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Noida News: उम्र को पीछे छोड़ दोस्ती के रंग में रंगी जिंदगी, 70 बुजुर्गों ने बनाया दूसरा परिवार

Tue, 01 Sep 2026 08:39 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 01 Sep 2026 08:39 PM IST
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Leaving age behind, life is colored by friendship, 70 elderly people have created a second family.
जाहिल खली
फोटो
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ज्योति कार्की
नोएडा। उम्र बढ़ने के साथ जहां कई बुजुर्गों की जिंदगी घर की चारदीवारी तक सिमट जाती है, वहीं सेक्टर-134 स्थित जेपी कॉसमॉस सोसाइटी के बुजुर्गों ने अकेलेपन को अपनी जिंदगी पर हावी नहीं होने दिया। यहां करीब 70 बुजुर्गों ने मिलकर सीनियर सिटीजन क्लब बनाया है। करीब चार महीने पहले शुरू हुआ यह क्लब अब उनके लिए सिर्फ मिलने-जुलने की जगह नहीं, बल्कि दोस्ती, बातचीत और अपनापन बांटने का माध्यम बन गया है।
क्लब के अध्यक्ष चौधरी ओम सिंह बताते हैं कि कुछ बुजुर्गों ने मिलकर इसकी शुरुआत की थी। शुरुआत में सदस्य संख्या कम थी, लेकिन धीरे-धीरे सोसाइटी के महिला और पुरुष दोनों इससे जुड़ते गए। अब करीब 70 सदस्य क्लब का हिस्सा हैं। सदस्य रोजाना मिलते हैं, अपने अनुभव साझा करते हैं और एक-दूसरे का हालचाल जानते हैं। इससे उन्हें घर से बाहर निकलने और सामाजिक रूप से सक्रिय रहने का अवसर मिलता है। उनका कहना है कि क्लब का उद्देश्य बुजुर्गों को व्यस्त रखना ही नहीं, बल्कि उन्हें यह एहसास कराना भी है कि वे अकेले नहीं हैं।
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साथियों संग घूमने की भी बनती है योजना
क्लब की गतिविधियां सोसाइटी तक सीमित नहीं हैं। सदस्य समय-समय पर बाहर घूमने का कार्यक्रम भी बनाते हैं। 75 वर्षीय आरके माथुर बताते हैं कि साथियों के साथ घूमने की योजना बनाना ही खुशी देता है। पहले बाहर जाने के लिए किसी के साथ की जरूरत होती थी, लेकिन अब कई लोग मिलकर कार्यक्रम बना लेते हैं। इससे आपसी मेलजोल और अपनापन भी बढ़ रहा है।
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उम्र चाहे 65 हो या 80, जिंदगी में दोस्ती और उत्साह की जरूरत हमेशा रहती है। यह क्लब इसी सोच के साथ बुजुर्गों को फिर से सामाजिक जीवन से जोड़ रहा है- चौधरी ओम सिंह (75)
उम्र के इस पड़ाव पर सबसे जरूरी चीज किसी का साथ और बातचीत है। क्लब में आने पर नए लोगों से मिलने का मौका मिला। यहां सभी एक-दूसरे की बात सुनते हैं और जरूरत पड़ने पर साथ खड़े रहते हैं। ऊषा रानी (68)
पहले कई बार दिन घर पर ही निकल जाता था, लेकिन अब क्लब की बैठक और साथियों से मिलने का इंतजार रहता है। लगता है जैसे सोसाइटी में ही एक बड़ा परिवार मिल गया हो- आरके माथुर, (75)
80 वर्षीय बीएस गुहाई के लिए भी क्लब ने दिनचर्या को नया रंग दिया है। जब हम एक साथ बैठते हैं तो पुरानी यादों से लेकर आज की जिंदगी तक चर्चा होती है। इससे मन भी खुश रहता है- बीएस गुहाई (80)
क्लब में अलग-अलग उम्र और पृष्ठभूमि के लोग जुड़े हैं। कोई अपनी पुरानी नौकरी के अनुभव साझा करता है तो कोई अपने परिवार या शौक के बारे में बताता है- जाहिर खली (65)

इस उम्र में साथ होना सबसे बड़ी जरूरत है। यहां किसी को कोई परेशानी हो तो दूसरे सदस्य उसकी मदद के लिए आगे आते हैं- डीके चौधरी (76)

जाहिल खली

जाहिल खली

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जाहिल खली

जाहिल खली

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