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Noida News: रुपये-दिरहम में व्यापार से नोएडा के निर्यातकों को होगा लाभ
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फोटो
-यूएई को होने वाले निर्यात में स्थानीय मुद्रा से भुगतान की तैयारी, एनएसईजेड के निर्यात में 35 फीसदी हिस्सा यूएई का-भारत-यूएई के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार को बढ़ावा देने पर बनी सहमति, एनएसईजेड से यूएई प्रमुख निर्यात बाजारों में है शामिल
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच रुपये और दिरहम में व्यापार को बढ़ावा देने की तैयारी है। दोनों देशों ने स्थानीय मुद्रा में व्यापार निपटान, भुगतान और मैसेजिंग प्रणालियों को बढ़ावा देने तथा केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी से जुड़ी पहलों को समयबद्ध तरीके से लागू करने पर सहमति जताई है। इससे यूएई को बड़े पैमाने पर निर्यात करने वाले नोएडा के कारोबारियों को फायदा मिल सकता है।
एनईए अध्यक्ष विपिन मल्हन ने बताया कि मुंबई में हुई भारत-यूएई हाई लेवल ज्वाइंट टास्क फोर्स की 14वीं बैठक में दोनों देशों ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य दोहराया। 2025-26 में दोनों देशों के बीच व्यापार 101.25 अरब डॉलर रहा। फेज-2 स्थित एनएसईजेड की 263 कंपनियों ने अप्रैल से जुलाई के बीच करीब 13 हजार करोड़ रुपये का निर्यात किया, जिसमें करीब 35 फीसदी हिस्सा यूएई का रहा। यूएई को मुख्य रूप से हीरा, सोने और चांदी के आभूषण निर्यात किए जा रहे हैं।
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डॉलर के बजाय रुपये-दिरहम से क्या बदलेगा
जिला उद्योग केंद्र के उद्योग उपायुक्त पंकज निर्वाण के अनुसार, रुपये-दिरहम में सीधे भुगतान होने से मुद्रा बदलने की प्रक्रिया, समय और कुछ लेनदेन लागत कम हो सकती है। इससे यूएई के साथ कारोबार करने वाले नोएडा के निर्यातकों के लिए भुगतान प्रक्रिया आसान होने की संभावना है। 2023 में भारत और यूएई के केंद्रीय बैंकों ने स्थानीय मुद्राओं में सीमा-पार लेनदेन और भुगतान प्रणालियों को जोड़ने के लिए समझौते किए थे।
सरकार रुपये-दिरहम में यूएई से व्यापारिक लेनदेन को लेकर आगे बढ़ रही है। इससे अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम हो सकती है और भुगतान प्रक्रिया आसान होगी। इसका नोएडा के निर्यातकों को सीधा लाभ मिल सकता है। -पंकज निर्वाण, जिला उद्योग उपायुक्त, गौतमबुद्ध नगर
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-यूएई को होने वाले निर्यात में स्थानीय मुद्रा से भुगतान की तैयारी, एनएसईजेड के निर्यात में 35 फीसदी हिस्सा यूएई का-भारत-यूएई के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार को बढ़ावा देने पर बनी सहमति, एनएसईजेड से यूएई प्रमुख निर्यात बाजारों में है शामिल
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच रुपये और दिरहम में व्यापार को बढ़ावा देने की तैयारी है। दोनों देशों ने स्थानीय मुद्रा में व्यापार निपटान, भुगतान और मैसेजिंग प्रणालियों को बढ़ावा देने तथा केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी से जुड़ी पहलों को समयबद्ध तरीके से लागू करने पर सहमति जताई है। इससे यूएई को बड़े पैमाने पर निर्यात करने वाले नोएडा के कारोबारियों को फायदा मिल सकता है।
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एनईए अध्यक्ष विपिन मल्हन ने बताया कि मुंबई में हुई भारत-यूएई हाई लेवल ज्वाइंट टास्क फोर्स की 14वीं बैठक में दोनों देशों ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य दोहराया। 2025-26 में दोनों देशों के बीच व्यापार 101.25 अरब डॉलर रहा। फेज-2 स्थित एनएसईजेड की 263 कंपनियों ने अप्रैल से जुलाई के बीच करीब 13 हजार करोड़ रुपये का निर्यात किया, जिसमें करीब 35 फीसदी हिस्सा यूएई का रहा। यूएई को मुख्य रूप से हीरा, सोने और चांदी के आभूषण निर्यात किए जा रहे हैं।
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डॉलर के बजाय रुपये-दिरहम से क्या बदलेगा
जिला उद्योग केंद्र के उद्योग उपायुक्त पंकज निर्वाण के अनुसार, रुपये-दिरहम में सीधे भुगतान होने से मुद्रा बदलने की प्रक्रिया, समय और कुछ लेनदेन लागत कम हो सकती है। इससे यूएई के साथ कारोबार करने वाले नोएडा के निर्यातकों के लिए भुगतान प्रक्रिया आसान होने की संभावना है। 2023 में भारत और यूएई के केंद्रीय बैंकों ने स्थानीय मुद्राओं में सीमा-पार लेनदेन और भुगतान प्रणालियों को जोड़ने के लिए समझौते किए थे।
सरकार रुपये-दिरहम में यूएई से व्यापारिक लेनदेन को लेकर आगे बढ़ रही है। इससे अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम हो सकती है और भुगतान प्रक्रिया आसान होगी। इसका नोएडा के निर्यातकों को सीधा लाभ मिल सकता है। -पंकज निर्वाण, जिला उद्योग उपायुक्त, गौतमबुद्ध नगर