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Noida News: खुली जेल के कैदियों को मोबाइल फोन देने की प्रक्रिया तय करने का आदेश
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-मामला एक आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी से जुड़ा है
-उसे मोबाइल फोन रखने के कारण बंद जेल भेज दिया गया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने खुली जेलों में बंद कैदियों के लिए मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट नियम बनाने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि महानिदेशक (कारागार) आठ हफ्तों के भीतर एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करें और उसे अधिसूचित करें। न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने कहा कि यह एसओपी या तो कैदियों को नियमों के तहत मोबाइल रखने की अनुमति दे या फिर जेल में फोन जमा करने और वापसी के लिए सुरक्षित व्यवस्था बनाए।
अदालत ने माना कि खुली जेलों में बंद कैदियों के लिए मोबाइल फोन परिवार से संपर्क, काम के समन्वय और डिजिटल भुगतान का जरिया होता है, इसलिए व्यवहारिक व्यवस्था जरूरी है। मामला एक आजीवन कारावास काट रहे कैदी से जुड़ा था, जिसे खुली जेल में मोबाइल फोन रखने के कारण बंद जेल भेज दिया गया था। अदालत ने पाया कि यह स्थानांतरण बिना उचित न्यायिक मूल्यांकन के किया गया था और कहा कि यह नियमों के अनुरूप नहीं है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि यदि जेल में सामान रखना मना है, तो प्रशासन को ऐसी जमा और वापसी प्रणाली बनानी चाहिए, जिससे कैदी नियमों का पालन कर सकें और अपने अधिकारों से वंचित न हों। इसके साथ ही, अदालत ने चयन समिति को कैदी की नियुक्ति पर पुनर्विचार करने और एक सप्ताह के भीतर आदेश पारित करने का निर्देश भी दिया।
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-उसे मोबाइल फोन रखने के कारण बंद जेल भेज दिया गया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने खुली जेलों में बंद कैदियों के लिए मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट नियम बनाने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि महानिदेशक (कारागार) आठ हफ्तों के भीतर एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करें और उसे अधिसूचित करें। न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने कहा कि यह एसओपी या तो कैदियों को नियमों के तहत मोबाइल रखने की अनुमति दे या फिर जेल में फोन जमा करने और वापसी के लिए सुरक्षित व्यवस्था बनाए।
अदालत ने माना कि खुली जेलों में बंद कैदियों के लिए मोबाइल फोन परिवार से संपर्क, काम के समन्वय और डिजिटल भुगतान का जरिया होता है, इसलिए व्यवहारिक व्यवस्था जरूरी है। मामला एक आजीवन कारावास काट रहे कैदी से जुड़ा था, जिसे खुली जेल में मोबाइल फोन रखने के कारण बंद जेल भेज दिया गया था। अदालत ने पाया कि यह स्थानांतरण बिना उचित न्यायिक मूल्यांकन के किया गया था और कहा कि यह नियमों के अनुरूप नहीं है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि यदि जेल में सामान रखना मना है, तो प्रशासन को ऐसी जमा और वापसी प्रणाली बनानी चाहिए, जिससे कैदी नियमों का पालन कर सकें और अपने अधिकारों से वंचित न हों। इसके साथ ही, अदालत ने चयन समिति को कैदी की नियुक्ति पर पुनर्विचार करने और एक सप्ताह के भीतर आदेश पारित करने का निर्देश भी दिया।
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