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चुनी हुई सरकार को बाइपास कर रहे एलजी : सिसोदिया

Tue, 24 Jan 2023 07:19 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 24 Jan 2023 07:19 PM IST
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LG bypassing the elected government: Sisodia
उपमुख्यमंत्री ने नियम विरुद्ध अभियोजन की मंजूरी को अधिकृत करने पर अफसरों को लगाई फटकार
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मुख्य सचिव को आज शाम 5 बजे तक बिना मंजूरी वाले सभी मामलों की सूची पेश करने का निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मंगलवार को उपराज्यपाल व मुख्य सचिव पर चुनी हुई दिल्ली सरकार को बाइपास कर निर्णय लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नियम विरुद्ध अभियोजन की मंजूरी देने से राज्य के खिलाफ गंभीर अपराध करने के कई आरोपी छूट सकते हैं। इस बाबत उन्होंने अधिकारियों को फटकार भी लगाई। मुख्य सचिव को बुधवार शाम 5 बजे तक ऐसे सभी मामलों की सूची पेश करने का निर्देश दिया है, जिन मामलों में उनसे मंजूरी नहीं ली गई है।
सिसोदिया ने मुख्य सचिव से कहा है कि छह महीने में नियम विरुद्ध जारी की गई अभियोजन मंजूरी के सभी मामलों की सूची पेश करें, क्योंकि इस वजह से कानूनी संकट पैदा हो गया है। आईपीसी की धारा-196 कहती है कि राज्य के खिलाफ किए गए अपराधों के मामले में कोई भी अदालत राज्य सरकार के अनुमोदन या मंजूरी के बिना ऐसे किसी भी मामले का संज्ञान नहीं लेगी। कई जघन्य अपराध इसी श्रेणी में आते हैं। दिल्ली सरकार के विधि विभाग के अनुसार, इस कानून में राज्य सरकार का मतलब निर्वाचित सरकार है। इसका मतलब यह है कि प्रभारी मंत्री ही सक्षम प्राधिकारी है और इन सभी मामलों में मंत्री की मंजूरी आवश्यक है। मंत्री की मंजूरी के बाद फाइल उपराज्यपाल के पास यह तय करने के लिए भेजी जाएगी कि क्या वे मंत्री के फैसले से अलग हैं या वे इसे राष्ट्रपति को भेजना चाहते हैं। कुछ माह पहले तक यही प्रक्रिया अपनाई जा रही थी, लेकिन कुछ महीने से मुख्य सचिव ने मंत्री को दरकिनार करते हुए इन सभी फाइलों को सीधे उपराज्यपाल को भेजना शुरू कर दिया। उपराज्यपाल ने भी इन सभी मामलों में अनुमोदन दे दिया, जबकि उनके पास अनुमोदन देने का अधिकार नहीं हैं। लिहाजा, कुछ महीनों में ऐसे सभी आपराधिक मामलों में अभियोजन पक्ष के लिए दी गई मंजूरी अमान्य है और जब आरोपी इस बात को कोर्ट में उठाएंगे तो उन्हें छोड़ा जा सकता है।
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सीआरपीसी की धारा-196
सिसोदिया ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 196 (1) के तहत कुछ अपराधों के मामले में राज्य सरकार से अभियोजन के लिए कानूनी मंजूरी एक आवश्यक शर्त है। इसमें अभद्र भाषा, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना, जघन्य अपराध, राजद्रोह, राज्य के खिलाफ विद्रोह करना, दुश्मनी को बढ़ावा देने जैसे अपराध शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार, निर्वाचित सरकार सीआरपीसी की धारा-196 (1) के तहत मुकदमा चलाने हेतु कानूनी मंजूरी देने के लिए कार्यकारी शक्तियों का इस्तेमाल करेगी और एलजी मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह से बंधे होंगे। मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह से अलग एकतरफा मंजूरी देने की कोई शक्ति नहीं है।
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