नूंह। घरेलू हिंसा या समाज द्वारा प्रताड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए जिला स्तर पर स्टॉप सेंटर शुरू किया गया है। अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) विवेक पदम सिंह ने महिला थाने के सामने पुराना कोट कांप्लेक्स रोड पर स्थापित सेंटर का शुभारंभ किया।
इस मौके पर एडीसी सिंह ने कहा कि एक ही छत के नीचे घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं को अब यहां पर निशुल्क कानूनी सहायता, मेडिकल सुविधा के अलावा पुलिस की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही पीड़ित महिला को आश्रय व खानपान की व्यवस्था भी उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं व बालिकाओं पर होने वाले विभिन्न अपराधों से न्याय दिलाने के लिए स्टॉप सेंटर की स्थापना की गई है। जिसमें बलात्कार, घरेलू हिंसा, यौन शोषण, महिला तस्करी, बाल यौन शोषण पीड़ित, गुमशुदा, अपहरण, बाल विवाह, दहेज उत्पीड़न व एसिड अटैक से पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने का कार्य किया जाता है। उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति किसी महिला के साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाना चाहता या संबंध बनाने के लिए दबाव डालता है या गंदे मजाक व व्यंग भरी टिप्पणी करता है या शारीरिक हाव भाव से गंदी हरकतें करता है तो ये सभी यौन उत्पीड़न के अंतर्गत आते हैं। इस प्रकार के उत्पीड़न के मामलों में दोषी को 3 साल तक कारावास या जुर्माने की सजा हो सकती है। उन्होंने बताया कि किसी व्यक्ति द्वारा किसी महिला के निजी कार्य को छुपकर देखना या ताका-छाकी करना कानूनी रुप से अपराध है। महिला की सहमति के बिना यौन संबंधों को बलात्कार माना जाता है। इस मौके पर मुख्यमंत्री के सुशासन सहयोगी प्रनीत जशवानी, जिला कार्यक्रम अधिकारी अधिकारी नीरु मेहता सहित अन्य लोग मौजूद रहे।