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अब कोरोना के गंभीर मरीजों को दिया जा सकेगा प्लाज्मा
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अब प्लाज्मा चढ़ाने के लिए आईसीएमआर से अनुमति की जरूरत नहीं
ग्रेटर नोएडा। अब जिम्स या अन्य अस्पतालों में कोरोना संक्रमित मरीजों को डॉक्टर यदि जरूरी समझेंगे तो प्लाज्मा दे सकते हैं। ट्रायल के सकारात्मक परिणाम के बाद अब इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) से अनुमति लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कोरोना काल में आईसीएमआर की ओर से लगातार प्लाज्मा को लेकर ट्रायल चल रहे थे। शुरुआत में सिर्फ जिम्स में ही मरीजों पर प्लाज्मा का ट्रायल किया जा रहा था। यहां 30 मरीजों पर ट्रायल किया जा चुका है। वहीं, जिम्स से भेजे गए प्लाज्मा पर कैलाश, जेपी, फोर्टिस समेत दिल्ली के अस्पतालों में भी ट्रायल किया गया। इस दौरान मरीजों की स्थिति की जानकारी आईसीएमआर को भेजी जाती थी। अनुमति मिलने के बाद ही डॉक्टर मरीजों का प्लाज्मा देते थे। अब ट्रायल का समय पूरा होने और सकारात्मक परिणाम आने के बाद कोविड अस्पतालों में प्लाज्मा देने के लिए अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।
जिम्स में आईसीएमआर की अनुमति से कोरोना मरीजों का उपचार चल रहा है। ठीक हुए मरीजों का प्लाज्मा देने के लिए पहले आईसीएमआर से अनुमति लेनी पड़ती थी। अब ट्रायल पूरा होने के बाद इसकी आवश्यकता नहीं पड़ेगी। अब हम गंभीर मरीजों को जरूरत के हिसाब से प्लाज्मा दे सकते हैं।
डॉ. सौरभ श्रीवास्तव, कोविड प्रभारी जिम्स
प्लाज्मा दान करने को आगे आ रहे लोग
एक नामी कंपनी के अधिकारी और नोएडा सेक्टर-100 निवासी हरीश कुंते (37) ने प्लाज्मा दान किया है। उन्होंने ठीक हो चुके लोगों से अपील की है कि वह भी प्लाज्मा दान करें, ताकि जरूरतमंदों का इलाज हो सके। उन्होंने बताया कि कोरोना पॉजिटिव होने पर शारदा अस्पताल में उनका उपचार हुआ। उन्होंने देखा कि आर्थिक रूप से कमजोर कुछ गंभीर मरीजों को प्लाज्मा की जरूरत थी। इससे उन्हें प्लाज्मा दान करने का विचार आया। एक अग्निशमन उपकरण की कंपनी के एचआर प्रमुख अश्वनी ने भी प्लाज्मा दान किया है। प्रवक्ता डॉक्टर अजित कुमार ने बताया कि अब तक 3 लोग प्लाज्मा दान कर चुके हैं।
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ग्रेटर नोएडा। अब जिम्स या अन्य अस्पतालों में कोरोना संक्रमित मरीजों को डॉक्टर यदि जरूरी समझेंगे तो प्लाज्मा दे सकते हैं। ट्रायल के सकारात्मक परिणाम के बाद अब इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) से अनुमति लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कोरोना काल में आईसीएमआर की ओर से लगातार प्लाज्मा को लेकर ट्रायल चल रहे थे। शुरुआत में सिर्फ जिम्स में ही मरीजों पर प्लाज्मा का ट्रायल किया जा रहा था। यहां 30 मरीजों पर ट्रायल किया जा चुका है। वहीं, जिम्स से भेजे गए प्लाज्मा पर कैलाश, जेपी, फोर्टिस समेत दिल्ली के अस्पतालों में भी ट्रायल किया गया। इस दौरान मरीजों की स्थिति की जानकारी आईसीएमआर को भेजी जाती थी। अनुमति मिलने के बाद ही डॉक्टर मरीजों का प्लाज्मा देते थे। अब ट्रायल का समय पूरा होने और सकारात्मक परिणाम आने के बाद कोविड अस्पतालों में प्लाज्मा देने के लिए अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।
जिम्स में आईसीएमआर की अनुमति से कोरोना मरीजों का उपचार चल रहा है। ठीक हुए मरीजों का प्लाज्मा देने के लिए पहले आईसीएमआर से अनुमति लेनी पड़ती थी। अब ट्रायल पूरा होने के बाद इसकी आवश्यकता नहीं पड़ेगी। अब हम गंभीर मरीजों को जरूरत के हिसाब से प्लाज्मा दे सकते हैं।
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डॉ. सौरभ श्रीवास्तव, कोविड प्रभारी जिम्स
प्लाज्मा दान करने को आगे आ रहे लोग
एक नामी कंपनी के अधिकारी और नोएडा सेक्टर-100 निवासी हरीश कुंते (37) ने प्लाज्मा दान किया है। उन्होंने ठीक हो चुके लोगों से अपील की है कि वह भी प्लाज्मा दान करें, ताकि जरूरतमंदों का इलाज हो सके। उन्होंने बताया कि कोरोना पॉजिटिव होने पर शारदा अस्पताल में उनका उपचार हुआ। उन्होंने देखा कि आर्थिक रूप से कमजोर कुछ गंभीर मरीजों को प्लाज्मा की जरूरत थी। इससे उन्हें प्लाज्मा दान करने का विचार आया। एक अग्निशमन उपकरण की कंपनी के एचआर प्रमुख अश्वनी ने भी प्लाज्मा दान किया है। प्रवक्ता डॉक्टर अजित कुमार ने बताया कि अब तक 3 लोग प्लाज्मा दान कर चुके हैं।
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