{"_id":"5efe22f78ebc3e42ed43da89","slug":"officer-not-hearing-of-worker-noida-news-noi520891635","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिले में श्रमिकों को नहीं मिल रही जिला प्रशासन से मदद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिले में श्रमिकों को नहीं मिल रही जिला प्रशासन से मदद
विज्ञापन
मदद की गुहार लगा रहे श्रमिकों को टरका रहे अफसर
नोएडा। कोरोना काल में हजारों लोगों की नौकरी चली गई तो सैकड़ों लोगों को लॉकडाउन के दौरान वेतन नहीं दिया गया। लोगों ने डीएम से लेकर श्रम विभाग के अफसरों से कई बार शिकायत की। लेकिन समाधान नहीं हो पाया। सेक्टर-58 स्थित कारवी कंपनी में 450 श्रमिकों ने डीएम और श्रम विभाग से पांच बार शिकायत की है। लेकिन उन्हें बस टरका दिया जाता है। कर्मचारी योगेंद्र कुमार का कहना है कि डीएम से मिले तो उन्होंने श्रम विभाग भेज दिया। वहां गए तो शिकायत लेकर रख ली और कहा दो दिन बाद आना। फिर गए तो कहा अभी बात नहीं की है बाद में आना। 2 माह से टरकाया जा रहा है। सेक्टर-63 स्थित कॉल सेंटर में काम करने वाले 15 युवक-युवतियों को बिना वेतन नौकरी से निकाल दिया गया। उन्होंने भी तीन बार डीएम और श्रम विभाग को शिकायत दी है। लेकिन कुछ नहीं हुआ। अवंतिका ने आरोप लगाया कि फरवरी से वेतन नहीं दिया था और लॉकडाउन के दौरान मई में नौकरी से निकाल दिया। गुजारा मुश्किल हो गया है।
सभी श्रमिकों की शिकायतों को एक साथ हल नहीं कराया जा सकता है। कंपनी प्रबंधन से बात कर दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही किसी निर्णय पर पहुंचा जाता है। 4500 से अधिक शिकायतों का निस्तारण कराया जा चुका है।
पीके सिंह, उपश्रमायुक्त गौतमबुद्ध नगर
विज्ञापन
नोएडा। कोरोना काल में हजारों लोगों की नौकरी चली गई तो सैकड़ों लोगों को लॉकडाउन के दौरान वेतन नहीं दिया गया। लोगों ने डीएम से लेकर श्रम विभाग के अफसरों से कई बार शिकायत की। लेकिन समाधान नहीं हो पाया। सेक्टर-58 स्थित कारवी कंपनी में 450 श्रमिकों ने डीएम और श्रम विभाग से पांच बार शिकायत की है। लेकिन उन्हें बस टरका दिया जाता है। कर्मचारी योगेंद्र कुमार का कहना है कि डीएम से मिले तो उन्होंने श्रम विभाग भेज दिया। वहां गए तो शिकायत लेकर रख ली और कहा दो दिन बाद आना। फिर गए तो कहा अभी बात नहीं की है बाद में आना। 2 माह से टरकाया जा रहा है। सेक्टर-63 स्थित कॉल सेंटर में काम करने वाले 15 युवक-युवतियों को बिना वेतन नौकरी से निकाल दिया गया। उन्होंने भी तीन बार डीएम और श्रम विभाग को शिकायत दी है। लेकिन कुछ नहीं हुआ। अवंतिका ने आरोप लगाया कि फरवरी से वेतन नहीं दिया था और लॉकडाउन के दौरान मई में नौकरी से निकाल दिया। गुजारा मुश्किल हो गया है।
सभी श्रमिकों की शिकायतों को एक साथ हल नहीं कराया जा सकता है। कंपनी प्रबंधन से बात कर दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही किसी निर्णय पर पहुंचा जाता है। 4500 से अधिक शिकायतों का निस्तारण कराया जा चुका है।
विज्ञापन
पीके सिंह, उपश्रमायुक्त गौतमबुद्ध नगर