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Noida News: धूल फांक रही एमसीएच विंग, अल्ट्रासाउंड के लिए निजी सेंटरों के चक्कर काटने को मजबूर गर्भवती
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नोएडा। भंगेल सीएचसी पर एमसीएच विंग
-एक ही छत के नीचे गर्भवती महिलाओं और नवजातों को नहीं मिल पा रहा समुचित इलाज
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। गर्भवती महिलाओं और नवजातों को एक ही छत के नीचे आधुनिक और बेहतर इलाज मुहैया कराने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये की लागत से भंगेल सीएचसी पर 50 बेड की मदर एंड चाइल्ड हेल्थ (एमसीएच) विंग तैयार की गई थी, लेकिन लंबे समय बाद भी यह विंग केवल धूल फांक रही है।
सीएचसी में इलाज कराने आने वाली गर्भवती महिलाओं को जांच के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। विंग में अल्ट्रासाउंड की सुविधा न होने के कारण जांच के लिए मरीजों को निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों का रुख करना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाएं, जो सरकारी अस्पताल में मुफ्त या सस्ते इलाज की उम्मीद लेकर आती हैं, उन्हें मोटी रकम चुकानी पड़ रही है।
स्टाफ और संसाधनों की कमी से जूझ रही विंग
इमारत बनकर तैयार हुए लंबा वक्त बीत चुका है, लेकिन आवश्यक चिकित्सा उपकरण, रेडियोलॉजिस्ट और विशेषज्ञ स्टाफ की पर्याप्त तैनाती नहीं होने से यह विंग पूरी क्षमता से शुरू नहीं हो सका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विंग पूरी तरह शुरू होने से दर्जनों गांवों को जिला अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ेगे।
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केस 1
भंगेल की रहने वाली तीन महीने की गर्भवती रूबी पति के साथ जांच कराने एमसीएच विंग पहुंची थीं। डॉक्टर ने जरूरी अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी, लेकिन अस्पताल में सुविधा न होने की वजह से रूबी ने निजी सेंटर पर रुपये खर्च जांच करवाई।
केस 2
सलारपुर निवासी 24 वर्षीय पूजा को पेट में तेज दर्द की शिकायत पर परिजन भंगेल सीएचसी की एमसीएच विंग लेकर पहुंचे थे। डॉक्टर ने स्थिति गंभीर बताते हुए अल्ट्रासाउंड कराने को कहा, लेकिन विंग में रेडियोलॉजिस्ट न होने की बात कहकर बाहर जांच कराने की पर्ची थमा दी।
कोट-
एमसीएच विंग में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं है इसलिए यहां पर अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी नहीं है। इसके अलावा अन्य सुविधाओं के लिए भी शासन को पत्र भेजकर मांग की गई है। -डॉ. यतेंद्र सिंह, एमएस भंगेल सीएचसी व एमसीएच विंग
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। गर्भवती महिलाओं और नवजातों को एक ही छत के नीचे आधुनिक और बेहतर इलाज मुहैया कराने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये की लागत से भंगेल सीएचसी पर 50 बेड की मदर एंड चाइल्ड हेल्थ (एमसीएच) विंग तैयार की गई थी, लेकिन लंबे समय बाद भी यह विंग केवल धूल फांक रही है।
सीएचसी में इलाज कराने आने वाली गर्भवती महिलाओं को जांच के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। विंग में अल्ट्रासाउंड की सुविधा न होने के कारण जांच के लिए मरीजों को निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों का रुख करना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाएं, जो सरकारी अस्पताल में मुफ्त या सस्ते इलाज की उम्मीद लेकर आती हैं, उन्हें मोटी रकम चुकानी पड़ रही है।
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स्टाफ और संसाधनों की कमी से जूझ रही विंग
इमारत बनकर तैयार हुए लंबा वक्त बीत चुका है, लेकिन आवश्यक चिकित्सा उपकरण, रेडियोलॉजिस्ट और विशेषज्ञ स्टाफ की पर्याप्त तैनाती नहीं होने से यह विंग पूरी क्षमता से शुरू नहीं हो सका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विंग पूरी तरह शुरू होने से दर्जनों गांवों को जिला अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ेगे।
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केस 1
भंगेल की रहने वाली तीन महीने की गर्भवती रूबी पति के साथ जांच कराने एमसीएच विंग पहुंची थीं। डॉक्टर ने जरूरी अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी, लेकिन अस्पताल में सुविधा न होने की वजह से रूबी ने निजी सेंटर पर रुपये खर्च जांच करवाई।
केस 2
सलारपुर निवासी 24 वर्षीय पूजा को पेट में तेज दर्द की शिकायत पर परिजन भंगेल सीएचसी की एमसीएच विंग लेकर पहुंचे थे। डॉक्टर ने स्थिति गंभीर बताते हुए अल्ट्रासाउंड कराने को कहा, लेकिन विंग में रेडियोलॉजिस्ट न होने की बात कहकर बाहर जांच कराने की पर्ची थमा दी।
कोट-
एमसीएच विंग में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं है इसलिए यहां पर अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी नहीं है। इसके अलावा अन्य सुविधाओं के लिए भी शासन को पत्र भेजकर मांग की गई है। -डॉ. यतेंद्र सिंह, एमएस भंगेल सीएचसी व एमसीएच विंग