{"_id":"63d046e99a3dc104b227df56","slug":"na-na-news-c-14-1-91702-2023-01-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"रैपिड रेल : सर्दी में भाप आधारित तकनीक से हो रहा भूमिगत निर्माण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रैपिड रेल : सर्दी में भाप आधारित तकनीक से हो रहा भूमिगत निर्माण
विज्ञापन
मेरठ। उत्तर भारत में सर्दी में कम तापमान के बावजूद दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस ( रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम ) कॉरिडोर के भूमिगत निर्माण कार्य स्टीम क्योरिंग (भाप आधारित ) तकनीक से किया जा रहा है। कास्टिंग यार्ड ( ढलाई करने वाली जगह ) में यह काम तेजी से हो रहा है।
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पुनीत वत्स ने बताया कि एनसीआरटीसी (नेशनल कैपिटल रिजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन ) के कास्टिंग यार्ड में गुणवत्ता नियंत्रण के साथ सुरंग के हिस्से की ढलाई की जाती है। सर्दी के मौसम में यह काम चुनौतीपूर्ण हो जाता है। कंक्रीट, सरिया एवं अन्य कंस्ट्रक्शन मटीरियल समयबद्ध तरीके से ठोस अवस्था में नहीं पहुंच पाता। जब तक सेगमेंट पूरी तरह मजबूत नहीं होते तो उनका इस्तेमाल निर्माण में नहीं हो सकता है। ऐसे में कम तापमान वाले मौसम में सुरंग के छल्ले के प्री-कास्ट सेगमेंट को तेजी से मजबूती प्रदान करने और ठोस बनाने के लिए एनसीआरटीसी की ओर से स्टीम क्योरिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
दिल्ली में भूमिगत सेक्शन में, आनंद विहार स्टेशन से न्यू अशोक नगर की ओर लगभग तीन किमी और साहिबाबाद की ओर लगभग 2 किमी लंबी दो समानांतर सुरंग बनाने का कार्य तेजी से जारी है। इन दोनों सुरंग के निर्माण के लिए चार सुदर्शन मशीन लगभग 10 किमी के निर्माण में लगी हैं। इसमें से लगभग 5.5 किमी से ज्यादा सुरंग का निर्माण पूर्ण हो गया है। अब तक दिल्ली में लगभग 25,600 सुरंग प्री-कास्ट सेग्मेंट्स का प्रयोग किया जा चुका है। वहीं मेरठ में, कुल 11 किलोमीटर समानांतर सुरंग का निर्माण होना है।
विज्ञापन
ऐसे काम करती है भाप आधारित तकनीक
- स्टीम क्योरिंग तकनीक में बाॅयलर की मदद से नवनिर्मित हिस्से को 5 से 7 घंटे तक भाप दी जाती है। इससे नवनिर्मित हिस्सा 3 गुना ज्यादा तेजी से मजबूती व अपनी ठोस कंक्रीट अवस्था प्राप्त कर लेते हैं। आमतौर पर तापमान 10 डिग्री से कम होने पर एक प्री-कास्ट सेगमेंट को सामान्य अवस्था में मजबूती हासिल करने में 40 से 45 घंटे का समय लगता है, लेकिन स्टीम क्योरिंग तकनीक से यह कार्य 10 घंटे में पूर्ण हो जाता है। ऐसे में इस तकनीक की बदौलत, मौसम बदलने के बावजूद सुरंग के छल्ले के निर्माण की रफ्तार धीमी नहीं होती तथा भूमिगत कॉरिडोर के निर्माण की रफ्तार तेज बनी रहती है। गर्मी के मौसम में इस तकनीक की जरूरत नहीं पड़ती है।
विज्ञापन
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पुनीत वत्स ने बताया कि एनसीआरटीसी (नेशनल कैपिटल रिजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन ) के कास्टिंग यार्ड में गुणवत्ता नियंत्रण के साथ सुरंग के हिस्से की ढलाई की जाती है। सर्दी के मौसम में यह काम चुनौतीपूर्ण हो जाता है। कंक्रीट, सरिया एवं अन्य कंस्ट्रक्शन मटीरियल समयबद्ध तरीके से ठोस अवस्था में नहीं पहुंच पाता। जब तक सेगमेंट पूरी तरह मजबूत नहीं होते तो उनका इस्तेमाल निर्माण में नहीं हो सकता है। ऐसे में कम तापमान वाले मौसम में सुरंग के छल्ले के प्री-कास्ट सेगमेंट को तेजी से मजबूती प्रदान करने और ठोस बनाने के लिए एनसीआरटीसी की ओर से स्टीम क्योरिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
विज्ञापन
दिल्ली में भूमिगत सेक्शन में, आनंद विहार स्टेशन से न्यू अशोक नगर की ओर लगभग तीन किमी और साहिबाबाद की ओर लगभग 2 किमी लंबी दो समानांतर सुरंग बनाने का कार्य तेजी से जारी है। इन दोनों सुरंग के निर्माण के लिए चार सुदर्शन मशीन लगभग 10 किमी के निर्माण में लगी हैं। इसमें से लगभग 5.5 किमी से ज्यादा सुरंग का निर्माण पूर्ण हो गया है। अब तक दिल्ली में लगभग 25,600 सुरंग प्री-कास्ट सेग्मेंट्स का प्रयोग किया जा चुका है। वहीं मेरठ में, कुल 11 किलोमीटर समानांतर सुरंग का निर्माण होना है।
विज्ञापन
ऐसे काम करती है भाप आधारित तकनीक
- स्टीम क्योरिंग तकनीक में बाॅयलर की मदद से नवनिर्मित हिस्से को 5 से 7 घंटे तक भाप दी जाती है। इससे नवनिर्मित हिस्सा 3 गुना ज्यादा तेजी से मजबूती व अपनी ठोस कंक्रीट अवस्था प्राप्त कर लेते हैं। आमतौर पर तापमान 10 डिग्री से कम होने पर एक प्री-कास्ट सेगमेंट को सामान्य अवस्था में मजबूती हासिल करने में 40 से 45 घंटे का समय लगता है, लेकिन स्टीम क्योरिंग तकनीक से यह कार्य 10 घंटे में पूर्ण हो जाता है। ऐसे में इस तकनीक की बदौलत, मौसम बदलने के बावजूद सुरंग के छल्ले के निर्माण की रफ्तार धीमी नहीं होती तथा भूमिगत कॉरिडोर के निर्माण की रफ्तार तेज बनी रहती है। गर्मी के मौसम में इस तकनीक की जरूरत नहीं पड़ती है।