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Noida News: मुंडका में तालाबों को बचाने के लिए एनजीटी ने लगाई फटकार
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डीडीए और डीएसआईआईडीसी को छह हफ्ते में पुनर्जीवन की विस्तृत कार्ययोजना देनी होगी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एनजीटी ने मुंडका में प्राचीन जलाशयों के संरक्षण और पुनर्जीवन के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और दिल्ली राज्य औद्योगिक व आधारभूत संरचना विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) को छह हफ्ते में तालाबों के पुनर्जीवन की विस्तृत कार्ययोजना जमा करने का आदेश दिया है।
अदालत ने पश्चिमी दिल्ली के जिलाधिकारी और डीडीए को 15 दिनों में सभी संबंधित जलाशयों का सीमांकन पूरा करने व अतिक्रमण की पहचान कर रिपोर्ट देने को कहा है। साथ ही, दिल्ली राज्य नमभूमि प्राधिकरण को भी छह हफ्ते में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी। अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि नमभूमि प्राधिकरण ने अनुपालन की निगरानी नहीं की और न ही गैर-अनुपालन करने वाली एजेंसियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की। अदालत ने दोहराया कि जलाशयों में स्थायी निर्माण, अतिक्रमण, कचरा डालना, अनुपचारित सीवेज का प्रवाह और औद्योगिक विस्तार पूरी तरह प्रतिबंधित है।
मामले में आवेदक ने खसरा नंबर 178/1, 373/1, 142, 163 और 17/27 में जलाशयों से अतिक्रमण हटाने और उनके पुनर्जीवन की मांग की थी। इनमें से खसरा नंबर 17/27 की 4 बीघा से अधिक तालाब की जमीन वर्ष 2007 में ही डीएसआईआईडीसी को इन तालाबों की पहले जैसे स्थिति में आवंटित कर दी गई थी। डीएसआईआईडीसी ने स्थिति रिपोर्ट में बताया कि इस जमीन पर अभी तक कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ है और तालाब पूरी तरह सुरक्षित हैं। कोई अतिक्रमण भी नहीं है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में इस भूमि पर व्यावसायिक विकास की अनुमति दी थी लेकिन अभी तक कोई काम शुरू नहीं हुआ है। निगम ने दावा किया कि भावी विकास योजना में तालाब के सुधार को शामिल किया गया है। एनजीटी ने पहले ही वेटलैंड्स कंजर्वेशन एंड मैनेजमेंट रूल्स 2017 के तहत सभी जलाशयों की सुरक्षा, जियो-टैगिंग, सफाई, बायो-रिमेडिएशन, किनारों की सुरक्षा व पुनर्जीवन के स्पष्ट निर्देश दिए थे।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एनजीटी ने मुंडका में प्राचीन जलाशयों के संरक्षण और पुनर्जीवन के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और दिल्ली राज्य औद्योगिक व आधारभूत संरचना विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) को छह हफ्ते में तालाबों के पुनर्जीवन की विस्तृत कार्ययोजना जमा करने का आदेश दिया है।
अदालत ने पश्चिमी दिल्ली के जिलाधिकारी और डीडीए को 15 दिनों में सभी संबंधित जलाशयों का सीमांकन पूरा करने व अतिक्रमण की पहचान कर रिपोर्ट देने को कहा है। साथ ही, दिल्ली राज्य नमभूमि प्राधिकरण को भी छह हफ्ते में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी। अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि नमभूमि प्राधिकरण ने अनुपालन की निगरानी नहीं की और न ही गैर-अनुपालन करने वाली एजेंसियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की। अदालत ने दोहराया कि जलाशयों में स्थायी निर्माण, अतिक्रमण, कचरा डालना, अनुपचारित सीवेज का प्रवाह और औद्योगिक विस्तार पूरी तरह प्रतिबंधित है।
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मामले में आवेदक ने खसरा नंबर 178/1, 373/1, 142, 163 और 17/27 में जलाशयों से अतिक्रमण हटाने और उनके पुनर्जीवन की मांग की थी। इनमें से खसरा नंबर 17/27 की 4 बीघा से अधिक तालाब की जमीन वर्ष 2007 में ही डीएसआईआईडीसी को इन तालाबों की पहले जैसे स्थिति में आवंटित कर दी गई थी। डीएसआईआईडीसी ने स्थिति रिपोर्ट में बताया कि इस जमीन पर अभी तक कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ है और तालाब पूरी तरह सुरक्षित हैं। कोई अतिक्रमण भी नहीं है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में इस भूमि पर व्यावसायिक विकास की अनुमति दी थी लेकिन अभी तक कोई काम शुरू नहीं हुआ है। निगम ने दावा किया कि भावी विकास योजना में तालाब के सुधार को शामिल किया गया है। एनजीटी ने पहले ही वेटलैंड्स कंजर्वेशन एंड मैनेजमेंट रूल्स 2017 के तहत सभी जलाशयों की सुरक्षा, जियो-टैगिंग, सफाई, बायो-रिमेडिएशन, किनारों की सुरक्षा व पुनर्जीवन के स्पष्ट निर्देश दिए थे।
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