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गूगल से सीखा तरीका, दो साल में बेचे 25 लाख के नकली रेलवे टिकट
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी।
- फोटो : Grnoida
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ग्रेटर नोएडा/दादरी। सॉफ्टवेयर की मदद से यूजर आईडी बनाकर रेलवे के नकली ई-टिकट बनाने वाले सरगना की गिरफ्तारी के बाद रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने एक और फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। दादरी आरपीएफ ने महाराष्ट्र साइबर सेल की सूचना पर नोएडा के भंगेल से साइबर कैफे के संचालक को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर तत्काल के ई-टिकट बेचने का लाइसेंस है, लेकिन इसकी आड़ में आरोपी दो साल में 25 लाख रुपये की नकली टिकट बेच चुका है। आरोपी के कब्जे से आरपीएफ ने दस हजार रुपये, 4850 रुपये के नकली ई-टिकट, कंप्यूटर, प्रिंटर समेत अन्य उपकरण बरामद किए हैं।
आरपीएफ प्रभारी निरीक्षक एसके वर्मा ने बताया कि सेक्टर-110 भंगेल में यूनिवर्सल नाम से साइबर कैफे गजेंद्र कुमार चलाता है। महाराष्ट्र के पुणे की साइबर सेल को नकली ई-टिकट बेचने की जानकारी मिली थी। प्रयागराज आरपीएफ को इसकी सूचना दी गई और दादरी पुलिस ने भंगेल स्थित साइबर कैफे में छापा मारकर गजेंद्र को गिरफ्तार कर लिया। गजेंद्र ने दो साल पहले लॉकडाउन में गूगल की मदद से नकली ई-टिकट बनाना सीखा था। किसी व्यक्ति ने गूगल पर नकली ई-टिकट के बारे में जानकारी दी हुई थी। इसके बाद उसने अपना सॉफ्टवेयर तैयार कर टिकट लेने आने वाले लोगों के ई-मेल, मोबाइल नंबर आदि की मदद से नकली रेलवे टिकट बनाना शुरू कर दिया। अब तक आरोपी 25 लाख रुपये के नकली टिकट बेच चुका है। आरोपी यात्रियों को तत्काल की टिकट बनाकर देता था।
आईपी एड्रेस की मदद से पकड़ा
एसके वर्मा ने बताया कि ग्राहकों के मोबाइल नंबर और ई-मेल का आरोपी इस्तेमाल करता था। इस कारण आरोपी पकड़ में नहीं आता था। महाराष्ट्र आरपीएफ को जब तत्काल के नकली ई-रेलवे टिकट की जानकारी हुई तो गहनता से पड़ताल की गई। इसमें आरोपी के कंप्यूटर का आईपी एड्रेस पता कर लिया गया। इसके बाद आरोपी की पहचान कर कार्रवाई की गई।
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आरपीएफ प्रभारी निरीक्षक एसके वर्मा ने बताया कि सेक्टर-110 भंगेल में यूनिवर्सल नाम से साइबर कैफे गजेंद्र कुमार चलाता है। महाराष्ट्र के पुणे की साइबर सेल को नकली ई-टिकट बेचने की जानकारी मिली थी। प्रयागराज आरपीएफ को इसकी सूचना दी गई और दादरी पुलिस ने भंगेल स्थित साइबर कैफे में छापा मारकर गजेंद्र को गिरफ्तार कर लिया। गजेंद्र ने दो साल पहले लॉकडाउन में गूगल की मदद से नकली ई-टिकट बनाना सीखा था। किसी व्यक्ति ने गूगल पर नकली ई-टिकट के बारे में जानकारी दी हुई थी। इसके बाद उसने अपना सॉफ्टवेयर तैयार कर टिकट लेने आने वाले लोगों के ई-मेल, मोबाइल नंबर आदि की मदद से नकली रेलवे टिकट बनाना शुरू कर दिया। अब तक आरोपी 25 लाख रुपये के नकली टिकट बेच चुका है। आरोपी यात्रियों को तत्काल की टिकट बनाकर देता था।
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आईपी एड्रेस की मदद से पकड़ा
एसके वर्मा ने बताया कि ग्राहकों के मोबाइल नंबर और ई-मेल का आरोपी इस्तेमाल करता था। इस कारण आरोपी पकड़ में नहीं आता था। महाराष्ट्र आरपीएफ को जब तत्काल के नकली ई-रेलवे टिकट की जानकारी हुई तो गहनता से पड़ताल की गई। इसमें आरोपी के कंप्यूटर का आईपी एड्रेस पता कर लिया गया। इसके बाद आरोपी की पहचान कर कार्रवाई की गई।
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