों ने घरों से निकला बंद कर दिया है। ग्रामीणों को डर है कि कहीं पकड़े गए नर तेंदुआ का दूसरा मादा साथी छिपा न हो।
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मेवात क्षेत्र के अरावली पहाड़ों में वनों का आकार सिमटने से वन्य जीवों के रहने का संकट लगातार गहराता जा रहा है। दो दशक पहले वन्य प्राणियों का जमघट रहने वाले क्षेत्र में अब गीदड़ ,नील गाय व अन्य छोटे बड़े प्राणी ही कभी-कभार नजर आते हैं। नील गाय भी पानी और खाना नहीं मिलने के कारण अब गांवों की ओर अपना रुख कर किसानों की फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। पूर्व सरपंच शबनम खान, पूर्व पंच मोहम्मद हासिम, पूर्व सरपंच बशीर, पूर्व सरपंच खालिद, हाजी उसमान, यूूनुस नंबरदार आदि का मानना है कि पेड़ों की अंधाधुंध कटाई व खनन माफियों की वजह से धीरे-धीरे जिले के पहाड़ी जंगल सिमटते जा रहे हैं। इस कारण वन्य जीवों पर संकट गहरा रहा है। नील गाय समेत अन्य जानवर जंगल में रहने की बजाय अब गांवों की ओर भोजन और पानी की तलाश में भटक रहे हैं। क्षेत्र के लोगों ने वन विभाग से अरावली क्षेत्र में सिमटते पेड़-पौधों व जगंलों पर ध्यान देने की फरियाद की है, ताकि वन्य प्राणी सुरक्षित रह सके।
डरने की जरूरत नहीं
गुरुग्राम वन्य जीव निरीक्षक राजेश चहल ने बताया की ग्रामीणों को डरने की जरूरत नहीं है। घायल अवस्था में मिला तेंदुआ रास्ता भटककर ही पहुंचा थी। किसी अन्य तेंदुएं के आशंका को उन्होंने सिरे से नकार दिया।
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वन विभाग दरोगा मुबीन का कहना है की पहाड़ों में पानी नहीं मिलने और जंगलों से भटकने के कारण तेंदुएं बस्तियों की ओर पहुंच जाते हैं। नर मादा केवल मिलन के दौरान ही साथ घूमते हैं। तेंदुओं की अपनी एक निश्चित सीमा होती है। इससे ग्रामीणों को डरने की जरूरत नहीं है।
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गांव पढ़ेनी, धुलावट, मालाका, पचगांवा, चीला, छारौड़ा, सिलखो, सहसौला, चाहलका, भगांह और खरख जलालपुर के ग्रामीण निजाम, अरशद, राशिद, ओमप्रकाश, साजिद, आबिद, निसार, खुर्शीद नंबरदार, नेक मोहम्मद, सब्बीर, जहीर आदि का कहना है कि ये गांव अरावली पहाड़ के साथ सटे हुए हैं। गांव पढ़ेनी की आबादी के निकट एक तेंदुआ के मिलने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है। डर की वजह से किसानों ने रात के समय अरावली पहाड़ के साथ लगते खेतों में पानी देना छोड़ दिया है। शाम होते ही बच्चों ने घरों से निकला बंद कर दिया है। ग्रामीणों को डर है कि कहीं पकड़े गए नर तेंदुआ का दूसरा मादा साथी छिपा न हो।
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मेवात क्षेत्र के अरावली पहाड़ों में वनों का आकार सिमटने से वन्य जीवों के रहने का संकट लगातार गहराता जा रहा है। दो दशक पहले वन्य प्राणियों का जमघट रहने वाले क्षेत्र में अब गीदड़ ,नील गाय व अन्य छोटे बड़े प्राणी ही कभी-कभार नजर आते हैं। नील गाय भी पानी और खाना नहीं मिलने के कारण अब गांवों की ओर अपना रुख कर किसानों की फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। पूर्व सरपंच शबनम खान, पूर्व पंच मोहम्मद हासिम, पूर्व सरपंच बशीर, पूर्व सरपंच खालिद, हाजी उसमान, यूूनुस नंबरदार आदि का मानना है कि पेड़ों की अंधाधुंध कटाई व खनन माफियों की वजह से धीरे-धीरे जिले के पहाड़ी जंगल सिमटते जा रहे हैं। इस कारण वन्य जीवों पर संकट गहरा रहा है। नील गाय समेत अन्य जानवर जंगल में रहने की बजाय अब गांवों की ओर भोजन और पानी की तलाश में भटक रहे हैं। क्षेत्र के लोगों ने वन विभाग से अरावली क्षेत्र में सिमटते पेड़-पौधों व जगंलों पर ध्यान देने की फरियाद की है, ताकि वन्य प्राणी सुरक्षित रह सके।
डरने की जरूरत नहीं
गुरुग्राम वन्य जीव निरीक्षक राजेश चहल ने बताया की ग्रामीणों को डरने की जरूरत नहीं है। घायल अवस्था में मिला तेंदुआ रास्ता भटककर ही पहुंचा थी। किसी अन्य तेंदुएं के आशंका को उन्होंने सिरे से नकार दिया।