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Noida News: 16 करोड़ की ठगी में 13 माह बाद लगी अंतिम रिपोर्ट
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मेरठ। स्टैग इंटरनेशनल के मालिक राकेश कोहली के बेटे प्रणव के खिलाफ 16 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में पुलिस ने 13 माह बाद अंतिम रिपोर्ट (फाइनल रिपोर्ट) लगाकर मुकदमे को बंद कर दिया। शिकायतकर्ता मोनिका ने पुलिस को बताया कि अब वह बेटे के खिलाफ कार्रवाई नहीं चाहती हैं। उन्होंने ही केस दर्ज कराया था। वहीं, इतने समय तक विवेचना में देरी को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठे हैं।
मंगल पांडेय नगर निवासी विनीता कोहली, पत्नी प्रणव कोहली और मोनिका पत्नी राकेश कोहली स्टैग स्पोर्ट्स सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक हैं। 28 दिसंबर 2021 में दर्ज कराए मुकदमे में विनीता ने कहा कि स्टैग स्पोर्ट्स सोल्यूशन खेल सामग्री उपलब्ध कराती है। उनके पति प्रणव ने कोरोना काल में उनकी कंपनी के साथ मिलकर कोरोना संक्रमण में इस्तेमाल होने वाले सामान की सप्लाई की थी। स्टैग स्पोर्ट्स सोल्यूशन की ओर से दो कंपनियों को 16 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे। आरोप था कि इसके बाद प्रणव ने हांगकांग से सामान मंगाकर सप्लाई किया। अन्य सात कंपनियों को आर्डर देकर रकम उनके खातों में डाल दी, लेकिन डिलीवरी नहीं हुई।
16 करोड़ की ठगी का मामला होने की वजह से पुलिस ने आर्थिक अनुसंधान शाखा (ईओडब्ल्यू) को विवेचना स्थानांतरण करने के लिए शासन को पत्र भेजा था। इसके बाद भी विवेचना स्थानांतरित नहीं हुई। पुलिस ने 13 माह तक विवेचना को लटकाए रखा। वहीं, सीओ सिविल लाइन अरविंद चौरसिया का कहना कि किस आधार पर मुकदमे में एफआर लगी है, इसकी भी जांच होगी।
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मंगल पांडेय नगर निवासी विनीता कोहली, पत्नी प्रणव कोहली और मोनिका पत्नी राकेश कोहली स्टैग स्पोर्ट्स सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक हैं। 28 दिसंबर 2021 में दर्ज कराए मुकदमे में विनीता ने कहा कि स्टैग स्पोर्ट्स सोल्यूशन खेल सामग्री उपलब्ध कराती है। उनके पति प्रणव ने कोरोना काल में उनकी कंपनी के साथ मिलकर कोरोना संक्रमण में इस्तेमाल होने वाले सामान की सप्लाई की थी। स्टैग स्पोर्ट्स सोल्यूशन की ओर से दो कंपनियों को 16 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे। आरोप था कि इसके बाद प्रणव ने हांगकांग से सामान मंगाकर सप्लाई किया। अन्य सात कंपनियों को आर्डर देकर रकम उनके खातों में डाल दी, लेकिन डिलीवरी नहीं हुई।
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16 करोड़ की ठगी का मामला होने की वजह से पुलिस ने आर्थिक अनुसंधान शाखा (ईओडब्ल्यू) को विवेचना स्थानांतरण करने के लिए शासन को पत्र भेजा था। इसके बाद भी विवेचना स्थानांतरित नहीं हुई। पुलिस ने 13 माह तक विवेचना को लटकाए रखा। वहीं, सीओ सिविल लाइन अरविंद चौरसिया का कहना कि किस आधार पर मुकदमे में एफआर लगी है, इसकी भी जांच होगी।
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