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नगीना

Sat, 24 Jul 2021 11:03 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 24 Jul 2021 11:03 PM IST
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राजूद्दीन जंग
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नगीना। कोटला ग्राम पंचायत ने शनिवार को अरावली पहाड़ियों से गांव में बहने वाले झरनों पर आसपास के गांवों से आने वाले ग्रामीण व पर्यटकों के नहाने पर पाबंदी लगा दी है। यदि कोई ऐसा करता है तो उनके खिलाफ केस दर्ज कराया जाएगा। पंचायत ने यहां गांव की औरतों के कपड़े धोने और पानी भरकर ले जाने का हवाला दिया है।
जिले भर में पंचायत के इस निर्णय को तुगलकी फरमान बताकर आलोचना की जा रही है। जिले के साथ अलवर, भरतपुर, फरीदाबाद, गुरुग्राम, दिल्ली, रेवाड़ी पलवल आदि जिलों के पर्यटकों ने भी खेद जताया है।
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बता दें हरियाणा सरकार कोटला गांव को टूरिज्म हब के रूप में विकसित करना चाहती है। कोटला गांव ऐसा है जहां अनेकों प्रकार की ऐतिहसिक विरासतें पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।केंद्र और राज्य सरकार पर्यटन विभाग के अधिकारी कई बार कोटला गांव का भ्रमण कर चुके हैं। गांव के युवाओं ने पंचायत के तुगलकी फरमान का विरोध किया है।
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हमेशा प्राकृतिक झरने अरावली पहाड़ियों से नीचे झरते रहते हैं। झरनों को देखने और नहाने आने वाले पर्यटकों को यहां आने से रोका गया है। यहां गांव की महिलाएं कपड़े धोती हैं और पीने का पानी भर कर ले जाती हैं। कोई छेड़छाड़ व अन्य घटना न हो। ग्राम पंचायत में पस्ताव पारित कर दिया है।
शाहिना, सरपंच गांव कोटला।
पंचायत में फैसला लिया गया है कि बाहर का कोई भी आदमी झरनों को देखने और नहाने नहीं आ सकता। वह नहीं मानते तो उनके खिलाफ केस दर्ज कराया जाएगा और पंचायत उन्हें दंडित करेगी। - इब्राहिम, पूर्व सरपंच कोटला।
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐतिहासिक झरनों को देखने का अधिकार सब लोगों को मिलना चाहिए। इसे पर्यटक स्थल बनाना चाहिए। जिससे गांव की आमदनी बढ़े। झील, झरना, किला, बावड़ी, मकबरा और शाही मस्जिद आदि कोटला की शान हैं। -जाकिर हुसैन, समाजसेवी कोटला।
किन हालात में ग्राम पंचायत ने ऐसा लिखा है। इस बारे में जानकारी ली जा रही है। पर्यटकों को वहां जाने से रोकना गलत है। इस मामले में संज्ञान लिया जाएगा।- शक्ति सिंह, डीसी नूंह।

कोटला गांव की ऐतिहासिक विरासतें
कोटला गांव में प्रदेश की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील है जो करीब 4500 एकड़ भूमि पर फैली हुई है। इसमें सरकार ने 108 एकड़ जमीन पर चार दीवारी कर झील बना दी है। तकरीबन 800 साल पहले राजा नाहर खान ने कोटला किले का निर्माण अरावली पहाड़ी के ऊपर कराया था। ढांचा आज भी अपनी कला एवं संस्कृति की पहचान कराता है। शाही बावड़ी की मरम्मत 2009 में ग्रामीणों और एनजीओ सहगल फाउंडेशन ने मिलकर स्वयंसेवकों के साथ मिलकर कराई थी। अरावली पहाड़ियों के प्राकृतिक झरने 25 से 30 फुट ऊंचाई से नीचे गिरते हैं। कोटला गांव की अरावली पहाड़ियों पर बने किला से गांव मालब तक शाही सुरंग बनी हुई हैं।
कैप्शनऱ् ग्राम पंचायत कोटला का तुगलकी फरमान पत्र। ऐतिहासिक कोटला गांव में बनी बावड़ी। कोटला गांव में बना किला।
............राजुद्दीन जंग, नगीना.......................
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