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Noida News: अब छोटी-छोटी गुफाओं में एनडीआरएफ और उत्तराखंड पुलिस करेगी जांच
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फोटो -- -- -
अब छोटी-छोटी गुफाओं में एनडीआरएफ और उत्तराखंड पुलिस करेगी जांच
-पुलिस को मिली अनुमति, 12 दिन बाद भी कोई नहीं मिला कोई सुराग
-पिंडारी ग्लेशियर ट्रैक के दौरान लापता नोएडा के सॉफ्टवेयर इंजीनियर की तलाश में पुलिस
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। पिंडारी ग्लेशियर ट्रैक के दौरान लापता हुए नोएडा के सॉफ्टवेयर इंजीनियर अभिषेक चौहान (28) का 12 दिन बाद भी कोई सुराग नहीं लग सका है। अब पुलिस एनडीआरएफ के साथ छोटी गुफाओं-लकड़ी से तैयार हट में खोजबीन करेगी। इसके लिए पुलिस को गुफाओं में तलाश करने का ऑर्डर मिल चुका है। अभिषेक की बड़ी बहन पूनम चौहान ने बताया कि बेटे की तलाश में खुद उनके पिता और बीएसएफ इंस्पेक्टर रघुराज चौहान अपने परिवार के साथ खुद उत्तराखंड पहुंचकर पुलिस और राहत टीमों के साथ लगातार सर्च अभियान में जुटे हैं।
अभिषेक 28 मई को ट्रैकिंग के लिए उत्तराखंड गए थे। परिवार के मुताबिक उन्हें 30 मई तक नोएडा लौटना था और अगले दिन कार्यालय में काम पर भी जाना था, लेकिन वह वापस नहीं आए। इसके बाद परिजनों ने उनकी तलाश शुरू कराई। पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की ओर से कई दिनों तक सर्च ऑपरेशन चलाया गया। डॉग स्क्वाड की भी मदद ली गई, लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिली है। इस बीच अभिषेक के पिता रघुराज चौहान ने स्थानीय पुलिस को लिखित शिकायत देकर उस व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है, जो व्यक्ति ट्रैक के दौरान उनके बेटे के साथ मौजूद था। परिवार का आरोप है कि उस व्यक्ति के बयानों में विरोधाभास है और यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि अभिषेक को दुर्गम पहाड़ी रास्ते पर अकेला क्यों छोड़ दिया गया। परिजनों ने कहा कि पुलिस से मांग की है कि वह कैमरे की फॉरेंसिंक जांच करें। उन्हें संदेह है कि कैमरें में लगी मेमोरी कार्ड से वीडियो एडिट किए गए हैं। ऐसे में यदि ऐसा पाया जाता है तो वीडियो एडिट करने वाले व्यक्ति की पहचान हो सकती है। परिजनों का कहना है कि खादी गांव से ट्रैकिंग की शुरूआत होती है। गाइड भी स्थानीय है। ऐसे में यदि खादी गांव के आस पास इलाके की जांच हो तो कुछ सुराग लग सकता है।
गाइड के परिवार से भी हो पूछताछ
परिजनों ने मांग की है कि गाइड के परिवार से भी पूछताछ हो, क्योंकि जब गाइड ने शुरुआती वक्त में अभिषेक को ट्रैक पर ले गया था, तब शुरुआती वक्त के तो वीडियो उपलब्ध हैं, लेकिन असल में उसके पहले और बाद के वीडियो नहीं है। ऐसे में यदि गाइड और उसके परिवार से पूछताछ हो तो कुछ सुराग मिलने की संभावना है। इसके अलावा उनकी मांग है कि स्थानीय पुलिस स्थानीय टूरिस्ट गाइडों की जांच करें।
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अब छोटी-छोटी गुफाओं में एनडीआरएफ और उत्तराखंड पुलिस करेगी जांच
-पुलिस को मिली अनुमति, 12 दिन बाद भी कोई नहीं मिला कोई सुराग
-पिंडारी ग्लेशियर ट्रैक के दौरान लापता नोएडा के सॉफ्टवेयर इंजीनियर की तलाश में पुलिस
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। पिंडारी ग्लेशियर ट्रैक के दौरान लापता हुए नोएडा के सॉफ्टवेयर इंजीनियर अभिषेक चौहान (28) का 12 दिन बाद भी कोई सुराग नहीं लग सका है। अब पुलिस एनडीआरएफ के साथ छोटी गुफाओं-लकड़ी से तैयार हट में खोजबीन करेगी। इसके लिए पुलिस को गुफाओं में तलाश करने का ऑर्डर मिल चुका है। अभिषेक की बड़ी बहन पूनम चौहान ने बताया कि बेटे की तलाश में खुद उनके पिता और बीएसएफ इंस्पेक्टर रघुराज चौहान अपने परिवार के साथ खुद उत्तराखंड पहुंचकर पुलिस और राहत टीमों के साथ लगातार सर्च अभियान में जुटे हैं।
अभिषेक 28 मई को ट्रैकिंग के लिए उत्तराखंड गए थे। परिवार के मुताबिक उन्हें 30 मई तक नोएडा लौटना था और अगले दिन कार्यालय में काम पर भी जाना था, लेकिन वह वापस नहीं आए। इसके बाद परिजनों ने उनकी तलाश शुरू कराई। पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की ओर से कई दिनों तक सर्च ऑपरेशन चलाया गया। डॉग स्क्वाड की भी मदद ली गई, लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिली है। इस बीच अभिषेक के पिता रघुराज चौहान ने स्थानीय पुलिस को लिखित शिकायत देकर उस व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है, जो व्यक्ति ट्रैक के दौरान उनके बेटे के साथ मौजूद था। परिवार का आरोप है कि उस व्यक्ति के बयानों में विरोधाभास है और यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि अभिषेक को दुर्गम पहाड़ी रास्ते पर अकेला क्यों छोड़ दिया गया। परिजनों ने कहा कि पुलिस से मांग की है कि वह कैमरे की फॉरेंसिंक जांच करें। उन्हें संदेह है कि कैमरें में लगी मेमोरी कार्ड से वीडियो एडिट किए गए हैं। ऐसे में यदि ऐसा पाया जाता है तो वीडियो एडिट करने वाले व्यक्ति की पहचान हो सकती है। परिजनों का कहना है कि खादी गांव से ट्रैकिंग की शुरूआत होती है। गाइड भी स्थानीय है। ऐसे में यदि खादी गांव के आस पास इलाके की जांच हो तो कुछ सुराग लग सकता है।
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गाइड के परिवार से भी हो पूछताछ
परिजनों ने मांग की है कि गाइड के परिवार से भी पूछताछ हो, क्योंकि जब गाइड ने शुरुआती वक्त में अभिषेक को ट्रैक पर ले गया था, तब शुरुआती वक्त के तो वीडियो उपलब्ध हैं, लेकिन असल में उसके पहले और बाद के वीडियो नहीं है। ऐसे में यदि गाइड और उसके परिवार से पूछताछ हो तो कुछ सुराग मिलने की संभावना है। इसके अलावा उनकी मांग है कि स्थानीय पुलिस स्थानीय टूरिस्ट गाइडों की जांच करें।
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