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Noida News: गाजीपुर लैंडफिल साइट पर कूड़े में आग पर खफा एनजीटी, मांगी रिपोर्ट

Sun, 05 May 2024 08:16 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 05 May 2024 08:16 PM IST
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NGT angry over garbage fire at Ghazipur landfill site, seeks report
गाजीपुर लैंडफिल साइट पर कूड़े में आग पर खफा एनजीटी, मांगी रिपोर्ट
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- सीपीसीबी, दिल्ली नगर निगम, डीएम पूर्वी दिल्ली, डीपीसीबी को नोटिस जारी
- 2022 में भी एनजीटी लगा चुका 900 करोड़ रुपये का हर्जाना

माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर मौजूद गाजीप़ुर लैंडफिल साइट पर 21 अप्रैल को लगी आग के बाद एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी), डीएम पूर्वी दिल्ली और दिल्ली नगर निगम को नोटिस जारी किया है। इन अधिकारियों से गाजीपुर लैंडफिल साइट पर प्रदूषण होने से रोकने के लिए हुई कार्रवाई पर जबाव देने को कहा गया है। वहीं गाजीपुर में लगातार कूड़े से प्रदूषण के मामले में अधिकारियों को हर्जाना का भी आकलन करने के लिए कहा गया है। 2022 में भी एनजीटी 900 करोड़ रुपये का हर्जाना इसी मामले में दिल्ली सरकार पर लगा चुकी है।
आग लगने की इस घटना पर स्वत: संज्ञान लेते हुए एनजीटी ने कहा है कि यह गंभीर मुद्दा है कि लोगों को प्रदूषण से मुश्किल हो रही है। एनजीटी के चेयरमैन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और सदस्य डॉ. ए सेंथिल वेल ने कहा है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दिल्ली नगर निगम सहित सभी अधिकारी पांच सप्ताह के भीतर जवाब दें। आदेश में कहा गया है कि पहले भी कूड़ा प्रबंधन में पर्यावरण को नुकसान यहां होता रहा है। करीब 10 हजार करोड़ रुपये कीमत की जमीन यहां कूड़े से अतिक्रमित की हुई। कूड़े की ऊंचाई इतनी हो चुकी है कि अब यह कुतुब मीनार से करीब आठ मीटर ही कम रह गया है। इस समस्या के लिए उपचारात्मक कदम नहीं उठाए जाने पर 2022 में दिल्ली सरकार पर 900 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय हर्जाना लगाया गया था। इस मामले में अगली सुनवाई अब छह अगस्त को होगी।
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एनजीटी का कहना है कि 2022 में अधिकारियों को कूड़े में आग लगने से रोकने के लिए कहा गया था। इसके बाद भी न्यूनतम मानकों का पालन भी नहीं किया गया है। एनजीटी के पूर्व आदेशों के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। लैंडफिल साइटों पर ऐसी आग की घटनाएं अभी भी हो रही हैं। डीपीसीसी के वकील ने कहा कि पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम में संशोधन के कारण समिति के पास पर्यावरणीय हर्जाना लगाने की शक्ति नहीं है। इस पर एनजीटी ने कहा कि इसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों या प्राधिकारी पर लगातार उल्लंघन पर पर्यावरणीय हर्जाना लगाने के मुद्दे की जांच करने और पांच सप्ताह के भीतर न्यायाधिकरण के समक्ष रिपोर्ट जमा करने के लिए सीपीसीबी को नोटिस जारी किया जाएं।
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