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उर्दू को बचाने की मुहिम
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उर्दू को बचाने की मुहिम
नगीना। उर्दू को बढ़ावा देने के लिए अभियान चलाया गया है। इसके तहत मदरसे के छात्रों को हस्ताक्षर मुहिम से भी जोड़ा गया है। उर्दू केयर अभियान से जुड़े मुनीराम जैन ने कहा कि उर्दू भाषा भारतीय संस्कृति की पहचान है हमें एकजुट होकर सरकार के सामने अपना पक्ष रखना है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में उर्दू अध्यापकों के 474 पद खाली पड़े हैं। लेक्चरर के पद खाली हैं। यहां के दर्जनभर सरकारी स्कूलों को छोड़ दें तो सभी शिक्षण संस्थानों में उर्दू अध्यापकों की कमी है। नूंह और फिरोजपुर झिरका के पुस्तकालयों में उर्दू भाषा की मैगजीन नहीं आती। उर्दू को बढ़ावा देने के लिए मेवात मॉडल स्कूलों व जवाहर नवोदय स्कूल में भी उर्दू की पढ़ाई होनी जरूरी है। शिक्षाविद् कवि इलियास नेे कहा कि मेवात क्षेत्र पहचान का मोहताज नहीं है उर्दू शायरी के सम्राट मिर्जा गालिब की ससुराल भी यहीं है। उन्होंने कहा कि उर्दू भाषा को देश में ऐसे पेश किया जा रहा है जैसे की यह अकेले मुसलमानों की भाषा हो, जबकि ऐसा नहीं है। समाजसेवी नसीम ने कहा कि उर्दू हिंदुस्तान के उन तमाम लोगों की भाषा है जो यहां सदियों से उर्दू पढ़ते-पढ़ाते आ रहे हैं। सरकार को इस विषय पर सोचने की जरूरत है। इन लोगों ने मेवात में उर्दू और संस्कृत भाषाओं के लिए कॉलेज खोलने की बात कही। आबिद ने कहा कि उर्दू सभी लोगों का हक है राज्य व केंद्र सरकार को उर्दू भाषा के विकास के लिए कदम उठाने होंगे।
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नगीना। उर्दू को बढ़ावा देने के लिए अभियान चलाया गया है। इसके तहत मदरसे के छात्रों को हस्ताक्षर मुहिम से भी जोड़ा गया है। उर्दू केयर अभियान से जुड़े मुनीराम जैन ने कहा कि उर्दू भाषा भारतीय संस्कृति की पहचान है हमें एकजुट होकर सरकार के सामने अपना पक्ष रखना है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में उर्दू अध्यापकों के 474 पद खाली पड़े हैं। लेक्चरर के पद खाली हैं। यहां के दर्जनभर सरकारी स्कूलों को छोड़ दें तो सभी शिक्षण संस्थानों में उर्दू अध्यापकों की कमी है। नूंह और फिरोजपुर झिरका के पुस्तकालयों में उर्दू भाषा की मैगजीन नहीं आती। उर्दू को बढ़ावा देने के लिए मेवात मॉडल स्कूलों व जवाहर नवोदय स्कूल में भी उर्दू की पढ़ाई होनी जरूरी है। शिक्षाविद् कवि इलियास नेे कहा कि मेवात क्षेत्र पहचान का मोहताज नहीं है उर्दू शायरी के सम्राट मिर्जा गालिब की ससुराल भी यहीं है। उन्होंने कहा कि उर्दू भाषा को देश में ऐसे पेश किया जा रहा है जैसे की यह अकेले मुसलमानों की भाषा हो, जबकि ऐसा नहीं है। समाजसेवी नसीम ने कहा कि उर्दू हिंदुस्तान के उन तमाम लोगों की भाषा है जो यहां सदियों से उर्दू पढ़ते-पढ़ाते आ रहे हैं। सरकार को इस विषय पर सोचने की जरूरत है। इन लोगों ने मेवात में उर्दू और संस्कृत भाषाओं के लिए कॉलेज खोलने की बात कही। आबिद ने कहा कि उर्दू सभी लोगों का हक है राज्य व केंद्र सरकार को उर्दू भाषा के विकास के लिए कदम उठाने होंगे।