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2030 तक क्षरण न रुका तो भारत में नहीं बचेगी उपयोग लायक भूमि

Wed, 04 Sep 2019 01:39 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 04 Sep 2019 01:39 AM IST
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no land will be left if land degradation target is not achieved in india
ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 14वें गलोबल कंवेंशन में लोगों को संबोधित करते व? - फोटो : Grnoida
2030 तक क्षरण नहीं रुका तो भारत में नहीं बचेगी उपयोग लायक भूमि
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ग्रेटर नोएडा। भूमि का क्षरण नहीं रुका तो भारत में लोगों के लिए उपयोग लायक जमीन कम पड़ जाएगी। इसके लिए लगातार बढ़ती जनसंख्या सबसे अधिक जिम्मेदार है। भारत में भूमि क्षरण पर रोकथाम लगाने के लिए 2030 तक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यदि हमें भविष्य में आने वाले संकट से बचना है तो इतने ही समय में इस पर रोक लगाना अति आवश्यक है। यह राय नॉलेज पार्क स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मॉर्ट में 14वें ग्लोबल कंवेशन के तहत चल रहे मरुस्थलीकरण प्रतिरोध सम्मेलन में पर्यावरण विशेषज्ञों ने रखी।
विशेषज्ञों ने कहा यही समय है कि भूमि का क्षरण रोकने की उचित व्यवस्था बनाई जाए। विज्ञान और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के उपनिदेशक चंद्र भूषण का कहना है कि देश में भूमि क्षरण रोकने के लिए हमने लक्ष्य तय कर दिए हैं। अब जरूरत उसको प्राप्त करने की है। हम भूमि के साथ-साथ पीने योग्य पानी भी खोते जा रहे हैं। वहीं, योजनाओं के लिए बहुत अधिक धन की आवश्यकता है। ऐसे में निष्पक्षता से हम इस दिशा में प्रयास नहीं करेंगे तो उपयोग योग्य भूमि खत्म हो जाएगी। दिल्ली विवि के प्रोफेसर सीआर बाबू का कहना है कि विभिन्न स्थानों पर भूमि के छोटे-छोटे टुकड़ों को उपयोग में लाने की आवश्यकता है। वनों के कटने, मिट्टी का कटाव, जलवायु परिवर्तन और खनन आदि कारणों से भूमि का तेजी से क्षरण हो रहा है। इसे विशेष तरह के पौधे लगाकर रोका जा सकता है। इसी विधि से कोयला खदान वाली भूमि को भी एक घने जंगल में तब्दील किया जा सकता है। बताया कि हमने 250 हेक्टेयर भूमि को इसी विधि से उपयोग लायक बनाया है।
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कार्बन उत्सर्जन में दर्ज की गई 17 फीसदी बढ़ोतरी
उपनिदेशक चंद्रभूषण का कहना है कि वनों की कटाई और भूमि क्षरण से विश्वभर में लगभग 17 फीसदी कार्बन उत्सर्जन में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो वैश्विक परिवहन सेक्टर से भी अधिक है। प्रत्येक वर्ष विश्व भर में 240 से लेकर 440 करोड़ टन तक कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन जंगलों के कटने के कारण होता है। जबकि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन से बचने के लिए कार्बन उत्सर्जन में कमी आनी चाहिए। उन्होंने बताया कि मिट्टी में कार्बन की मात्रा अधिक है। उन्होंने बताया कि वन और पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने दावा किया है कि वर्ष 2030 तक भारत करीब 50 लाख हेक्टेयर भूमि को उर्वरक बनाएगा। सम्मेलन में 195 देशों के करीब आठ हजार प्रतिनिधि शामिल हुए हैं।
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