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बलिदानी बेटों की यादों में जीती मांएं: हर जवान में दिखती है अपने लाल की झलक, करती हैं उनके लिए हर पल दुआ
Sun, 10 May 2026 12:28 PM IST
Vijay Singh Pundir
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
Published by: Vijay Singh Pundir
Updated Sun, 10 May 2026 12:28 PM IST
सार
मातृ दिवस पर बलिदानी जवानों की मांओं ने अपने बेटों की यादें और भावनाएं साझा कीं। कैप्टन विजयंत थापर और कैप्टन वरुण छिब्बर की मांओं ने कहा कि बेटों का बलिदान उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने बताया कि देश की सेवा करने वाले हर जवान में उन्हें अपने बेटे की झलक दिखाई देती है और वह उनके लिए हर पल दुआ करती हैं।
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मदर्स डे पर खास
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मां का रिश्ता दुनिया में सबसे अनमोल माना जाता है। मां अपने बच्चों के लिए हर दर्द और हर चिंता को मुस्कुराकर सह लेती है। जिले में कई ऐसी मांएं हैं जिनके बेटे देश के लिए बलिदान हो गए, लेकिन आज भी उनकी यादें घर के हर कोने में जीवित हैं। किसी ने बेटे की वर्दी संभालकर रखी है तो किसी ने उसकी आखिरी चिट्ठी। वहीं कुछ मांएं ऐसी भी हैं जिनके बेटे-बेटियां सेना, पुलिस और जोखिम भरी सेवाओं में तैनात हैं। उनके लिए हर दिन चिंता और गर्व दोनों साथ लेकर आता है। मातृ दिवस पर ऐसी ही मांओं ने अपने दिल की बातें साझा कीं।
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मेरा बेटा भारत मां का हो गया
कारगिल युद्ध में बलिदान हुए कैप्टन विजयंत थापर की मां तृप्ता थापर आज भी बेटे की यादों को अपने साथ जीती हैं। वह बताती हैं कि विजयंत को खीर बेहद पसंद थी, इसलिए घर में हर खुशी के मौके पर आज भी खीर बनाई जाती है। उनके कमरे का सामान और यादें आज भी वैसे ही सहेजकर रखी गई हैं। तृप्ता थापर कहती हैं कि उनके बेटे ने सिर्फ परिवार नहीं बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया। बेटे की आखिरी चिट्ठी आज भी उन्हें भावुक कर देती है, जिसमें उसने लिखा था कि अगला जन्म भी भारत माता के लिए ही होगा। वह गर्व से कहती हैं कि बलिदानी की मां कहलाना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है।
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हर जवान में अपने बेटे की झलक दिखती है
सेक्टर-27 निवासी सुनीता छिब्बर के बेटे कैप्टन वरुण छिब्बर वर्ष 2009 में किश्तवाड़ में बलिदान हो गए थे। सेना में रहते हुए उन्होंने कठिन पहाड़ी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और अपने साहस से पहचान बनाई। सुनीता छिब्बर बताती हैं कि जब भी देश की सीमाओं पर तनाव या किसी सैन्य अभियान की खबर आती है तो उन्हें अपने बेटे की याद आ जाती है। वह कहती हैं कि आज भी देश की रक्षा कर रहे हर जवान में उन्हें अपने बेटे की झलक दिखाई देती है। उनके अनुसार बलिदानी बेटे सिर्फ देश को सुरक्षित नहीं करते बल्कि अपनी मां को भी हमेशा के लिए अमर कर जाते हैं।
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