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Noida News: किसानों को उकसाकर धरना दिलाने का षडयंत्र रच रहे ओएसडी
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किसानों को उकसाकर धरना दिलाने का षडयंत्र रच रहे ओएसडी
- लीजबैक प्रकरण में एसआईटी चेयरमैन को किसानाें के प्रतिनिधिमंडल ने गाड़ी की फोटो के साथ साक्ष्य सौंपे
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। जमीन अधिग्रहण से प्रभावित गांवों की लीजबैक मामले की रिपोर्ट लीक होने के मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) के सदस्य नए आरोपों से घिर गए हैं। आरोप है कि ग्रेनो प्राधिकरण के ओएसडी और कुछ दूसरे अधिकारी व कर्मचारी किसान नेता के साथ सीईओ के खिलाफ धरना व प्रदर्शन कर रिपोर्ट शासन में भेजने का दबाव बनाने का षडयंत्र रच रहे हैं। किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को एसआईटी के चेयरमैन और यमुना प्राधिकरण के सीईओ को अधिकारियों की गाड़ी व अन्य फोटो के साथ साक्ष्य भी दिए हैं। यीडा के सीईओ ने इस बारे में ग्रेनो प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि को भी अवगत कराया है। उन्हें फोटो व वीडियो भी भेज दी है।
नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन चेयरमैन डॉ. प्रभात कुमार ने वर्ष 2011 में जमीन अधिग्रहण से प्रभावित गांवों की लीजबैक की जांच कराई थी, जिसमें अनियमितता पाई गई। शासन स्तर पर 533 में से 237 प्रकरणों को बीते वर्ष अक्तूबर में खारिज कर दिया गया था। किसानों के प्रदर्शन करने पर फिर से जांच के आदेश दिए गए थे। शासन के आदेश पर एसआईटी ने 237 प्रकरणों की दोबारा सुनवाई की। यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की गई थी। खैरपुर गुर्जर गांव के किसानों ने सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह से शासन तक पहुंचने से पहले एसआईटी की रिपोर्ट लीक होने की शिकायत की थी। जांच सही पाई गई। इसमें ग्रेनो प्राधिकरण के दो वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। उन्होंने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए इन अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी। रिपोर्ट को आगे भेजने से इन्कार कर दिया। इसी मामले में ग्रेनो प्राधिकरण के कई अफसरों के कार्य क्षेत्रों में फेरबदल भी किया गया है। यीडा के सीईओ ने बताया कि किसानों से मुहैया साक्ष्य ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ को भेज दिया गया है।
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- लीजबैक प्रकरण में एसआईटी चेयरमैन को किसानाें के प्रतिनिधिमंडल ने गाड़ी की फोटो के साथ साक्ष्य सौंपे
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। जमीन अधिग्रहण से प्रभावित गांवों की लीजबैक मामले की रिपोर्ट लीक होने के मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) के सदस्य नए आरोपों से घिर गए हैं। आरोप है कि ग्रेनो प्राधिकरण के ओएसडी और कुछ दूसरे अधिकारी व कर्मचारी किसान नेता के साथ सीईओ के खिलाफ धरना व प्रदर्शन कर रिपोर्ट शासन में भेजने का दबाव बनाने का षडयंत्र रच रहे हैं। किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को एसआईटी के चेयरमैन और यमुना प्राधिकरण के सीईओ को अधिकारियों की गाड़ी व अन्य फोटो के साथ साक्ष्य भी दिए हैं। यीडा के सीईओ ने इस बारे में ग्रेनो प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि को भी अवगत कराया है। उन्हें फोटो व वीडियो भी भेज दी है।
नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन चेयरमैन डॉ. प्रभात कुमार ने वर्ष 2011 में जमीन अधिग्रहण से प्रभावित गांवों की लीजबैक की जांच कराई थी, जिसमें अनियमितता पाई गई। शासन स्तर पर 533 में से 237 प्रकरणों को बीते वर्ष अक्तूबर में खारिज कर दिया गया था। किसानों के प्रदर्शन करने पर फिर से जांच के आदेश दिए गए थे। शासन के आदेश पर एसआईटी ने 237 प्रकरणों की दोबारा सुनवाई की। यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की गई थी। खैरपुर गुर्जर गांव के किसानों ने सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह से शासन तक पहुंचने से पहले एसआईटी की रिपोर्ट लीक होने की शिकायत की थी। जांच सही पाई गई। इसमें ग्रेनो प्राधिकरण के दो वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। उन्होंने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए इन अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी। रिपोर्ट को आगे भेजने से इन्कार कर दिया। इसी मामले में ग्रेनो प्राधिकरण के कई अफसरों के कार्य क्षेत्रों में फेरबदल भी किया गया है। यीडा के सीईओ ने बताया कि किसानों से मुहैया साक्ष्य ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ को भेज दिया गया है।
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