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एक ही सोसाइटी के चार निवासियों की मौत से लोगों में दहशत
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नोएडा। जिले में कोरोना संक्रमण खतरनाक रूप लेता जा रहा है। जिले में कोरोना से होने वाले मौत का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। सेक्टर-77 स्थित प्रतीक विस्टीरिया सोसाइटी में चार बुजुर्गों की मौत का मामला सामने आया है। इससे सोसाइटीवासियों में दहशत फैल गई है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने तीन में कोरोना संक्रमण की पुष्टि की है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि मरीजों की मौत अलग-अलग समय और स्थान पर हुई है। एक की मौत के विषय में अभी स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।
सीएमओ डॉ. दीपक ओहरी ने बताया कि सोसाइटी के रहने वाले तीन लोगों की मौत की जानकारी मिली है। इनमें से एक का इलाज गुरुग्राम के निजी अस्पताल और एक का दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में चल रहा था। जबकि, तीसरा मरीज यथार्थ अस्पताल नोएडा में भर्ती था। वहीं, सोसाइटी के एओए जनरल सेक्रेटरी नितेश रंजन का कहना है कि सोसाइटी में तीन बुजुर्ग और एक वृद्ध महिला की मौत कोरोना से हुई है। इनमें से दो मरीज ए टॉवर, एक बी टॉवर और महिला क्यू टॉवर में रहती थीं।
दो की मौत शनिवार देर रात और दो मरीजों की मौत रविवार सुबह हुई है। उन्होंने बताया कि महिला होम आइसोलेशन में का इलाज चल रहा था। सोसाइटी में करीब 132 लोग संक्रमित हैं। इनमें से कई होम आइसोलशन में हैं। 4 लोगों की मौत के बाद से सोसाइटी में दहशत है। इन मरीजों की मौत के संबंध में सूचना स्वास्थ्य विभाग को भेजी गई है। वहीं, मृतक महिला के बेटे का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग दावों के अनुरूप लोगों की मदद नहीं कर रहा है।
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रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए मांगी मदद, नहीं मिलने पर मौत
कोरोना संक्रमण काल में एक ओर जहां स्वास्थ्य विभाग जिले में सभी सुविधाएं मौजूद होने की बात कर रहा है। वहीं, रेमडेसिविर इंजेक्शन के नहीं मिलने के कारण एक युवक की मौत हो गई। युवक ने सोशल मीडिया समेत कई व्हाट्स एप ग्रुप पर इंजेक्शन की जरूरत बताते हुए मदद मांगी थी। इसके बावजूद इंजेक्शन का प्रबंध नहीं हो सका। ऐसे में राकेश सिंह नाम के युवक की अस्पताल में मौत हो गई।
डीडीआरडब्ल्यूए के उपाध्यक्ष संजीव कुमार ने बताया कि उनका मित्र राकेश सिंह ग्रेटर नोएडा स्थित निजी अस्पताल में भर्ती था। फेफड़ों में संक्रमण बताते हुए डाक्टरों ने तत्काल रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग की थी। इसके लिए राकेश के परिजनों ने काफी प्रयास किया। दिल्ली-एनसीआर के कई मेडिकल स्टोर से संपर्क किया गया, लेकिन इंजेक्शन नहीं मिला। संजीव ने बताया कि मैंने भी कई व्हाट्स एप ग्रुप में मैसेज डालकर लोगों से मदद की गुहार लगाई।
उन्होंने बताया कि ऐसे ग्रुप मैसेज भेजे थे, जिनसे सीएमओ समेत जिले के कई अधिकारी जुड़े हैं। इसके बावजूद कहीं से भी मदद नहीं मिली। उन्होंने बताया कि जिले के नोडल अधिकारी नरेंद्र भूषण को भी मैसेज किया, लेकिन उन्होंने भी कोई जवाब नहीं दिया। सिस्टम की लापरवाही और दवाओं की कालाबाजारी से आखिर उनका दोस्त कोरोना से जंग हार गया।
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सीएमओ डॉ. दीपक ओहरी ने बताया कि सोसाइटी के रहने वाले तीन लोगों की मौत की जानकारी मिली है। इनमें से एक का इलाज गुरुग्राम के निजी अस्पताल और एक का दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में चल रहा था। जबकि, तीसरा मरीज यथार्थ अस्पताल नोएडा में भर्ती था। वहीं, सोसाइटी के एओए जनरल सेक्रेटरी नितेश रंजन का कहना है कि सोसाइटी में तीन बुजुर्ग और एक वृद्ध महिला की मौत कोरोना से हुई है। इनमें से दो मरीज ए टॉवर, एक बी टॉवर और महिला क्यू टॉवर में रहती थीं।
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दो की मौत शनिवार देर रात और दो मरीजों की मौत रविवार सुबह हुई है। उन्होंने बताया कि महिला होम आइसोलेशन में का इलाज चल रहा था। सोसाइटी में करीब 132 लोग संक्रमित हैं। इनमें से कई होम आइसोलशन में हैं। 4 लोगों की मौत के बाद से सोसाइटी में दहशत है। इन मरीजों की मौत के संबंध में सूचना स्वास्थ्य विभाग को भेजी गई है। वहीं, मृतक महिला के बेटे का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग दावों के अनुरूप लोगों की मदद नहीं कर रहा है।
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रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए मांगी मदद, नहीं मिलने पर मौत
कोरोना संक्रमण काल में एक ओर जहां स्वास्थ्य विभाग जिले में सभी सुविधाएं मौजूद होने की बात कर रहा है। वहीं, रेमडेसिविर इंजेक्शन के नहीं मिलने के कारण एक युवक की मौत हो गई। युवक ने सोशल मीडिया समेत कई व्हाट्स एप ग्रुप पर इंजेक्शन की जरूरत बताते हुए मदद मांगी थी। इसके बावजूद इंजेक्शन का प्रबंध नहीं हो सका। ऐसे में राकेश सिंह नाम के युवक की अस्पताल में मौत हो गई।
डीडीआरडब्ल्यूए के उपाध्यक्ष संजीव कुमार ने बताया कि उनका मित्र राकेश सिंह ग्रेटर नोएडा स्थित निजी अस्पताल में भर्ती था। फेफड़ों में संक्रमण बताते हुए डाक्टरों ने तत्काल रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग की थी। इसके लिए राकेश के परिजनों ने काफी प्रयास किया। दिल्ली-एनसीआर के कई मेडिकल स्टोर से संपर्क किया गया, लेकिन इंजेक्शन नहीं मिला। संजीव ने बताया कि मैंने भी कई व्हाट्स एप ग्रुप में मैसेज डालकर लोगों से मदद की गुहार लगाई।
उन्होंने बताया कि ऐसे ग्रुप मैसेज भेजे थे, जिनसे सीएमओ समेत जिले के कई अधिकारी जुड़े हैं। इसके बावजूद कहीं से भी मदद नहीं मिली। उन्होंने बताया कि जिले के नोडल अधिकारी नरेंद्र भूषण को भी मैसेज किया, लेकिन उन्होंने भी कोई जवाब नहीं दिया। सिस्टम की लापरवाही और दवाओं की कालाबाजारी से आखिर उनका दोस्त कोरोना से जंग हार गया।