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Noida News: यूपी सरकार की एफडीआई प्रोत्साहन नीति- 2023.. घी-तेल, गुटखा, सीमेंट, मदिरा समेत कई उद्योगों नहीं मिलेंगे यीडा में प्लाट
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घी-तेल, गुटखा, सीमेंट और शराब बनाने वाली कंपनियों को नहीं मिलेंगे यीडा में प्लाट
- औद्योगिक निवेश बढ़ाने के साथ पर्यावरण और स्वास्थ्य का भी रखा जाएगा ख्याल
- पूरे प्रदेश के लिए सरकार ने लागू की है नीति, यमुना प्राधिकरण ने भी की घोषणा
सीएल मौर्य
ग्रेटर नोएडा। सरकार ने प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और फॉर्च्यून-500 कंपनियों को आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहन नीति- 2023 बनाई है। इस नीति के अंतर्गत लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर दुष्प्रभाव डालने वाले उद्योगों को प्रतिबंधित कर दिया है। इनमें गुटखा, तंबाकू, मदिरा, सीमेंट, ईंट समेत कई उद्योग शामिल हैं। इस नीति पर यमुना प्राधिकरण ने अमल करना शुरू कर दिया है। यहां उद्योगों को जमीन आवंटित नहीं की जाएगी। पहले चरण में यमुना प्राधिकरण सात औद्योगिक प्लाॅटों के आवंटन करने की तैयारी कर रहा है। यीडा सिटी के सेक्टर-32 में प्रथम चरण में आवंटित किए जाने वाले औद्योगिक भूखंड 10 एकड़ व उससे ऊपर हैं। प्राधिकरण बाद में छोटे भूखंडों की स्कीम भी लाएगा।
एफडीआई से जहां एक ओर नई तकनीकी एवं बेहतर कार्य संस्कृति प्रदेश में आएगी, वहीं इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। यही नहीं देश एवं विश्व की सबसे बड़ी 500 कंपनियों के प्रदेश में स्थापित होने से भी कई लाभ होंगे। अधिकारियों का मानना है कि एफडीआई व फॉर्च्यून- 500 कंपनियों के निवेश से प्रदेश में आधुनिकतम टेक्नोलॉजी आएगी व एक्सपोर्ट को भी बढ़ावा मिलेगा।
रियायती दर पर कंपनियों को उपलब्ध कराई जाएगी जमीन
उद्योगों के लिए भूमि की वर्तमान दरें अधिक हैं। इसको देखते हुए सरकार रियायती दर पर एफडीआई व फॉर्च्यून- ग्लोबल एवं इंडिया- 500 कंपनियों को भूमि उपलब्ध कराएगी। इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं। रियायती दर पर भूमि उपलब्ध कराना प्राथमिकता में शामिल है।
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इन उद्योगों को आवंटित नहीं की जाएगी जमीन
एफडीआई प्रोत्साहन नीति-2023 का लाभ तंबाकू उत्पादों, मदिरा या एरेटेड पेय/ नॉन- एल्कोहॉलिक पेय/ कार्बनेटेड उत्पाद, डिस्टिलर्स, ब्रवरीज, वाइनरीज, बोटलिंग प्लांट एवं कैनिंग प्लांट, वनस्पति घी, शुद्ध तेल, एक्सपेलर तेल का विनिर्माण एवं सॉल्वेंट निकालने की इकाइयाें को नहीं मिलेगा। 100 करोड़ से अधिक निवेश वाले कंपोजिट स्टील प्लांट को छोड़कर सभी लोहा एवं स्टील उद्योगों को भी निगेटिव लिस्ट में रखा गया है। सीमेंट, क्किलंकर और ग्राइंडर का विनिर्माण, ईंट, टाइल्स, किल्स का विनिर्माण पेट्रोलियम उत्पादों की शुद्धिकरण, खनन एवं उत्खनन, पटाखा विनिर्माण उद्यम, 40 माइक्रॉन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक कैरी बैग का विनिर्माण, वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स तथा निजी औद्योगिक पार्क आदि शामिल हैं।
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- औद्योगिक निवेश बढ़ाने के साथ पर्यावरण और स्वास्थ्य का भी रखा जाएगा ख्याल
- पूरे प्रदेश के लिए सरकार ने लागू की है नीति, यमुना प्राधिकरण ने भी की घोषणा
सीएल मौर्य
ग्रेटर नोएडा। सरकार ने प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और फॉर्च्यून-500 कंपनियों को आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहन नीति- 2023 बनाई है। इस नीति के अंतर्गत लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर दुष्प्रभाव डालने वाले उद्योगों को प्रतिबंधित कर दिया है। इनमें गुटखा, तंबाकू, मदिरा, सीमेंट, ईंट समेत कई उद्योग शामिल हैं। इस नीति पर यमुना प्राधिकरण ने अमल करना शुरू कर दिया है। यहां उद्योगों को जमीन आवंटित नहीं की जाएगी। पहले चरण में यमुना प्राधिकरण सात औद्योगिक प्लाॅटों के आवंटन करने की तैयारी कर रहा है। यीडा सिटी के सेक्टर-32 में प्रथम चरण में आवंटित किए जाने वाले औद्योगिक भूखंड 10 एकड़ व उससे ऊपर हैं। प्राधिकरण बाद में छोटे भूखंडों की स्कीम भी लाएगा।
एफडीआई से जहां एक ओर नई तकनीकी एवं बेहतर कार्य संस्कृति प्रदेश में आएगी, वहीं इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। यही नहीं देश एवं विश्व की सबसे बड़ी 500 कंपनियों के प्रदेश में स्थापित होने से भी कई लाभ होंगे। अधिकारियों का मानना है कि एफडीआई व फॉर्च्यून- 500 कंपनियों के निवेश से प्रदेश में आधुनिकतम टेक्नोलॉजी आएगी व एक्सपोर्ट को भी बढ़ावा मिलेगा।
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रियायती दर पर कंपनियों को उपलब्ध कराई जाएगी जमीन
उद्योगों के लिए भूमि की वर्तमान दरें अधिक हैं। इसको देखते हुए सरकार रियायती दर पर एफडीआई व फॉर्च्यून- ग्लोबल एवं इंडिया- 500 कंपनियों को भूमि उपलब्ध कराएगी। इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं। रियायती दर पर भूमि उपलब्ध कराना प्राथमिकता में शामिल है।
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इन उद्योगों को आवंटित नहीं की जाएगी जमीन
एफडीआई प्रोत्साहन नीति-2023 का लाभ तंबाकू उत्पादों, मदिरा या एरेटेड पेय/ नॉन- एल्कोहॉलिक पेय/ कार्बनेटेड उत्पाद, डिस्टिलर्स, ब्रवरीज, वाइनरीज, बोटलिंग प्लांट एवं कैनिंग प्लांट, वनस्पति घी, शुद्ध तेल, एक्सपेलर तेल का विनिर्माण एवं सॉल्वेंट निकालने की इकाइयाें को नहीं मिलेगा। 100 करोड़ से अधिक निवेश वाले कंपोजिट स्टील प्लांट को छोड़कर सभी लोहा एवं स्टील उद्योगों को भी निगेटिव लिस्ट में रखा गया है। सीमेंट, क्किलंकर और ग्राइंडर का विनिर्माण, ईंट, टाइल्स, किल्स का विनिर्माण पेट्रोलियम उत्पादों की शुद्धिकरण, खनन एवं उत्खनन, पटाखा विनिर्माण उद्यम, 40 माइक्रॉन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक कैरी बैग का विनिर्माण, वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स तथा निजी औद्योगिक पार्क आदि शामिल हैं।