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प्रदर्शन करवाने और उसमें शामिल होने के अलावा नहीं हैं कोई आरोप

Tue, 15 Jun 2021 11:49 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 15 Jun 2021 11:49 PM IST
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no allegation except being part of protest against CAA
हाईकोर्ट ने नरवाल व कलिता के विषय में कहा कि उनकी शैक्षिक पृष्ठभूमि, प्रोफाइल व पोजीशन के देखते हुए ऐसी आशंका का कोई कारण नहीं है कि वे देश छोड़कर चली जाएंगी, साक्ष्यों को नष्ट करेंगी या किसी गवाह को धमकाएंगी या किसी भी तरह मुकदमे की सुनवाई को प्रभावित करेंगी।
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खंडपीठ ने नरवाल के बारे में कहा कि जब उत्तर पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में हिंसा और दंगे हो रहे थे तब सीएए व एनआरसी के विरोध प्रदर्शन आयोजन करवाने में शामिल होने के अलावा उसके खिलाफ कोई आरोप नहीं है। हमारी राय में आरोपपत्र और उसमें दी गई सामग्री के अनुसार भी वह आरोप नहीं बनते जो लगाए गए हैं। सरकार मुद्दों को उलझाकर किसी को जमानत देने को विफल नहीं कर सकती।
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खंडपीठ ने कहा कि भड़काऊ भाषण देने, चक्का जाम करवाने, महिलाओं को धरने के लिए उकसाने तथा वहां सामान जमा करने तथा अन्य आरोप केवल इस बात का साक्ष्य हैं कि वह धरना आयोजन में शामिल थी लेकिन ऐसा कोई आरोप नहीं है कि उसने हिंसा भड़काई, या आतंकी कृत्य किया या इसकी साजिश की।
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कोर्ट ने कलिता के बारे में कहा
वहीं कलिता के बारे में खंडपीठ ने गौर किया कि उसने महिला अधिकार संगठन या अन्य समूह की सदस्य होने के नाते उसने सीएए और एनआरसी के विरोध में धरना प्रदर्शन करवाने में सहायता की और उसमें शामिल हुई। शांतिपूर्ण और बिना हथियार प्रदर्शन का मौलिक अधिकार यकीनन प्रतिबंधित नहीं है और उसे यूएपीए के तहत परिभाषित आतंकी कृत्य की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता जब तक उसके लिए जरूरी तत्व संबंधित आरोपों में हों।

खंडपीठ ने कहा कि भड़काऊ भाषण देना या चक्का जाम करना उस समय असामान्य बात नहीं है जब सरकार व संसद के कार्यों का व्यापक स्तर पर विरोध हो रहा हो। अगर हम मान भी लें कि भड़काऊ भाषण, चक्का जाम, महिलाओं को प्रदर्शन के लिए उकसाना और अन्य कार्य जिनका कलिता पर आरोप हैं, अगर संविधान में दिए गए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की सीमा का उल्लंघन करते हैं, तब भी आतंकी कृत्य, उसकी साजिश या उसकी तैयारी के दायरे में नहीं कहे जाएंगे। - एजेंसी
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