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Noida News: मेडिकल काॅलेज सहित अन्य सभी निर्माण में उपचारित पानी का ही उपयोग होगा
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गुरुग्राम में एक साइट पर हो रहे निर्माण कार्य का फाइल फोटो
गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी ने जिला नगर योजनाकार को पत्र लिखा
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। शहर में चल रहे विभिन्न प्रकार के निजी और सरकारी निर्माण कार्य में उपचारित पानी का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (जीएमडीए) ने जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) को पत्र लिखा है, जिसमें बिल्डरों पर निर्माण के लिए उपचारित पानी का उपयोग करने पर जोर दिए जाने की बात कही है। इसके साथ ही जीएमडीए उपचारित पानी के हाइडेंट्स (पानी के आउटलेट्स) की संख्या भी बढ़ाने जा रहा है।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुधीर राजपाल ने बन रहे मेडिकल कॉलेज के निर्माण में उपचारित पानी का उपयोग नहीं होने पर नाराजगी जताई। कोर प्लानिंग सेल (सीपीसी) की बैठक में अधिकारियों से कहा कि टीआरएल बिल्डर अपने यहां हो रहे निर्माण में प्रतिदिन लाखों लीटर उपचारित पानी का उपयोग कर रहा है। महीने में 70 से 80 लाख लीटर पानी इस्तेमाल किया है। टीआरएल बिल्डर कहते हैं कि यह पानी निर्माण के लिए पूरी तरह अनुकूल है।
उन्होंने निर्देश दिए कि मेडिकल कॉलेज के हो रहे निर्माण में भी उपचारित पानी का ही प्रयोग करें। इस पर बताया गया कि वहां पर उपचारित पानी का हाइडेंट्स नहीं है। इस पर सीईओ ने तुरंत वहां हाइडेंट्स लगवाने के निर्देश दिए। उन्होंने उपचारित पानी के हाइडेंट्स की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया जिससे पानी का उपयोग करने के लिए उपयोगकर्ता को ज्यादा दूरी तय नहीं करना पड़े।
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अधिकारियों से कहा कि वह द्वारका एक्सप्रेसवे के आसपास हो रहे निर्माण कार्य में उपचारित पानी का इस्तेमाल करने के लिए निर्माण करने वालों से संपर्क करें। इस संंबंध में उन्होंने जिला नगर योजनाकार को पत्र लिखने के लिए कहा जिससे डीटीपी अपने स्तर से बिल्डरों को इस बात के लिए जोर दे सकें कि वह उपचारित पानी का ही निर्माण में प्रयोग करें। निर्माण में कोई भी टैंकर का पानी इस्तेमाल नहीं करेगा। बैठक में बताया गया कि अभी निर्माण में नहर के पानी का टैंकर में भर कर उपयोग किया जा रहा है।
साइट पर डायवर्जन से पहले अस्थायी सड़क तैयार करें
सीईओ सुधीर राजपाल ने कहा कि निर्माण के दौरान साइट पर यातायात डायवर्जन के सभी जरूरी उपाय कर लिए जाएं, जिससे धूल आदि न उठे। इसके लिए उन्हें दिल्ली मेट्रो में हुए निर्माण कार्य से सबक लेने की नसीहत भी दी। उन्होंने कहा कि निर्माण के दौरान सड़क को बहुत ज्यादा अस्त व्यस्त कर दिया जाता है। वहां पर कम से कम अस्थायी वैकल्पिक सड़क तो बनाई ही जाए। जहां पर जंक्शन हैं वह पर ठेकेदार इतना तो करें कि धूल न उड़े। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जब मेट्रो का निर्माण हो रहा था, तब वह सड़क भी बनाते थे। ऐसा नहीं होना चाहिए कि एक साल का प्रोजेक्ट है तो एक साल तक वहां सड़क की खराब स्थिति ही रहेगी। उन्होंने मानेसर से एसपीआर को जोड़ने के लिए बन रही सड़क पर भी पहले सर्विस रोड बनाने के निर्देश दिए हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। शहर में चल रहे विभिन्न प्रकार के निजी और सरकारी निर्माण कार्य में उपचारित पानी का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (जीएमडीए) ने जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) को पत्र लिखा है, जिसमें बिल्डरों पर निर्माण के लिए उपचारित पानी का उपयोग करने पर जोर दिए जाने की बात कही है। इसके साथ ही जीएमडीए उपचारित पानी के हाइडेंट्स (पानी के आउटलेट्स) की संख्या भी बढ़ाने जा रहा है।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुधीर राजपाल ने बन रहे मेडिकल कॉलेज के निर्माण में उपचारित पानी का उपयोग नहीं होने पर नाराजगी जताई। कोर प्लानिंग सेल (सीपीसी) की बैठक में अधिकारियों से कहा कि टीआरएल बिल्डर अपने यहां हो रहे निर्माण में प्रतिदिन लाखों लीटर उपचारित पानी का उपयोग कर रहा है। महीने में 70 से 80 लाख लीटर पानी इस्तेमाल किया है। टीआरएल बिल्डर कहते हैं कि यह पानी निर्माण के लिए पूरी तरह अनुकूल है।
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उन्होंने निर्देश दिए कि मेडिकल कॉलेज के हो रहे निर्माण में भी उपचारित पानी का ही प्रयोग करें। इस पर बताया गया कि वहां पर उपचारित पानी का हाइडेंट्स नहीं है। इस पर सीईओ ने तुरंत वहां हाइडेंट्स लगवाने के निर्देश दिए। उन्होंने उपचारित पानी के हाइडेंट्स की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया जिससे पानी का उपयोग करने के लिए उपयोगकर्ता को ज्यादा दूरी तय नहीं करना पड़े।
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अधिकारियों से कहा कि वह द्वारका एक्सप्रेसवे के आसपास हो रहे निर्माण कार्य में उपचारित पानी का इस्तेमाल करने के लिए निर्माण करने वालों से संपर्क करें। इस संंबंध में उन्होंने जिला नगर योजनाकार को पत्र लिखने के लिए कहा जिससे डीटीपी अपने स्तर से बिल्डरों को इस बात के लिए जोर दे सकें कि वह उपचारित पानी का ही निर्माण में प्रयोग करें। निर्माण में कोई भी टैंकर का पानी इस्तेमाल नहीं करेगा। बैठक में बताया गया कि अभी निर्माण में नहर के पानी का टैंकर में भर कर उपयोग किया जा रहा है।
साइट पर डायवर्जन से पहले अस्थायी सड़क तैयार करें
सीईओ सुधीर राजपाल ने कहा कि निर्माण के दौरान साइट पर यातायात डायवर्जन के सभी जरूरी उपाय कर लिए जाएं, जिससे धूल आदि न उठे। इसके लिए उन्हें दिल्ली मेट्रो में हुए निर्माण कार्य से सबक लेने की नसीहत भी दी। उन्होंने कहा कि निर्माण के दौरान सड़क को बहुत ज्यादा अस्त व्यस्त कर दिया जाता है। वहां पर कम से कम अस्थायी वैकल्पिक सड़क तो बनाई ही जाए। जहां पर जंक्शन हैं वह पर ठेकेदार इतना तो करें कि धूल न उड़े। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जब मेट्रो का निर्माण हो रहा था, तब वह सड़क भी बनाते थे। ऐसा नहीं होना चाहिए कि एक साल का प्रोजेक्ट है तो एक साल तक वहां सड़क की खराब स्थिति ही रहेगी। उन्होंने मानेसर से एसपीआर को जोड़ने के लिए बन रही सड़क पर भी पहले सर्विस रोड बनाने के निर्देश दिए हैं।