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Noida News: यूपीसीडा के प्रबंधक निदेशक, क्षेत्रीय प्रबंधक समेत तीन पर केस दर्ज के आदेश

Wed, 14 Jun 2023 12:55 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 14 Jun 2023 12:55 AM IST
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Order to register case on three including UPCIDA's Managing Director, Regional Manager
कोर्ट : यूपीसीडा के प्रबंधक निदेशक समेत तीन पर केस दर्ज के आदेश
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-वर्ष 2006 में औद्योगिक भूखंड के लिए आवेदन करने के बावजूद अब तक नहीं मिला औद्योगिक भूखंड

माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्ध नगर जिला न्यायालय ने उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) के प्रबंधक निदेशक कानपुर, क्षेत्रीय प्रबंधक गौतमबुद्ध नगर अनिल शर्मा व क्षेत्रीय प्रबंधक गाजियाबाद के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने 14 दिन के भीतर कासना पुलिस को केस दर्ज कर आख्या पेश करने को कहा है। कासना थाना प्रभारी संतोष शुक्ला का कहना है कि मामले में न्यायालय का आदेश प्राप्त हुआ है और जल्द ही केस दर्ज कर जांच शुरू की जाएगी।
पुलिस के मुताबिक, नोएडा के सेक्टर-36 निवासी मदनपाल त्यागी की नोएडा में फैक्ट्री है। 18 फरवरी 2006 को उन्होंने औद्योगिक भूखंड के लिए आवेदन किया था। उक्त भूखंड योजना यूपीसीडा के बुलंदशहर के सिकंदराबाद क्षेत्र में लाई गई थी। मदनपाल त्यागी का आरोप है कि यूपीसीडा ने 27 लाख रुपये ले लिए। वही भूखंड यूपीसीडा किसी अन्य व्यक्ति के नाम आवंटित करने के फिराक में है। मदन पाल को न तो भूखंड मिला और न ही उनकी रकम वापस दी गई। लगभग 17 साल तक यूपीसीडा के खिलाफ लड़ाई लड़ने के बाद मदन पाल ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। अब न्यायालय के आदेश से उन्हें न्याय की आस जगी है। वहीं, जानकारी मिली है कि यूपीसीडा के अधिकारी इस मामले में हाईकोर्ट जाने की तैयारी में हैं।
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आरोप निराधार, हाईकोर्ट में देंगे चुनौती
यूपीसीडा के क्षेत्रीय प्रबंधक अनिल शर्मा का कहना है कि आवंटी को वर्ष 2014 में भूखंड का आवंटन किया गया। लीजडीड भी हो चुकी है। आवंटी ने अब तक निर्माण नहीं कराया है। वर्ष 2017, 2020 और 2023 में समय विस्तार दिया जा चुका है। इस वर्ष 2023 में दिए गए समय विस्तार की अवधि जुलाई तक है। उपभोक्ता फोरम में भी आवंटी का केस विचाराधीन है। आवंटी ने कोर्ट के समक्ष गलत तथ्य पेश किए हैं। जिला न्यायालय के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
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दो दशक बाद भी भूखंड न मिलने पर महेश मित्रा ने मांगी इच्छा मृत्यु
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का भी इस तरह का एक मामला है। जिसमें दो दशक पूर्व दिल्ली में प्राधिकरण की ओर से औद्योगिक भूखंड देने के लिए शिविर लगाया गया था। इसमें महेश मित्रा ने अपनी ओर से 20 हजार रुपये जमा कराए थे और उनको आज तक कोई भूखंड नहीं मिला है। अदालतों में लंबी लड़ाई के बाद प्राधिकरण एक हजार वर्गमीटर का प्लॉट देने को तैयार हुआ है। महेश मित्रा का कहना है कि उन्होंने ढाई हजार वर्गमीटर के भूखंड के लिए आवेदन किया था। इसके लिए अदालत भी आदेश कर चुकी है, लेकिन अभी तक उनकी सुनवाई नहीं हो पाई है। अब उन्होंने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से इच्छा मृत्यु मांगी है।
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