उलटफेर: मायावती की बसपा भी टूट की कगार पर, एक और विधायक के बागी होते ही बनेगी नई पार्टी
सूत्रों का दावा है कि पार्टी के बागी विधायकों ने गुटबाजी करते हुए नया राजनीतिक दल बनाने की योजना तैयार की है। उन्हें जैसे ही एक और बागी विधायक का साथ मिलेगा, नई पार्टी बन जाएगी।
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विधानसभा चुनावों की दस्तक होते ही उत्तर प्रदेश में भी सियासी घमासान छिड़ गया है। राज्य में मायावती की बहुजन समाज पार्टी यानी बसपा भी अब बड़ी टूट की कगार पर पहुंच चुकी है। सूत्रों का दावा है कि पार्टी के बागी विधायकों ने गुटबाजी करते हुए नया राजनीतिक दल बनाने की योजना तैयार की है। उन्हें जैसे ही एक और बागी विधायक का साथ मिलेगा, नई पार्टी बन जाएगी। यह जानकारी बसपा के बागी विधायक असलम राइनी ने दी।
उन्होंने बताया कि अब बसपा के सभी बागी विधायक नई राजनीतिक पार्टी बनाएंगे, जिसके नेता बसपा से निष्कासित लालजी वर्मा होंगे। गौरतलब है कि नई पार्टी बनाने के लिए 12 विधायकों की जरूरत होती है। असलम राइनी के मुताबिक, बसपा के बागी विधायकों की संख्या 11 पहुंच चुकी है। उन्होंने दावा किया कि एक और विधायक का साथ मिलते ही नए राजनीतिक दल का एलान कर दिया जाएगा।
The tally for expelled Bahujan Samaj Party (BSP) MLAs is 11 right now. If we get one more MLA, will form our own party. Our leader will be Lalji Verma and he will decide the name and other details of the party: Rebel BSP MLA Aslam Raini pic.twitter.com/maYLoTb6Rc
विज्ञापन विज्ञापन— ANI UP (@ANINewsUP) June 15, 2021
गौरतलब है कि बसपा के बागी विधायकों ने मंगलवार (15 जून) सुबह सपा प्रमुख अखिलेश यादव से भी मुलाकात की थी। हालांकि, सिर्फ छह बागी विधायक ही अखिलेश से मिलने गए थे। इनमें भिनगा-श्रावस्ती से विधायक असलम राइनी, प्रतापपुर-इलाहाबाद से विधायक मुजतबा सिद्दीकी, हांडिया-प्रयागराज से विधायक हाकिम लाल बिंद, सिधौली-सीतापुर से विधायक हरगोविंद भार्गव, ढोलाना-हापुड़ से विधायक असलम अली चौधरी और मुंगरा बादशाहपुर विधायक सुषमा पटेल शामिल थे। इस मुलाकात के बाद बसपा विधायकों के सपा में जाने की अटकलें तेज हो गईं।
जानकारी के मुताबिक, मायावती ने अपने दो विधायकों राम अचल राजभर और लालजी वर्मा को कुछ दिन पहले पार्टी से निष्कासित किया था। उन पर पंचायत चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप था। इसके बाद बागी विधायकों की गतिविधियां अचानक काफी तेज हो गईं। दरअसल, दोनों बागी विधायकों के निष्कासन के बाद बसपा में इस्तीफों का दौर भी तेज हो गया।