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Noida News: हाथों की सफाई में लापरवाही, संक्रमण का खतरा बढ़ा
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चाइल्ड पीजीआई में हेपेटाइटिस-ए के संदिग्ध नमूनों में करीब 50 प्रतिशत पॉजिटिव
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। हाथ न धोने और अस्वच्छ खानपान से लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, हाथों की सफाई में लापरवाही और दूषित पानी-भोजन से संक्रमण का खतरा बढ़ता है। इससे हेपेटाइटिस-ए और पेट के गंभीर संक्रमण हो सकते हैं। जिला अस्पताल और चाइल्ड पीजीआई में ऐसे मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। चाइल्ड पीजीआई में जांच के लिए आए हेपेटाइटिस-ए के संदिग्ध नमूनों में करीब 50 प्रतिशत पॉजिटिव मिले हैं।
सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. सुमी नंदवानी ने बताया कि मानसून के बाद पानी की आपूर्ति में संदूषण बढ़ जाता है। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से भी संक्रमण का खतरा रहता है। खासकर मोमोज और अन्य खाद्य पदार्थ ठीक से पकाए या उबाले नहीं गए हों, तो संक्रमण फैल सकता है। खाना बनाने या परोसने वाला व्यक्ति हाथ ठीक से नहीं धोता, तो वायरस दूसरों के शरीर में पहुंच सकता है। हेपेटाइटिस-ए के मरीज सामान्यतः दो से तीन महीने में ठीक हो जाते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में यह संक्रमण गंभीर रूप भी ले सकता है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में रोज पहुंच रहे 10 से 15 मरीज
सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अनुराग सागर ने बताया कि हाथ न धोने से पेट दर्द, उल्टी, दस्त और हेपेटाइटिस-ए का खतरा बढ़ जाता है। बच्चे अक्सर मिट्टी या गंदगी में खेलने के बाद बिना हाथ धोए खाना खा लेते हैं। शौच के बाद हाथ ठीक से न धोना भी संक्रमण का प्रमुख कारण है। पेट संबंधी समस्याओं और दस्त की शिकायत लेकर रोजाना औसतन 10 से 15 मरीज उनकी ओपीडी में पहुंच रहे हैं। दूषित खानपान से होने वाले हेपेटाइटिस-ए में पीलिया, पेट दर्द, भूख न लगना और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
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सुमनक विधि से धोएं हाथ
निजी अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. प्रखर गर्ग ने बताया कि हाथों को साबुन और पानी से 20 से 30 सेकंड तक अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके लिए सुमनक विधि अपनाई जा सकती है। इसमें एस का मतलब सीधा, यू का उल्टा, एम का मुट्ठी, ए का अंगूठा, एन का नाखून और के का कलाई है। इस विधि से हाथों के सभी हिस्सों की सफाई करने में मदद मिलती है।
कब हाथ धोना जरूरी
- खाना खाने, बनाने और परोसने से पहले।
- शौच के तुरंत बाद।
- बाहर से आने या गंदी सतह छूने के बाद।
- बच्चों के मिट्टी या बाहर खेलने के बाद।
- मरीज की देखभाल, उसे छूने या उसकी ड्रेसिंग करने के बाद।
इन बातों का रखें ध्यान
- पानी की शुद्धता पर संदेह हो, तो उसे उबालकर ठंडा करने के बाद पिएं।
- खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों और अधपके भोजन से बचें।
- भोजन से पहले और शौच के बाद साबुन व साफ पानी से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोएं।
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। हाथ न धोने और अस्वच्छ खानपान से लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, हाथों की सफाई में लापरवाही और दूषित पानी-भोजन से संक्रमण का खतरा बढ़ता है। इससे हेपेटाइटिस-ए और पेट के गंभीर संक्रमण हो सकते हैं। जिला अस्पताल और चाइल्ड पीजीआई में ऐसे मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। चाइल्ड पीजीआई में जांच के लिए आए हेपेटाइटिस-ए के संदिग्ध नमूनों में करीब 50 प्रतिशत पॉजिटिव मिले हैं।
सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. सुमी नंदवानी ने बताया कि मानसून के बाद पानी की आपूर्ति में संदूषण बढ़ जाता है। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से भी संक्रमण का खतरा रहता है। खासकर मोमोज और अन्य खाद्य पदार्थ ठीक से पकाए या उबाले नहीं गए हों, तो संक्रमण फैल सकता है। खाना बनाने या परोसने वाला व्यक्ति हाथ ठीक से नहीं धोता, तो वायरस दूसरों के शरीर में पहुंच सकता है। हेपेटाइटिस-ए के मरीज सामान्यतः दो से तीन महीने में ठीक हो जाते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में यह संक्रमण गंभीर रूप भी ले सकता है।
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जिला अस्पताल की ओपीडी में रोज पहुंच रहे 10 से 15 मरीज
सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अनुराग सागर ने बताया कि हाथ न धोने से पेट दर्द, उल्टी, दस्त और हेपेटाइटिस-ए का खतरा बढ़ जाता है। बच्चे अक्सर मिट्टी या गंदगी में खेलने के बाद बिना हाथ धोए खाना खा लेते हैं। शौच के बाद हाथ ठीक से न धोना भी संक्रमण का प्रमुख कारण है। पेट संबंधी समस्याओं और दस्त की शिकायत लेकर रोजाना औसतन 10 से 15 मरीज उनकी ओपीडी में पहुंच रहे हैं। दूषित खानपान से होने वाले हेपेटाइटिस-ए में पीलिया, पेट दर्द, भूख न लगना और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
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सुमनक विधि से धोएं हाथ
निजी अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. प्रखर गर्ग ने बताया कि हाथों को साबुन और पानी से 20 से 30 सेकंड तक अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके लिए सुमनक विधि अपनाई जा सकती है। इसमें एस का मतलब सीधा, यू का उल्टा, एम का मुट्ठी, ए का अंगूठा, एन का नाखून और के का कलाई है। इस विधि से हाथों के सभी हिस्सों की सफाई करने में मदद मिलती है।
कब हाथ धोना जरूरी
- खाना खाने, बनाने और परोसने से पहले।
- शौच के तुरंत बाद।
- बाहर से आने या गंदी सतह छूने के बाद।
- बच्चों के मिट्टी या बाहर खेलने के बाद।
- मरीज की देखभाल, उसे छूने या उसकी ड्रेसिंग करने के बाद।
इन बातों का रखें ध्यान
- पानी की शुद्धता पर संदेह हो, तो उसे उबालकर ठंडा करने के बाद पिएं।
- खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों और अधपके भोजन से बचें।
- भोजन से पहले और शौच के बाद साबुन व साफ पानी से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोएं।