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अमर उजाला दफ्तर पहुंचे नाइन इज माइन के सदस्य: नन्ही उम्र में जाना अधिकारों का महत्व, कर रहे दूसरों को जागरूक

Sat, 19 Nov 2022 09:36 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा Published by: विजय पुंडीर Updated Sat, 19 Nov 2022 09:36 AM IST
सार

बाल अधिकारों के लिए कार्य कर रहे इन बच्चों ने अपने सफर की दिलचस्प यादें साझा कीं। निम्न व मध्यम आय वर्ग से आने वाले छह बच्चों ने संघर्ष से अपनी अलग पहचान बनाई।

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Members of Nine is Mine reached Amar Ujala office
अमर उजाला दफ्तर पहुंचे नाइन इज माइन से जुड़े बच्चे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रत्येक संस्था के अभियान नाइन इज माइन से जुड़े छह बच्चे शुक्रवार को सेक्टर-59 स्थित अमर उजाला दफ्तर पहुंचे। बाल अधिकारों के लिए कार्य कर रहे इन बच्चों ने अपने सफर की दिलचस्प यादें साझा कीं। निम्न व मध्यम आय वर्ग से आने वाले छह बच्चों ने संघर्ष से अपनी अलग पहचान बनाई। कक्षा 4 में पढ़ने वाली नव्या कहती हैँ कि बाल संसद में वह बच्चों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर आवाज उठाती हैं। 

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वहीं 14 साल के हरिओम घर के इकलौते कमाऊ सदस्य हैं। बावजूद इसके वह पढ़ाई संग सामाजिक मुद्दों के लिए समय निकालते हैं।  सभी छह बच्चे में रगबी, क्रिकेट, खो-खो, दौड़ समेत अन्य खेलों में स्कूल से लेकर राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं। मौके पर उन्होंने खेलों में जारी लैंगिक भेदभाव मिटाने पर चर्चा की।  प्रत्येक संस्था की को-ऑर्डिनेटर योगिता गोला बताती हैं कि नाइन इज माइन के तहत दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में बाल संसद का संचालन किया जाता है। संस्था यूनीसेफ से जुड़ी है। उन्होंने बताया कि यूनीसेफ इस साल अंतरराष्ट्रीय बाल दिवस को ब्लू थीम पर मना रहा है। जिसका उद्देश्य खेलों में लैंगिक भेदभाव के प्रति जागरूकता लाना है।
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ताने दरकिनार कर पापा का सपना पूरा करेगी बिटिया 
बैटरी रिक्शा चालक पिता व घरेलू सहायिका मां की 17 वर्षीय बेटी पूजा अपने हुनर से परिवार को गर्व महसूस कराना चाहती हैं। वह लोगों के तानों को दरकिनार कर रिंग में रेसलर के तौर पर डटी रहती हैं। कई रेसलिंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी पूजा बताती हैं कि पहले उन्हें लड़कों के ही अखाड़े में लड़ना पड़ता था। लोग ताने देते थे तो लगता था कि खेलना छोड़ दें। लेकिन पापा और भैया हौसला बढ़ाते हैं तो उनकी हिम्मत बढ़ जाती है। लोगों की सोच बदले इसलिए वह बाल संसद के सामाजिक कार्यों में भागेदारी करना पसंद करती हैं। 

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बाल श्रम हो या बाल विवाह हर मुद्दे के प्रति जागरूक 
17 साल के मोइन बीते पांच वर्ष से प्रत्येक संस्था के सदस्य हैं। बाल संसद (यश चिल्ड्रन पार्लियामेंट) में मिनिस्टर ऑफ पीस जस्टिस मोइन अपने क्षेत्र में बाल विवाह व बालश्रम रोकने के लिए लगातार संघर्षरत रहते हैं। नुक्कड़ नाटक, सर्कस आर्ट व डोर टू डोर कैंपेन चलाकर वह लोगों को जागरूक करते हैं। मोइन कहते हैं कि कौन सी समस्या बच्चों के लिए कितनी गंभीर है, उसे दूर करने के लिए कैसे कदम उठाने हैं, लोगों को अपनी बात कैसे समझानी है यह सारे फैसले बाल संसद के सदस्य खुद करते हैं। हर बच्चे से 2 से 10 रुपए तक जोड़कर वह हजारों का बजट इकट्ठा करते हैँ। जमा किए गए पैसे को सामाजिक कार्यों पर खर्च किया है। 12वीं में पढ़ने वाले मोइन अंडर-17 क्रिकेट खिलाड़ी भी हैं। 

जागरूकता लानी है बेहद जरूरी
17 वर्षीय खो-खो खिलाड़ी विकास कहते हैं कि जब वह महिलाओं से महावारी स्वच्छता जैसे मुद्दों पर बात करते हैं तो आमतौर पर वह असहज हो जाती हैं। लेकिन यह जरूरी है कि लोग खासकर महिलाएं जागरूक हों। बाल संसद में फाइनेंस मिनिस्टर की भूमिका निभाने वाले विकास बाल विवाह और बालश्रम जैसी कुरीतियों को समाज से मिटाना चाहते हैं। इसके लिए लगातार प्रयास करना उनका लक्ष्य है। वह कई रचनात्मक गतिविधियों से भी जुड़े हैं।

झुग्गी में पला रग्बी खेलने का सपना 
सरिता विहार में एक फ्लाईओवर के नीचे झुग्गी में रहने वाली पिंकी रग्बी में अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाना चाहती हैं। खेलते वक्त चोट लगने से वह सालभर रग्बी से दूर रहीं। ठीक होते ही मैदान पर वापस आ गई। पिंकी बताती हैं कि जिस माहौल से वह आती हैं वहां लड़कियों के लिए घर से बाहर निकलना भी मुश्किल है। लोग ताने मारते हैं कि हाफ पैंट पहनकर लड़की खेलने जाती है। उनकी मां की तरह औरतों को भेदभाव का शिकार ना बनना पड़े, महिलाएं सबल बन सकें इसलिए वह सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति भी सजग रहती हैं।

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