Best Friend Day 2025: मेरा यार है तू... कहकर वर्षों से सुख-दुख के साथी बने हैं दोस्त; पढ़ें यारों की दास्तान
हर साल 8 जून को राष्ट्रीय सर्वश्रेष्ठ मित्र दिवस मनाया जाता है। यह दिन उन यारों के लिए समर्पित होता है, जो हमेशा हमारे हर सुख-दुख में साथ खड़े होते हैं। वो सच्चे दोस्त जीवन के उतार-चढ़ाव से निपटने में हमारी मदद करते हैं।
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जो हंसते-गाते लम्हों से लेकर दर्द भरी खामोशियों तक, बिना कहे सब समझ जाए, वही सच्चा दोस्त होता है। ऐसे कई दोस्त हैं जो खुद की परवाह न करके दोस्तों के लिए खड़े रहते हैं, एक फोन पर मदद करने चले आते हैं। आइए राष्ट्रीय सर्वश्रेष्ठ मित्र दिवस पर कुछ ऐसी ही दोस्तियों की दास्तान जानते हैं।
36 साल से बरकरार है दोस्ती
एकेए मेट्रो विले सोसाइटी निवासी सरोज सिंह की 1989 में इंद्रमणि सिंह से दोस्ती हुई थी। 2013-14 में जब परिवार के सदस्यों ने भी उनका सहयोग नहीं किया, तब मुकेश उनके काम आए। इसके अलावा भी कई मौकों पर सहारा बने। जब वह आर्थिक रूप से कमजोर हुईं, तब मदद का हाथ बढ़ाया। हर कठिन समय दोस्त के सहारे पार हुआ।
व्हाट्सएप ग्रुप के सहारे पहुंचा रहे मदद
ग्रेनो वेस्ट निवासी दीपांकर ने जिले में रहने वाले कई राज्यों के दोस्तों का एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया हुआ है। इस समूह के सदस्य जरूरत पर एक-दूसरे की मदद करने के लिए परिवार की तरह तैयार रहता है। मेडिकल इमरजेंसी हो या फिर आर्थिक समस्या हो, सभी एक-दूसरे का सहारा बनते हैं। इसके अलावा हर रविवार को मिलकर भी सुख-दुख साझा करते हैं।
बीमार पिता के इलाज के लिए बना सहारा
ग्रेटर नोएडा निवासी सौरभ के दोस्त बृजेश के पिता बीमार पड़ गए और उन्हें इलाज के लिए पैसे की आवश्यकता थी। पैसे न होने के कारण बृजेश बहुत परेशान था। तब उन्होंने अपने पिता से पैसे मांगकर बृजेश को पैसे दिए। इसके बाद बृजेश ने अपने पिता का इलाज करवाया और मदद के लिए शुक्रिया अदा किया।
राज्य अलग भले हों विचार एक
नोएडा सेक्टर-120 निवासी सुमनदास मूलरूप से पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी निवासी हैं। हंसराज कॉलेज में पढ़ने के दौरान उनकी दोस्ती मध्य प्रदेश के रीवा निवासी आयुष पांडेय से हुई। दोनों की पर्यावरण संरक्षण के विचार से दोस्ती गहरी हुई और 2021 में दोनों ने मिलकर बायोमंडी नाम की कंपनी खोली। दोनों के प्रयासों से अब कंपनी प्रति माह 3 लाख का लाभ कमा रही है। सात साल से उनकी दोस्ती बरकरार है।
सालभर की दोस्ती रिश्ते में बदल गई
सेक्टर-78 निवासी गिरिराज बहेड़िया की 2009 में ज्योति देवपुरा से मुलाकात हुई थी। दोनों उदयपुर के एक कॉलेज में पढ़ते थे। दोनों के विभाग अलग-अलग थे, हालांकि सपना सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने का ही था। एक साल तक दोनों ने मिलकर एक-दूसरे का पढ़ाई में साथ दिया। वहीं, 2010 में मन मिला तो परिवार की रजामंदी से शादी कर ली।
10 की उम्र में हुआ दोस्ताना आज भी बरकरार
सेक्टर-137 निवासी कविता कुमार राजेश ने बताया कि उनकी दोस्ती कृष्णा नगर निवासी सरिता प्रजापति से 10 साल की उम्र में हुई थी, तब दोनों दोनों रूप नगर स्थित केद्रीय विद्यालय में पढ़ते थे। आज 34 साल बाद भी दोस्ती बरकरार है। हर सुख-दुख में बिना समय, पैसे और स्थिति की परवाह किए दोनों एक दूसरे के ढाल बने। बताया कि बचपन के सब दोस्त बिछड़ गए, लेकिन सरिता से आज भी दोस्ताना जारी है।
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