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अब नए उद्योगों में सिर्फ पीएनजी से चलेंगे बॉयलर
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औद्योगिक क्षेत्र में लगने वाला बॉयलर।
- फोटो : Grnoida
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ग्रेटर नोएडा (नवीन कुमार)। गौतमबुद्ध नगर में लगने वाले नए उद्योगों में अब केवल पीएनजी बॉयलर का ही इस्तेमाल हो सकेगा। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने इस संबंध में सर्कुलर जारी कर दिया है। इसमें साफ कर दिया गया है कि अब डीजल, लकड़ी या कोयला के बॉयलर का इस्तेमाल नहीं होगा।
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में हजारों की संख्या में उद्योग हैं। काफी उद्योगों में बॉयलर का प्रयोग होता है जो कोयला, डीजल, लकड़ी समेत अन्य ईंधन से चलते हैं। इस कारण वायु व जल प्रदूषण काफी होता है। विभाग के अफसरों का कहना है कि अब केवल पीएनजी का बॉयलर प्रयोग करने की एनओसी दी जाएगी। पुराने उद्योगों में डीजल, कोयला, लकड़ी आदि के बॉयलर का इस्तेमाल हो रहा है। इन पर जल्द ही शासन से दिशा-निर्देश जारी होंगे। नोएडा में एक और ग्रेटर नोएडा में 29 उद्योग कोयले से चल रहे हैं। वहीं डीजल व लकड़ी के बॉयलर का प्रयोग काफी उद्योगों में हो रहा है।
अन्य ईंधन से सस्ता है पीएनजी
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) ग्रेनो चैप्टर के उपाध्यक्ष जेएड रहमान का कहना है कि डीजल, कोयले समेत अन्य ईंधन के मुकाबले बॉयलर में पीएनजी का इस्तेमाल काफी सस्ता पड़ता है। केवल इसे लगाने में खर्च अधिक आता है। इससे बचने के लिए उद्यमी इस्तेमाल नहीं करते हैं, लेकिन पर्यावरण के लिए यह जरूरी है। आईआईए भी उद्यमियों को जागरूक करेगा। पुराने उद्योगों में भी डीजल, कोयले, लकड़ी आदि के बॉयलर का इस्तेमाल बंद होना चाहिए।
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नए उद्योगों में केवल पीएनजी बॉयलर का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाएगी। यह नियम फरवरी से लागू हो गया है। पुराने उद्योगों पर दिशानिर्देश आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
- प्रवीण कुमार, क्षेत्राधिकारी नोएडा यूपीपीसीबी
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नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में हजारों की संख्या में उद्योग हैं। काफी उद्योगों में बॉयलर का प्रयोग होता है जो कोयला, डीजल, लकड़ी समेत अन्य ईंधन से चलते हैं। इस कारण वायु व जल प्रदूषण काफी होता है। विभाग के अफसरों का कहना है कि अब केवल पीएनजी का बॉयलर प्रयोग करने की एनओसी दी जाएगी। पुराने उद्योगों में डीजल, कोयला, लकड़ी आदि के बॉयलर का इस्तेमाल हो रहा है। इन पर जल्द ही शासन से दिशा-निर्देश जारी होंगे। नोएडा में एक और ग्रेटर नोएडा में 29 उद्योग कोयले से चल रहे हैं। वहीं डीजल व लकड़ी के बॉयलर का प्रयोग काफी उद्योगों में हो रहा है।
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अन्य ईंधन से सस्ता है पीएनजी
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) ग्रेनो चैप्टर के उपाध्यक्ष जेएड रहमान का कहना है कि डीजल, कोयले समेत अन्य ईंधन के मुकाबले बॉयलर में पीएनजी का इस्तेमाल काफी सस्ता पड़ता है। केवल इसे लगाने में खर्च अधिक आता है। इससे बचने के लिए उद्यमी इस्तेमाल नहीं करते हैं, लेकिन पर्यावरण के लिए यह जरूरी है। आईआईए भी उद्यमियों को जागरूक करेगा। पुराने उद्योगों में भी डीजल, कोयले, लकड़ी आदि के बॉयलर का इस्तेमाल बंद होना चाहिए।
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नए उद्योगों में केवल पीएनजी बॉयलर का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाएगी। यह नियम फरवरी से लागू हो गया है। पुराने उद्योगों पर दिशानिर्देश आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
- प्रवीण कुमार, क्षेत्राधिकारी नोएडा यूपीपीसीबी