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Noida News: विदेश से आवक बढ़ी तो सस्ती होने लगी दाल
Tue, 04 Nov 2025 01:50 AM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
Updated Tue, 04 Nov 2025 01:50 AM IST
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शहर की दाल मिल में सूखती दलहन। संवाद
- फोटो : samvad
पिछले कुछ महीनों से लगातार बढ़ रहीं दालों की कीमतों में अब ठहराव देखने को मिल रहा है। व्यापारियों के अनुसार विदेशी आयात बढ़ने के कारण स्थानीय बाजार में दालों की आपूर्ति प्रचुर मात्रा में होने लगी है, जिससे खुदरा और थोक दोनों स्तरों पर दामों में गिरावट दर्ज की गई है।
सबसे बड़ी राहत अरहर की दाल के उपभोक्ताओं को मिली है। कुछ समय पहले तक 150 से 155 रुपये प्रति किलो बिक रही विदेशी अरहर की दाल के दाम अब घटकर 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। इसी तरह मसूर, उड़द और चना की दाल के भावों में भी लगभग 20 फीसदी तक की कमी आई है।
बाजार में अरहर और मसूर की दालें पिछले साल की तुलना में सबसे सस्ती दरों पर बिक रही हैं। व्यापारियों का कहना है कि सरकार द्वारा आयात को बढ़ावा देने और विभिन्न देशों से दालों की बड़ी खेप आने के कारण कीमतों में यह गिरावट संभव हुई है। इससे थोक मंडियों में दालों की आपूर्ति सुचारु हो गई है और मांग की तुलना में स्टॉक बढ़ने से दाम स्वत: नीचे आए हैं।
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थोक कारोबारियों का अनुमान है कि यदि विदेशी आयात इसी प्रकार जारी रहा तो आने वाले दिनों में दालों के दाम स्थिर बने रहेंगे और उपभोक्ताओं को निकट भविष्य में दालों की कीमतों में कोई बड़ा उछाल देखने को नहीं मिलेगा।
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बातचीत,,,,,,,
दालों के दाम काफी ऊपर थे, जिनमें अब काफी गिरावट आई है। करीब दो माह से लगातार दालों के दामों में गिरावट आ रही है। अभी इनकी कीमतों में उछाल आने की उम्मीद कम ही है।
-कपिल अग्रवाल, दाल के थोक विक्रेता।
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विदेश से आने वाली दालों के दाम इस समय काफी कम हैं। इसका सीधा असर देसी दालों पर भी पड़ रहा है। देसी दाल पैदा करने वाले किसानों को भी इस समय कम दाम मिल पा रहे हैं, हालांकि देसी दालों के दाम विदेशी से अधिक हैं।
-गोविंद प्रसाद अग्रवाल, दाल मिल संचालक।
ये हैं प्रमुख दालों के थोक दाम में आई गिरावट
अरहस्की विदेशी दाल
155 से 78 रुपये किलो।
अरहर की देसी दाल
160 से 100 रुपये किलो।
मसूर की दाल
70 से 73 रुपये किलो।
उड़द धुली
125 से 118 रुपये किलो।
उड़द छिलका
120 से 90 रुपये किलो।
मटर
90 से 40 रुपये किलो।
चना की दाल
80 से 70 रुपये किलो।
जिले में दलहन कारोबार पर एक नजर
-210 करीब दलहन कारोबार की फर्में हैं जिले में।
-55 छोटी-बड़ी दलहन प्रसंस्करण (दाल मिल) की इकाइयां हैं जिले में।
-400 हेक्टेयर में होती है जिले में मसूर की दाल की खेती।
-70 हेक्टेयर में है चना की दाल की खेती।
-30 हेक्टेयर में है मटर की खेती।
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सबसे बड़ी राहत अरहर की दाल के उपभोक्ताओं को मिली है। कुछ समय पहले तक 150 से 155 रुपये प्रति किलो बिक रही विदेशी अरहर की दाल के दाम अब घटकर 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। इसी तरह मसूर, उड़द और चना की दाल के भावों में भी लगभग 20 फीसदी तक की कमी आई है।
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बाजार में अरहर और मसूर की दालें पिछले साल की तुलना में सबसे सस्ती दरों पर बिक रही हैं। व्यापारियों का कहना है कि सरकार द्वारा आयात को बढ़ावा देने और विभिन्न देशों से दालों की बड़ी खेप आने के कारण कीमतों में यह गिरावट संभव हुई है। इससे थोक मंडियों में दालों की आपूर्ति सुचारु हो गई है और मांग की तुलना में स्टॉक बढ़ने से दाम स्वत: नीचे आए हैं।
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थोक कारोबारियों का अनुमान है कि यदि विदेशी आयात इसी प्रकार जारी रहा तो आने वाले दिनों में दालों के दाम स्थिर बने रहेंगे और उपभोक्ताओं को निकट भविष्य में दालों की कीमतों में कोई बड़ा उछाल देखने को नहीं मिलेगा।
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बातचीत,,,,,,,
दालों के दाम काफी ऊपर थे, जिनमें अब काफी गिरावट आई है। करीब दो माह से लगातार दालों के दामों में गिरावट आ रही है। अभी इनकी कीमतों में उछाल आने की उम्मीद कम ही है।
-कपिल अग्रवाल, दाल के थोक विक्रेता।
विदेश से आने वाली दालों के दाम इस समय काफी कम हैं। इसका सीधा असर देसी दालों पर भी पड़ रहा है। देसी दाल पैदा करने वाले किसानों को भी इस समय कम दाम मिल पा रहे हैं, हालांकि देसी दालों के दाम विदेशी से अधिक हैं।
-गोविंद प्रसाद अग्रवाल, दाल मिल संचालक।
ये हैं प्रमुख दालों के थोक दाम में आई गिरावट
अरहस्की विदेशी दाल
155 से 78 रुपये किलो।
अरहर की देसी दाल
160 से 100 रुपये किलो।
मसूर की दाल
70 से 73 रुपये किलो।
उड़द धुली
125 से 118 रुपये किलो।
उड़द छिलका
120 से 90 रुपये किलो।
मटर
90 से 40 रुपये किलो।
चना की दाल
80 से 70 रुपये किलो।
जिले में दलहन कारोबार पर एक नजर
-210 करीब दलहन कारोबार की फर्में हैं जिले में।
-55 छोटी-बड़ी दलहन प्रसंस्करण (दाल मिल) की इकाइयां हैं जिले में।
-400 हेक्टेयर में होती है जिले में मसूर की दाल की खेती।
-70 हेक्टेयर में है चना की दाल की खेती।
-30 हेक्टेयर में है मटर की खेती।