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ग्रेनो: 200 करोड़ से जीबीयू में बनेंगे दो नए भवन, हाईराइज में चलेंगी कक्षाएं, रिसर्च के लिए बनेगा अलग भवन
Fri, 09 Oct 2026 10:44 AM IST
Vijay Singh Pundir
अंकुर त्रिपाठी, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
अंकुर त्रिपाठी, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
Published by: Vijay Singh Pundir
Updated Fri, 09 Oct 2026 10:44 AM IST
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गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) में विदेशी छात्रों व अन्य छात्रों की बढ़ती संख्या और शोध गतिविधियों को देखते हुए अब करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से दो नए भवन बनेंगे। विश्वविद्यालय ने दोनों भवनों की कार्ययोजना तैयार कर अवसंरचना एवं औद्योगिक विकास विभाग (आईआईडीडी) को भेज दी गई है। दोनों हाईराइज भवन 10 से 12 फ्लोर के होंगे। विवि में अभी ऐसी कोई भी बिल्डिंग नहीं है।
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इन भवन में ही आठ स्कूलों की कक्षाएं संचालित की जाएंगी, जबकि दूसरा भवन पूरी तरह शोध कार्यों के लिए समर्पित होगा। छात्रों की संख्या हर साल बढ़ने से बैठने में काफी दिक्कतों का सामना कर पड़ रहा है। इसके साथ ही हर साल 10 से 15 नए कोर्स शुरु हो रहे हैं। इस सत्र में अब तक 2800 से अधिक दाखिले हो चुके हैं। विश्वविद्यालय में देश के विभिन्न हिस्सों के विद्यार्थियों के साथ कई देशों के विदेशी छात्र भी पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में मौजूदा शैक्षणिक ढांचे पर बढ़ते दबाव को देखते हुए नए भवनों को बनाने की सहमति जताई गई है।
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कुलसचिव प्रो चंदर कुमार सिंह ने बताया कि प्रस्तावित हाईराइज भवन को अकादमिक गतिविधियों के लिए तैयार किया जाएगा। इसमें विश्वविद्यालय के अलग-अलग स्कूलों की कक्षाओं चलेंगी। इससे मौजूदा भवनों में कक्षाओं का दबाव कम होगा और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिल सकेंगी। विश्वविद्यालय पहले से ही आवासीय और बहुविषयक संस्थान के तौर पर विकसित है। परिसर में आठ स्कूल भवन, केंद्रीय पुस्तकालय, ऑडिटोरियम, खेल सुविधाएं और छात्रावास समेत कई प्रमुख सुविधाएं हैं। विश्वविद्यालय के 18 छात्रावासों में करीब पांच हजार विद्यार्थियों के रहने की क्षमता है। अब बढ़ती अकादमिक गतिविधियों के अनुरूप नए भवनों के जरिए परिसर का विस्तार किया जा रहा है।
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रिसर्च के लिए होगा पूरी तरह अलग भवन
जीबीयू में सेमीकंडक्टर रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी और ड्रग डिस्कवरी जैसे क्षेत्रों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने की दिशा में भी काम चल रहा है। ऐसे में अलग रिसर्च भवन बनने से शोध गतिविधियों को एक जगह बेहतर आधारभूत ढांचा मिल सकेगा। विवि में पीएचडी करने के लिए वियतनाम, म्यांमार, थाईलैंड, नेपाल, भूटान, दक्षिण कोरिया और चीन समेत कई देशों के विद्यार्थी हर साल आते हैं। नए भवनों में कक्षाओं और दूसरी शैक्षणिक सुविधाओं को विदेशी विद्यार्थियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित की जाएगी।
एआई और ग्रीन टेक्नोलॉजी में दक्ष होंगे विद्यार्थी
छात्रों को भविष्य की तकनीकों और रोजगार की बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के लिए केंद्र में एआई, ग्रीन टेक्नोलॉजी, सस्टेनेबिलिटी और उभरती डिजिटल तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। केंद्र का संचालन पर्यावरण विभाग के अंतर्गत होगा। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थी वास्तविक समस्याओं पर आधारित परियोजनाओं पर काम करेंगे। उद्योग विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में वे एआई आधारित समाधान और प्रोटोटाइप विकसित करेंगे। चयनित विद्यार्थियों को संरचित इंटर्नशिप, एआई आधारित लर्निंग और करियर रेडीनेस कार्यक्रमों के साथ उद्योगों से सीधे जुड़ने का अवसर मिलेगा।