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Noida News: मां आ रही हैं... शारदोत्सव में दिखेगी बंगाल की परंपरा और हस्तशिल्प कला
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कालीबाड़ी में 15 से 21 अक्तूबर तक शारदोत्सव, मां के स्वागत में बनेगी विशाल सड़क-अल्पना
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। कालीबाड़ी में 15 से 21 अक्तूबर तक शारदोत्सव का आयोजन होगा। ग्रेनो शारदिया सांस्कृतिक समिति की ओर से आयोजित इस उत्सव में बंगाल की परंपरा, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलेगी। मां दुर्गा के स्वागत की तैयारियों में पारंपरिक कला और सामुदायिक भागीदारी खास रहेगी।
कालीबाड़ी के अध्यक्ष निहार रंजन विश्वास ने बताया कि इस बार मां दुर्गा की पोशाक और शृंगार में कोलकाता के कुम्हारटोली की पारंपरिक कला की झलक दिखेगी। कुम्हारटोली कोलकाता का प्रसिद्ध इलाका है, जहां पीढ़ियों से कारीगर मिट्टी से मां दुर्गा की प्रतिमाएं बनाते आ रहे हैं। लाल, सफेद और सुनहरे रंगों से सजी मां की पारंपरिक पोशाक में बंगाल की सांस्कृतिक पहचान नजर आएगी।
उत्सव का खास आकर्षण मां के स्वागत में बनाई जाने वाली विशाल सड़क-अल्पना होगी। कालीबाड़ी की ओर आने वाली सड़क पर ‘मां आश्चेन’ यानी ‘मां आ रही हैं’ की भावना के साथ अल्पना बनाई जाएगी। इसमें महिलाएं, बच्चे और युवा मिलकर हिस्सा लेंगे।
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समिति के अनुसार, 11 अक्तूबर को सुबह छह बजे मां का आगमन होगा। 15 अक्तूबर को महापंचमी से आनंदमेला शुरू होगा। 16 से 20 अक्तूबर तक षष्ठी से नवमी की पूजा होगी, जबकि 21 अक्तूबर को विजयादशमी के साथ उत्सव का समापन होगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। कालीबाड़ी में 15 से 21 अक्तूबर तक शारदोत्सव का आयोजन होगा। ग्रेनो शारदिया सांस्कृतिक समिति की ओर से आयोजित इस उत्सव में बंगाल की परंपरा, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलेगी। मां दुर्गा के स्वागत की तैयारियों में पारंपरिक कला और सामुदायिक भागीदारी खास रहेगी।
कालीबाड़ी के अध्यक्ष निहार रंजन विश्वास ने बताया कि इस बार मां दुर्गा की पोशाक और शृंगार में कोलकाता के कुम्हारटोली की पारंपरिक कला की झलक दिखेगी। कुम्हारटोली कोलकाता का प्रसिद्ध इलाका है, जहां पीढ़ियों से कारीगर मिट्टी से मां दुर्गा की प्रतिमाएं बनाते आ रहे हैं। लाल, सफेद और सुनहरे रंगों से सजी मां की पारंपरिक पोशाक में बंगाल की सांस्कृतिक पहचान नजर आएगी।
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उत्सव का खास आकर्षण मां के स्वागत में बनाई जाने वाली विशाल सड़क-अल्पना होगी। कालीबाड़ी की ओर आने वाली सड़क पर ‘मां आश्चेन’ यानी ‘मां आ रही हैं’ की भावना के साथ अल्पना बनाई जाएगी। इसमें महिलाएं, बच्चे और युवा मिलकर हिस्सा लेंगे।
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समिति के अनुसार, 11 अक्तूबर को सुबह छह बजे मां का आगमन होगा। 15 अक्तूबर को महापंचमी से आनंदमेला शुरू होगा। 16 से 20 अक्तूबर तक षष्ठी से नवमी की पूजा होगी, जबकि 21 अक्तूबर को विजयादशमी के साथ उत्सव का समापन होगा।