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Rajaram Jain Passed Away: पद्मश्री राजाराम जैन का निधन, 14वीं शताब्दी की पांडुलिपियों का किया था अनुवाद

Sun, 04 Jan 2026 11:33 PM IST
आकाश दुबे माई सिटी रिपोर्टर, नोएडा
माई सिटी रिपोर्टर, नोएडा Published by: आकाश दुबे Updated Sun, 04 Jan 2026 11:33 PM IST
सार

नोएडा के पद्मश्री राजाराम जैन का 96 की आयु में रविवार को निधन हो गया। वह प्रसिद्ध भाषाविद्, लेखक थे। उन्होंने 40 से अधिक पुस्तकें लिखीं और दुर्लभ पांडुलिपियों का अनुवाद किया।

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Padma Shri Rajaram Jain who translated 14th century manuscripts passes away
पद्मश्री राजाराम जैन का निधन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नोएडा के सेक्टर-34 निवासी पद्मश्री राजाराम जैन (96) का रविवार दोपहर निधन हो गया। वह कुछ समय से बीमार चल रहे थे। उनकी देखभाल के लिए पूरा परिवार पहले से ही आया था। उनके चार बच्चे रत्ना जैन, राजीव गौयल, रश्मि जैन और राजेश पंकज हैं। सभी बाहर रहते हैं। बेटे राजीव ने बताया कि अंतिम संस्कार सोमवार को सेक्ट-94 स्थित अंतिम निवास स्थल पर होगा। दोपहर दो बजे सेक्टर-34 नीलगिरी अपार्टमेंट से अंतिम यात्रा निकलेगी।

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राजाराम जैन भारतीय विज्ञानी के अलावा भाषा विज्ञानी, प्रसिद्ध लेखक व प्राकृत, अपभ्रंश जैसी भाषाओं के विद्वान थे। उनके निधन की खबर से साहित्य जगत में शोक की लहर है। उनकी बेटी रत्ना जैन के अनुसार, साल 1929 में मध्य प्रदेश के मालथौन में जन्मे राजाराम जैन की भाषायी पकड़ और दुर्लभ पांडुलिपियों का अध्ययन कर उनका अनुवाद करने की कला हासिल थी। उन्हें इसी कला और समाज में भारत की प्राचीनतम भाषाओं के ज्ञान के लिए 2024 में पद्मश्री पुरस्कार मिला था। 2000 में प्रेजिडेंशियल अवॉर्ड (राष्ट्रपति द्वारा दिया जाने वाला सम्मान प्रमाण) से नवाजा गया था। 2003 में वह नोएडा के सेक्टर-34 में अपने परिवार के साथ आकर बसे थे।

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40 से अधिक पुस्तकें लिखीं
रश्मि जैन ने बताया कि उनके पिता ने 40 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं। उन्होंने 14वीं और 15वीं शताब्दी की अप्रकाशित पांडुलिपियों को वर्षों इकट्ठा करने के बाद उन्हें क्रमिक रूप से तैयार कर उनका अध्ययन किया। यह तब के कवि, कवि रैधु की रचनाएं थीं। उनका अध्ययन करने के साथ-साथ राजाराम जैन ने हिंदी अनुवाद भी किया, जिससे पूरे साहित्य जगत में 14वीं शताब्दी की पांडुलिपियों को पढ़ने और संस्कृति, साहित्य को समझने का मौका मिल सका। वह यूजीसी नेट और प्रेजिडेंशियल अवॉर्ड को चुनने के लिए बनाए गए बोर्ड के सदस्य भी रहे। रश्मि ने बताया कि 2025 मार्च में माता का देहांत हो गया था। पिता राजाराम जैन ने शादी के बाद मां को पढ़ने का मौका दिया था।

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