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Noida News: अंतरराष्ट्रीय क्लिनिकल ट्रायल दिवस पर जिम्स में राष्ट्रीय संवाद आयोजित
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देशभर के विशेषज्ञों ने क्लिनिकल रिसर्च व मेडटेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने पर किया मंथन
ग्रेटर नोएडा (संवाद)। जिम्स के सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन (सीएमआई) की ओर से राष्ट्रीय स्तर के संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अंतरराष्ट्रीय क्लिनिकल ट्रायल दिवस-2026 के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भारत सरकार के विभिन्न स्वास्थ्य, नवाचार व स्टार्टअप संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और शोधकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में क्लिनिकल रिसर्च इकोसिस्टम को मजबूत करना, मेडटेक एवं डिजिटल हेल्थ स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देना रहा।
साथ ही चिकित्सा संस्थानों, इन्क्यूबेटर्स, शोधकर्ताओं और उद्योग जगत के बीच सहयोग को बढ़ावा भी उद्देश्य में शामिल रहा। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र में सेंटर फॉर वन हेल्थ की प्रभारी एवं प्रमुख सिम्मी तिवारी रही। उन्होंने वन हेल्थ दृष्टिकोण, सहयोगात्मक क्लिनिकल रिसर्च और साक्ष्य आधारित नवाचार की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए। संवाद में बंगलूरू बायोइनोवेशन सेंटर के एमडी डॉ. आदिल, भारत-वियतनाम द्विपक्षीय नवाचार एवं रणनीतिक सहयोग विशेषज्ञ सोनिया दास, एसटीबीआई व डीएसटी गुजरात सरकार के निदेशक डॉ. एएन भादलकर, डीएसटी व एफआईएसटी के प्रोफेसर एवं प्रमुख डॉ. संदीप कुमार शुक्ला, एआईआईएमएस देवघर के फैकल्टी एवं इन्क्यूबेटर सेंटर प्रभारी डॉ. मनीष राज, कर्नाटक के जलप्पा फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन के सीईओ डॉ. आनंद तिरुनावुकरासु समेत कई विशेषज्ञों ने भाग लिया। सीएमआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं जिम्स ग्रेटर नोएडा की क्लिनिकल ट्रायल समिति के सदस्य डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि क्लिनिकल ट्रायल और ट्रांसलेशनल रिसर्च भारत में साक्ष्य आधारित स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। ऐसे सहयोगात्मक प्रयास नवाचार, नैतिक क्लिनिकल रिसर्च और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएंगे।
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ग्रेटर नोएडा (संवाद)। जिम्स के सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन (सीएमआई) की ओर से राष्ट्रीय स्तर के संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अंतरराष्ट्रीय क्लिनिकल ट्रायल दिवस-2026 के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भारत सरकार के विभिन्न स्वास्थ्य, नवाचार व स्टार्टअप संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और शोधकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में क्लिनिकल रिसर्च इकोसिस्टम को मजबूत करना, मेडटेक एवं डिजिटल हेल्थ स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देना रहा।
साथ ही चिकित्सा संस्थानों, इन्क्यूबेटर्स, शोधकर्ताओं और उद्योग जगत के बीच सहयोग को बढ़ावा भी उद्देश्य में शामिल रहा। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र में सेंटर फॉर वन हेल्थ की प्रभारी एवं प्रमुख सिम्मी तिवारी रही। उन्होंने वन हेल्थ दृष्टिकोण, सहयोगात्मक क्लिनिकल रिसर्च और साक्ष्य आधारित नवाचार की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए। संवाद में बंगलूरू बायोइनोवेशन सेंटर के एमडी डॉ. आदिल, भारत-वियतनाम द्विपक्षीय नवाचार एवं रणनीतिक सहयोग विशेषज्ञ सोनिया दास, एसटीबीआई व डीएसटी गुजरात सरकार के निदेशक डॉ. एएन भादलकर, डीएसटी व एफआईएसटी के प्रोफेसर एवं प्रमुख डॉ. संदीप कुमार शुक्ला, एआईआईएमएस देवघर के फैकल्टी एवं इन्क्यूबेटर सेंटर प्रभारी डॉ. मनीष राज, कर्नाटक के जलप्पा फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन के सीईओ डॉ. आनंद तिरुनावुकरासु समेत कई विशेषज्ञों ने भाग लिया। सीएमआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं जिम्स ग्रेटर नोएडा की क्लिनिकल ट्रायल समिति के सदस्य डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि क्लिनिकल ट्रायल और ट्रांसलेशनल रिसर्च भारत में साक्ष्य आधारित स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। ऐसे सहयोगात्मक प्रयास नवाचार, नैतिक क्लिनिकल रिसर्च और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएंगे।
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