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चंडीगढ़ जैसा दिखेगा नया ग्रेटर नोएडा, चौड़ी सड़कें व हरियाली होगी ज्यादा

Mon, 12 Jul 2021 12:54 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 12 Jul 2021 12:54 AM IST
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New Greater Noida will look like Chandigarh, wider roads and more greenery
ग्रेटर नोएडा। ग्रेनो वेस्ट के बाद अब नए ग्रेटर नोएडा को बसाने की तरफ प्राधिकरण ने कदम बढ़ाए हैं। 30 हजार हेक्टेयर में बसने वाले इस नए शहर का प्लान चंडीगढ़ की तर्ज पर बनेगा। हरियाली और सड़कें चौड़ी रखने पर ज्यादा जोर होगा। ग्रेटर नोएडा में चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल नहीं हैं, लेकिन नए ग्रेटर नोएडा में सिग्नल होंगे, रोटरी (गोलचक्कर) नहीं बनेंगी। नए शहर में उद्योग ज्यादा लगेंगे, रिहायश व संस्थागत गतिविधि जरूरत के हिसाब से होंगे।
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ग्रेटर नोएडा फेज-2 (नया ग्रेटर नोएडा) का मास्टर प्लान 2041 बनना शुरू हो गया है। दूसरा चरण 30 हजार हेक्टेयर में विकसित होगा। इसके लिए 40 गांवों की जमीन खरीदी जाएगी। रुद्राभिषेक इंटरप्राइजेज लिमिटेड (आरईपीएल) कंपनी ने मास्टर प्लान पर काम शुरू कर दिया है। मास्टर प्लान को 8 चरणों में बनाया जाएगा। ग्रेटर नोएडा के फेज-2 में नई बस्ती, फूलपुर, आनंदपुर, खंदेड़ा, मिलक खंदेड़ा, जारचा, रानौली, खटाना, शाहपुर, छौलस, गेसूपुर, भराना आदि गांव शामिल हैं। इसके अलावा पिलखुवा व गुलावठी के नजदीक के गांव भी आएंगे। ग्रेनो फेज-2 का एरिया दिल्ली-हावड़ा ट्रैक के उस पार हापुड़ बॉर्डर तक और दूसरी ओर ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस की चारदीवारी तक होगा।
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नया ग्रेटर नोएडा वर्तमान शहर से बिल्कुल अलग होगा। वर्तमान शहर में चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल नहीं हैं। रोटरी पर अभी से ट्रैफिक जाम लगने लगे हैं। हादसे भी हो जाते हैं। आबादी बढ़ने के साथ ही यह दिक्कत और बढ़ेगी। इससे सबक लेते हुए नए शहर में ट्रैफिक सिग्नल रखने का प्लान है। वाहन ट्रैफिक सिग्नल पर आकर रुकेंगे, लेकिन जाम वाली स्थिति नहीं बनेगी। सबसे पहले ढांचागत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। उसके बाद जमीन का आवंटन होगा। वर्तमान शहर से भी ज्यादा चौड़ी सड़कें बनेंगी। हरियाली पर अधिक जोर रहेगा। मास्टर प्लान बनाने वाली कंपनी फेज-1 के मौजूदा ढांचे की समीक्षा कर रही है। नए शहर में सर्वाधिक जोर उद्योगों पर होगा। कोर एक्टिविटी उद्योग ही होंगे। रिहायश, व्यावसायिक व संस्थागत एक्टिविटी उसके हिसाब से रखी जाएंगी। वर्तमान ग्रेटर नोएडा, खासकर ग्रेनो वेस्ट में यह चूक हो गई है। रिहायश अधिक हो गई हैं, जबकि उद्योग कम लगे हैं। नए शहर में सामाजिक व सांस्कृतिक ताना-बाना बढ़ाने पर भी जोर रहेगा।
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डिजिटल और जीआईएस पर बनेगा मास्टर प्लान
मास्टर प्लान डिजिटल होगा। इसे जियोग्राफिक इनफॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) से बनाया जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि जमीन की वास्तविक स्थिति देखकर योजना बनेगी। कहां पर कितनी जमीन है, इसका सही आकलन हो सकेगा। रोड, सीवर लाइन, पानी की लाइन जैसी जरूरी सुविधाओं की सही मैपिंग हो सकेगी। अभी तक कागजों में उपलब्ध जमीन पर मास्टर प्लान बन जाता है। मौके पर जमीन की स्थिति बहुत कम शहर हैं, जिनका मास्टर प्लान जीआईएस के हिसाब से बने हैं।

मास्टर प्लान बनाने के लिए कंपनी ने काम शुरू कर दिया है। ग्रेनो फेज टू में औद्योगिक निवेश पर अधिक जोर रहेगा। हरियाली ज्यादा व सड़कें और चौड़ी होंगी। रोटरी के बजाय ट्रैफिक सिग्नल लगाने पर विचार हो रहा है। इसके लिए चंडीगढ़ की प्लानिंग का अध्ययन कराया जा सकता है। किसानों से जमीन लेने के लिए अधिग्रहण, सहमति व लैंडपूलिंग के विकल्प भी खुले हैं। - नरेंद्र भूषण, सीईओ, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण
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