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नहीं गूंजेगा डीजे का शोर, बैंड-बाजे की धुन पर थिरकेंगे बराती
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नहीं गूंजेगा डीजे का शोर, बैंड-बाजे की धुन पर थिरकेंगे बराती
ग्रेटर नोएडा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों और ध्वनि प्रदूषण के मद्देनजर डीजे की अनुमति देने पर रोक लगा दी थी। अब, जिला प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेश का सख्ती से पालन कराने और इसकी अवमानना करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इससे लोगों को आगामी वैवाहिक सीजन में डीजे के कान फोड़ शोर से मुक्ति मिलेगी। बराती बैंड बाजे व ढोल की धुन पर थिरकते दिखाई देंगे। बारात घरों के संचालकों को सचेत करने की जिम्मेदारी संबंधित एसडीएम और स्थानीय पुलिस को सौंपी गई है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद डीजे संचालकों ने प्रदर्शन आदि भी किया था, लेकिन जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जिले में डीजे नहीं बजने दिया जाएगा। हाल ही में हुई कानून व्यवस्था को लेकर हुई बैठक में जिलाधिकारी बीएन सिंह ने पुलिस अधिकारियों को हाईकोर्ट के आदेश का सख्ती से पालन कराने का निर्देश दिया है। बैठक में कहा गया कि नगर मजिस्ट्रेट, उपजिलाधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में आरडब्ल्यूए एवं बरात घर आदि का संचालन करने वाले लोगों को इन नियमों से अवगत कराएंगे। वैवाहिक आयोजन के दौरान यदि किसी स्थान पर तेज आवाज में डीजे बजने की सूचना मिलती है, तो पुलिस-प्रशासन तत्काल कार्रवाई करेंगे।
पांच साल तक की सजा और एक लाख तक जुर्माना
हाईकोर्ट ने आदेश में कहा था कि ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण कानून का उल्लंघन नागरिकों के मूल अधिकारों का उल्लंघन है। कोर्ट ने शहरी, रिहायशी, व्यवसायिक आदि इलाकों को साइलेंस जोन में श्रेणीबद्ध करने और टोल फ्री नंबर जारी करने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने कहा था कि कि ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण कानून के अंतर्गत डीजे बजाने पर एफआईआर दर्ज की जाए। कानून के उल्लंघन पर पांच साल तक की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
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ग्रेटर नोएडा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों और ध्वनि प्रदूषण के मद्देनजर डीजे की अनुमति देने पर रोक लगा दी थी। अब, जिला प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेश का सख्ती से पालन कराने और इसकी अवमानना करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इससे लोगों को आगामी वैवाहिक सीजन में डीजे के कान फोड़ शोर से मुक्ति मिलेगी। बराती बैंड बाजे व ढोल की धुन पर थिरकते दिखाई देंगे। बारात घरों के संचालकों को सचेत करने की जिम्मेदारी संबंधित एसडीएम और स्थानीय पुलिस को सौंपी गई है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद डीजे संचालकों ने प्रदर्शन आदि भी किया था, लेकिन जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जिले में डीजे नहीं बजने दिया जाएगा। हाल ही में हुई कानून व्यवस्था को लेकर हुई बैठक में जिलाधिकारी बीएन सिंह ने पुलिस अधिकारियों को हाईकोर्ट के आदेश का सख्ती से पालन कराने का निर्देश दिया है। बैठक में कहा गया कि नगर मजिस्ट्रेट, उपजिलाधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में आरडब्ल्यूए एवं बरात घर आदि का संचालन करने वाले लोगों को इन नियमों से अवगत कराएंगे। वैवाहिक आयोजन के दौरान यदि किसी स्थान पर तेज आवाज में डीजे बजने की सूचना मिलती है, तो पुलिस-प्रशासन तत्काल कार्रवाई करेंगे।
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पांच साल तक की सजा और एक लाख तक जुर्माना
हाईकोर्ट ने आदेश में कहा था कि ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण कानून का उल्लंघन नागरिकों के मूल अधिकारों का उल्लंघन है। कोर्ट ने शहरी, रिहायशी, व्यवसायिक आदि इलाकों को साइलेंस जोन में श्रेणीबद्ध करने और टोल फ्री नंबर जारी करने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने कहा था कि कि ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण कानून के अंतर्गत डीजे बजाने पर एफआईआर दर्ज की जाए। कानून के उल्लंघन पर पांच साल तक की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
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