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फर्जी कंपनियां बनाकर करोडों का फर्जीवाड़ा
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फर्जी कंपनियां बनाकर 5.54 करोड़ का फर्जीवाड़ा
नोएडा। फर्जी कंपनियाें के जरिये जीएसटी की चोरी करने वाला सिंडिकेट सक्रिय है। नोएडा में ऐसी दो फर्मों का खुलासा राज्य वस्तु एवं सेवाकर (एसजीएसटी) विभाग ने किया है। इन फर्मों के जरिये करीब 5.54 करोड़ का फर्जीवाड़ा किया गया है। बोगस बिलों के आधार पर इन फर्मों ने सिर्फ कागजों में कारोबार कर डाला। विभाग ने पंजीयन निरस्त करते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है।
विशेष अनुसंधान शाखा के अतिरिक्त आयुक्त धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि नोएडा के सेक्टर-80 स्थित एक ऑटोमेशन पाइप बनाने वाली कंपनी में इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) व वस्तु एवं सेवा कर के घोटाले की सूचना मिली थी। इस कंपनी ने दो फर्जी फर्म गठित कर उनसे फर्जी ई-वे बिल जनरेट कर आपूर्ति दिखाई थी। गोपनीय सूचना के आधार पर जांच का जिम्मा संयुक्त आयुक्त डीके दुबे को सौंपा गया। बृहस्पतिवार को संयुक्त आयुक्त के नेतृत्व में उपायुक्त मिथिलेश कुमार मिश्रा, सहायक आयुक्त सोनिया श्रीवास्तव, पीयूष ओमर व सिराज हुसैन आदि अधिकारियों ने इस नेटवर्क से जुड़ी सभी फर्मों की जांच की। जांच के दौरान सेक्टर-7 व सेक्टर-19 के पते पर किसी भी फर्म का अस्तित्व नहीं पाया गया। जबकि सेक्टर-80 स्थित फर्म में निर्माण कार्य होता मिला। अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान कुछ लोगों से पूछताछ की गई, जिन्होंने कर चोरी में संलिप्तता स्वीकार की। संबंधित फर्मों के ऑनलाइन जनरेट किए गए इनवार्ड एवं आउटवार्ड ई-वे बिल की गहनता से पड़ताल की गई। दो फर्जी फर्मों सहित तीनों फर्मों में 5.54 करोड़ रुपये आईटीसी का घोटाला पाया गया। मौके पर ही 1.02 करोड़ रुपये के कच्चे एवं तैयार माल की रजिस्टर में एंट्री नहीं मिली। माल को सीज कर लिया गया। देय कर राशि व पेनाल्टी की धनराशि 36.75 लाख रुपये जमा करवाई गई।
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नोएडा। फर्जी कंपनियाें के जरिये जीएसटी की चोरी करने वाला सिंडिकेट सक्रिय है। नोएडा में ऐसी दो फर्मों का खुलासा राज्य वस्तु एवं सेवाकर (एसजीएसटी) विभाग ने किया है। इन फर्मों के जरिये करीब 5.54 करोड़ का फर्जीवाड़ा किया गया है। बोगस बिलों के आधार पर इन फर्मों ने सिर्फ कागजों में कारोबार कर डाला। विभाग ने पंजीयन निरस्त करते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है।
विशेष अनुसंधान शाखा के अतिरिक्त आयुक्त धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि नोएडा के सेक्टर-80 स्थित एक ऑटोमेशन पाइप बनाने वाली कंपनी में इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) व वस्तु एवं सेवा कर के घोटाले की सूचना मिली थी। इस कंपनी ने दो फर्जी फर्म गठित कर उनसे फर्जी ई-वे बिल जनरेट कर आपूर्ति दिखाई थी। गोपनीय सूचना के आधार पर जांच का जिम्मा संयुक्त आयुक्त डीके दुबे को सौंपा गया। बृहस्पतिवार को संयुक्त आयुक्त के नेतृत्व में उपायुक्त मिथिलेश कुमार मिश्रा, सहायक आयुक्त सोनिया श्रीवास्तव, पीयूष ओमर व सिराज हुसैन आदि अधिकारियों ने इस नेटवर्क से जुड़ी सभी फर्मों की जांच की। जांच के दौरान सेक्टर-7 व सेक्टर-19 के पते पर किसी भी फर्म का अस्तित्व नहीं पाया गया। जबकि सेक्टर-80 स्थित फर्म में निर्माण कार्य होता मिला। अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान कुछ लोगों से पूछताछ की गई, जिन्होंने कर चोरी में संलिप्तता स्वीकार की। संबंधित फर्मों के ऑनलाइन जनरेट किए गए इनवार्ड एवं आउटवार्ड ई-वे बिल की गहनता से पड़ताल की गई। दो फर्जी फर्मों सहित तीनों फर्मों में 5.54 करोड़ रुपये आईटीसी का घोटाला पाया गया। मौके पर ही 1.02 करोड़ रुपये के कच्चे एवं तैयार माल की रजिस्टर में एंट्री नहीं मिली। माल को सीज कर लिया गया। देय कर राशि व पेनाल्टी की धनराशि 36.75 लाख रुपये जमा करवाई गई।
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